Wednesday, December 12, 2018

ना तो कारवां की तलाश है

ना तो कारवां की तलाश है, ना तो रहबर की तलाश है
मेरे शौके खाना ख़राब को, तेरी रहगुजर की तलाश है.
मेरे ना मुराद जूनून का है इलाज तो कोई मौत है
जो दवा के नाम पे जहर दे उसी चारागर की तलाश है .

तेरा इश्क है मेरी आरज़ू, तेरा इश्क है तेरी आबरू
तेरा इश्क मैं कैसे छोड़ दूं, मेरी उम्र भर की तलाश है
दिल इश्क, जिस्म इश्क और जान इश्क है
ईमान की जो पूछो तो ईमान इश्क है
तेरा इश्क मैं कैसे छोड़ दूं, मेरी उम्र भर की तलाश है

जांसोज़ की हालत को जांसोज़ ही समझेगा
मैं शमा से कहता हूँ महफ़िल से नहीं कहता क्योंकि
ये इश्क इश्क है..

सहर तक सब का है अंजाम है जलकर ख़ाक हो जाना
बने महफ़िल में कोई शमा या परवाना हो जाये क्योंकि
ये इश्क इश्क है..

वहशते दिल रस्नो दार से रोकी न गयी
किसी खंज़र किसी तलवार से रोकी न गए
इश्क मजनूं की वो आवाज़ है, जिस के आगे
कोई लैला किसी दीवार से रोकी न गयी
ये इश्क इश्क है..

वो हँस के अगर मांगे तो हम जान भी दे दें
ये जान तो क्या चीज है, ईमान भी दे दें

नाजो अंदाज से कहते हैं क़ि जीना होगा
जहर भी देते हैं तो कहते हैं क़ि पीना होगा
जब मैं पीता हूँ तो कहते हैं क़ि मरता भी नहीं
जब मैं मरता हूँ तो कहते हैं क़ि जीना होगा
ये इश्क इश्क है..

मजहब इ इश्क की हर रस्म कड़ी होती है
हर कदम पे कोई दीवार खड़ी होती है
इश्क आज़ाद है, हिन्दू न मुस्लमान है इश्क
आप ही धर्म है और आप ही ईमान है इश्क
जिस से आगाह नहीं शेख ओ बरहन दोनों
इस हकीकत का गरजता हुआ ऐलान है इश्क

इश्क न पुच्छे दीं धरम नूं, इश्क न पूछे जातां
इश्क दे हत्थों गर्म लहू विच डूबियाँ लक्ख बराताँ 
 ये इश्क इश्क है..

राह उल्फ की कठिन है इसे आसान न समझ, क्योंकि
ये इश्क इश्क है..

बहुत कठिन है डगर पनघट की
अब क्या भर लाऊँ मैं जमुना से मटकी
मैं जो चली जल जमुना भरण को
नन्द को छोरो मोहे रोको
अब लाज रखो मेरे घूँघट पट की

जब जब कृष्ण की बंसी बजी निकली राधा सज से
जान अजान का ध्यान भुला के, लोकलाज को ताज के
बन-बन डोली जनक दुलारी पहन के प्रेम की माला
दर्शन जल की प्यासी मीरा पी गए विष का प्याला
और फिर अर्ज करी क़ि लाज राखो राखो राखो

अल्लाह और रसूल का फरमान इश्क है

यानी हदीस इश्क है, कुरान इश्क है
गौतम का और मसीहा का अरमान इश्क है
ये कायनात जिस्म है, और जान इश्क है
इश्क सरमद, इश्क ही मंसूर है
इश्क मूसा, इश्क कोहेतूर है
खाक को बुत और बुत को देवता करता है इश्क
इंतिहा ये है के बन्दे को खुदा करता है इश्क 
 ये इश्क इश्क है.।

Wednesday, December 5, 2018

तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको

तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है।

मेरे दिल की मेरे जज़बात की कीमत क्या है
उलझे-उलझे से ख्यालात की कीमत क्या है
मैंने क्यूं प्यार किया तुमने न क्यूं प्यार किया
इन परेशान सवालात कि कीमत क्या है
तुम जो ये भी न बताओ तो ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है।

ज़िन्दगी सिर्फ़ मुहब्बत नहीं कुछ और भी है
ज़ुल्फ़-ओ-रुख़सार की जन्नत नहीं कुछ और भी है
भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में
इश्क़ ही एक हक़ीकत नहीं कुछ और भी है
तुम अगर आँख चुराओ तो ये हक़ है तुमको
मैंने तुमसे ही नहीं सबसे मुहब्बत की है
तुम अगर आँख चुराओ तो ये हक़ है तुमको।

तुमको दुनिया के ग़म-ओ-दर्द से फ़ुरसत ना सही
सबसे उलफ़त सही मुझसे ही मुहब्बत ना सही
मैं तुम्हारी हूँ यही मेरे लिये क्या कम है
तुम मेरे होके रहो ये मेरी क़िस्मत ना सही
और भी दिल को जलाओ ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है।

Wednesday, November 21, 2018

बच्चों तुम तकदीर हो कल के हिंदुस्तान की

बच्चों तुम तकदीर हो कल के हिंदुस्तान की
बापू के वरदान की, नेहरु के अरमान की।

आज के टूटे खँडहरों पर तुम कल का देश बसाओगे
जो हम लोगों से न हुआ वो तुम कर के दिखलाओगे
तुम नन्हीं बुनियादें हो दुनिया के नए विधान की।

दीन-धरम के नाम पे कोई बीज फूट का बोए ना
जो सदियों के बाद मिली है वो आज़ादी खोए ना
हर मज़हब से ऊँची है क़ीमत इन्सानी जान की।

फिर कोई जयचन्द न उभरे फिर कोई जाफ़र न उठे
ग़ैरों का दिल ख़ुश करने को अपनों पर खंज़र न उठे
धन-दौलत के लालच में तौहीन न हो ईमान की।
नारी को इस देश ने देवी कह कर दासी जाना है
जिसको कुछ अधिकार न हो वो घर की रानी माना है
तुम ऐसा आदर मत लेना आड़ हो जो अपमान की।

रह न सके अब इस दुनिया में युग सरमायादारी का
तुमको झंडा लहराना है मेहनत की सरदारी का
तुम चाहो तो बदल के रख दो क़िस्मत हर इन्सान की।

अब अगर हमसे ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए

अब अगर हम से ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए
गैर-मुमकिन है कि दिल दिल से जुदा हो जाए
जिस्म मिट जाए कि अब जान फ़ना हो जाए
गैर-मुमकिन है कि दिल दिल से जुदा हो जाए

जिस घड़ी मुझको पुकारेंगी तुम्हारी बांहें
रोक पाएंगी न सहरा की सुलगती राहें
चाहे हर सांस झुलसने की सज़ा हो जाए

लाख ज़ंजीरों में जकड़ें ये ज़माने वाले
तोड़कर बंध निकल आएंगे आने वाले
शर्त इतनी है कि तू जलवा-नुमां हो जाए

ज़लज़ले आएं, गरज़दार घटाएं घेरें
खंदकें राह में हों, तेज़ हवाएं घेरें
चाहे दुनिया में क़यामत ही बपा हो जाए

Wednesday, October 31, 2018

अरे भई निकल के आ घर से

अरे भई निकल के आ घर से! (2)

अरे भई निकल के आ घर से, आ घर से (2)
दुनिया की रौनक देख फिर से देख ले फिर से (2)
होय! अरे भई निकल के आ घर से, आ घर से

केम ऊँघेचे भई घनश्याम जी, ओ (2)

दुनिया बदल गयी प्यारे, आगे निकल गयी प्यारे (2)
अन्धे कुँए में घुस के क्यों बैठा हुआ है मन मारे (2)
अरे भई निकल के आ घर से …

तुला भीती ही कसली वाट ते, रे (2)

पानी को, तेल को छोड़ा, बिजली की रेल को छोड़ा (2)
कल चाँद और तारों में पहुँचेगा ऐटमी घोड़ा
अरे भई, अरे भई
अरे भई निकल के आ घर से …

कैनो भाबेन ओकारन ऐ बंकी बाबू, रे (2)

कल जो था कल रहा होगा, आगे की सोच क्या होगा (2)
टूटी पुरानी ढफली पे, तू कल कमर दिया मलेगा? (2)
अरे भई निकल के आ घर से …

फ़िल्म: नई दिल्ली / New Delhi (1956)
गायक/गायिका: किशोर कुमार
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: किशोर कुमार, वैजयन्ती माला

Tuesday, October 2, 2018

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ हैं

ये कूचे, ये नीलाम घर दिलकशी के
ये लुटते हुए कारवां जिंदगी के
कहाँ है, कहाँ है मुहाफ़िज़ खुदी के
जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ हैं
कहाँ है, कहाँ है, कहाँ है …

ये पुरपेच गलियां, ये बदनाम बाज़ार
ये गुमनाम राही, ये सिक्कों की झंकार
ये इस्मत के सौदे, ये सौदे पे तकरार
जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ हैं
कहाँ है, कहाँ है, कहाँ है …

ये सदियों से बेखौफ़ सहमी सी गलियां
ये मसली हुई अधखिली ज़र्द कलियां
ये बिकती हुई खोखली रंगरलियाँ
जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ हैं
कहाँ है, कहाँ है, कहाँ है …

वो उजले दरीचों में पायल की छन-छन
थकी हारी सांसों पे तबले की धन-धन
ये बेरूह कमरो में खांसी की ठन-ठन
जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ हैं
कहाँ है, कहाँ है, कहाँ है …

ये फूलों के गजरे, ये पीकों के छींटे
ये बेबाक नज़रे, ये गुस्ताख फ़िक़रे
ये ढलके बदन और ये बीमार चेहरे
जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ हैं
कहाँ है, कहाँ है, कहाँ है …

यहाँ पीर भी आ चुके हैं, जवां भी
तनूमन्द बेटे, अब्बा मियां भी
ये बीवी भी है और बहन भी, माँ भी
जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ हैं
कहाँ है, कहाँ है, कहाँ है …

मदद चाहती है ये हव्वा की बेटी
यशोदा की हम्जिन्स, राधा की बेटी
पयम्बर की उम्मत , जुलेखां की बेटी
जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ हैं
कहाँ है, कहाँ है, कहाँ है …

ज़रा इस मुल्क के रहबरों को बुलाओ
ये कूचे ये गलियां ये मंज़र दिखाओ
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर उनको लाओ
जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ हैं

कहाँ है, कहाँ है, कहाँ है …।

Friday, September 21, 2018

मन रे तू काहे न धीर धरे

मन रे तू काहे ना धीर धरे
ओ निर्मोही मोह ना जाने, जिनका मोह करे
मन रे तू काहे ना धीर धरे |

इस जीवन की चढ़ती ढलती
धूप को किसने बांधा
रंग पे किसने पहरे डाले
रुप को किसने बांधा
काहे ये जतन करे |

उतना ही उपकार समझ कोई
जितना साथ निभा दे
जनम मरन का मेल है सपना
ये सपना बिसरा दे
कोई न संग मरे |

Thursday, September 20, 2018

बहार बनके वो मुस्कुराए हमारे गुलशन में
बाद-ए-सबा तू न आए तो क्या, काली घटा तू न छाए तो क्या
बहार बनके वो मुस्कुराए हमारे गुलशन में

मेरे दिल की राहों पे मेरे संग-संग आ
तुझको दिखला दूँ मैं हमदम अपना
रंगोंभरी दुनिया मेरी, मेरा प्यार पहला
बाद-ए-सबा तू न आए तो क्या, काली घटा तू न छाए तो क्या
बहार बनके वो मुस्कुराए हमारे गुलशन में

छुपके कोई आया है जबसे दिल में
हर दिन नई हलचल है मेरी महफ़िल में
धड़कन मेरी गाने लगी अभी गीत उनका
बाद-ए-सबा तू न आए तो क्या, काली घटा तू न छाए तो क्या

मतवाली डोलूँ मैं, खोई सपनों में
अब मेरा दिल लागे ना मेरे अपनों में
क्या मिल गया क्या खो गया, दिल ही जाने मेरा
बाद-ए-सबा तू न आए तो क्या, काली घटा तू न छाए तो क्या
बहार बनके वो मुस्कुराए हमारे गुलशन में

Film : Apne Huye Paraye
Music Director : Shankar-Jaikishan
Year : 1963 Singer(s) : Lata, Chorus
Audio Video On Screen Mala Sinha

Sunday, September 16, 2018

कभी -कभी मेरे दिल में ख़याल आता है

कभी -कभी मेरे दिल में ख़याल आता है !
कि ज़िन्दगी तेरी जुल्फों की नरम छाओं में
गुजरने पाती तो शादाब हो भी सकती थी .
ये तीरगी जो मेरी जीस्त का मुक़द्दर है,
तेरी नज़र की शुआओं में खो भी सकती थी .

अजब न था कि मैं बेगाना ए अलम रहकर
तेरे जमाल की रानाईयों में खो रहता
तेरा गुदाज बदन तेरी नीमबाज आँखें
इन्ही हसीं फसानों में मैं खो रहता
पुकारती जब मुझे तल्खियाँ ज़माने की ..
तेरे लबों से हलावत के घूंट पे लेता ...
हयात चीखती फिरती बरहना सर..
और मैं घनेरी जुल्फों में चुप के जी लेता ...!!
मगर यह हो न सका और अब ये आलम है
कि तू नहीं, तेरा गम, तेरी जुस्तजू भी नहीं .
गुज़र रही हैं कुछ तरह जिंदगी जैसे इसे
किसी के सहारे की आरज़ू भी नहीं .

ज़माने भर के दुखो को लगा चुका हूँ गले
गुजर रहा हूँ कुछ अनजानी राहगुज़ारों से
मुहीद साए मेरी सिम्त बढते आते हैं
हयात ओ मौत के पुरहौल खाज़ारों से .
न कोई जादा, न मंजिल न रौशनी का सुराग
भटक रही हैं खल्वतों में यूँ जिंदगी अपनी
इन्हीं ख़लाओं में रह जाऊँगा कभी खो कर
मैं जानता हूँ मेरी हमनफस ....मगर यूँ ही

कभी -कभी मेरे दिल में ख़याल आता है ।

Thursday, September 6, 2018

ये किसका लहू है कौन मरा

धरती की सुलगती छाती के बैचेन शरारे पूछते हैं
तुम लोग जिन्हे अपना न सके, वो खून के धारे पूछते हैं

सड़कों की जुबान चिल्लाती है
सागर के किनारे पूछते हैं -
ये किसका लहू है कौन मरा
ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.

ये जलते हुए घर किसके हैं

ये कटते हुए तन किसके है,
तकसीम के अंधे तूफ़ान में
लुटते हुए गुलशन किसके हैं,
बदबख्त फिजायें किसकी हैं
बरबाद नशेमन किसके हैं,

कुछ हम भी सुने, हमको भी सुना.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.

किस काम के हैं ये दीन धरम
जो शर्म के दामन चाक करें,
किस तरह के हैं ये देश भगत
जो बसते घरों को खाक करें,
ये रूहें कैसी रूहें हैं
जो धरती को नापाक करें,

आँखे तो उठा, नज़रें तो मिला.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बताये किसका लहू है कौन मरा.

जिस राम के नाम पे खून बहे
उस राम की इज्जत क्या होगी,
जिस दीन के हाथों लाज लूटे
उस दीन की कीमत क्या होगी,
इन्सान की इस जिल्लत से परे
शैतान की जिल्लत क्या होगी,

ये वेद हटा, कुरआन उठा.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा।

Wednesday, August 22, 2018

चलत मुसाफ़िर मोह लियो रे

चलत मुसाफ़िर मोह लियो रे पिंजड़े वाली मुनिया – 4

उड़ उड़ बैठी हलवइया दुकनिया – 2
हे रामा!
उड़ उड़ बैठी हलवइया दुकनिया
आरे!
(बरफ़ी के सब रस ले लियो रे
पिंजड़े वाली मुनिया) – 2

अ हे अ हे… हे रामा

उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया – 2
आहा!
उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया
आरे!
(कपड़ा के सब रस ले लियो रे
पिंजड़े वाली मुनिया) – 3

जियो जियो पलकदस जियो!!

उड़ उड़ बैठी पनवड़िया दुकनिया – 2
हे रामा!
उड़ उड़ बैठी पनवड़िया दुकनिया
आरे!
(बीड़ा के सब रस ले लियो रे
पिंजड़े वाली मुनिया) – 3

रात के रही थक मत जाना

रात के रही थक मत जाना
सुबह की मंजिल दूर नहीं
रात के राही ...

धरती के फैले आँगन में, पल दो पल है रात का डेरा
जुल्म का सीना चीर के देखो, झांक रहा है नया सवेरा
ढलता दिन मजबूर सही,
चढ़ाता सूरज मजबूर नहीं, मजबूर नहीं
थक मत जाना, ओ राही थक मत जाना।

सदियों तक चुप रहने वाले, अब अपना हक़ लेके रहेंगे
जो करना है खुल के करेंगे, जो कहना है साफ़ कहेंगे
जीते जी घुट घुट कर मरना
इस जग का दस्तूर नहीं, दस्तूर नहीं
थक मत जाना, ओ राही थक मत जाना।

टूटेंगी बोझल जंजीरे, जागेंगी सोयी तकदीरें
लूट पे कब तक पहरा देंगी, जंग लगी खूनी शमशीरें
रह नहीं सकता इस दुनिया में,
जो सब को मंजूर नहीं, मंजूर नहीं
थक मत जाना, ओ राही थक मत जाना।

Thursday, August 16, 2018

बाग़ में कली खिली बगिया महकी

बाग़ में कली खिली बगिया महकी पर हाय रे 
अभी इधर भँवरा नहीं आया
राह में नज़र बिची बहकी-बहकी और बेवजह
घड़ी घड़ी ये दिल घबराया हाय रे
क्यों न आया, क्यों न आया, क्यों न आया

बैठे हैं हम तो अरमाँ जगाये
सीने में लाखों तूफ़ाँ छुपाये 
मत पूछ मन को कैसे मनाया 
बाग़ में ... 

सपने जो आये तड़पाके जाये
दिल की लगी को दहकाके जाये
मुश्किल से हम ने हर दिन बिताया
बाग़ में ... 

इक मीठी अगनी में जलता है तन-मन 
बात और बिगड़ी आया जो सावन 
बचपन गँवाके मैं ने सब कुछ गँवाया 
बाग़ में ...


चित्रपट / Film: Chand Aur Suraj
संगीतकार / Music Director: Salil Choudhary
गीतकार / Lyricist: शैलेन्द्र-(Shailendra)
गायक / Singer(s): आशा भोसले-(Asha)

Wednesday, August 15, 2018

तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा

तू हिन्दु बनेगा ना मुसलमान बनेगा
इन्सान की औलाद है इन्सान बनेगा ।

अच्छा है अभी तक तेरा कुछ नाम नहीं है
तुझको किसी मजहब से कोई काम नहीं है
जिस इल्म ने इंसान को तकसीम किया है
उस इल्म का तुझ पर कोई इलज़ाम नहीं है
तू बदले हुए वक्त की पहचान बनेगा ।

मालिक ने हर इंसान को इंसान बनाया
हमने उसे हिन्दू या मुसलमान बनाया
कुदरत ने तो बख्शी थी हमें एक ही धरती
हमने कहीं भारत कहीं इरान बनाया
जो तोड़ दे हर बंध वो तूफ़ान बनेगा ।

नफरत जो सिखाये वो धरम तेरा नहीं है
इन्सां को जो रौंदे वो कदम तेरा नहीं है
कुरआन न हो जिसमे वो मंदिर नहीं तेरा
गीता न हो जिसमे वो हरम तेरा नहीं है
तू अम्न का और सुलह का अरमान बनेगा ।

ये दीन के ताजिर ये वतन बेचने वाले
इंसानों की लाशों के कफ़न बेचने वाले
ये महलों में बैठे हुए ये कातिल ये लुटेरे
काँटों के एवज़ रूह-ए-चमन बेचने वाले
तू इनके लिये मौत का ऐलान बनेगा।

Wednesday, August 1, 2018

चाहे ये मानो चाहे वो मानो

काबे में रहो या काशी में, निस्बत तो उसी की ज़ात से है
तुम राम कहो के रहीम कहो, मतलब तो उसी की बात से ह।

ये मस्जिद है वो बुतखाना, चाहे ये मानो चाहे वो मानो
मकसद तो है दिल को समझाना, मानो ये मानो चाहे वो मान।

ये शेख़-ओ-बरहमन के झगड़े, सब नासमझी की बाते हैं
हमने तो है बस इतना जाना, चाहे ये मानो चाहे वो मान।

गर जज़्ब-ए-मुहब्बत सादिक हो, हर दर से मुरादें मिलती हैं
मंदिर से मुरादें मिलती हैं, मस्जिद से मुरादें मिलती है।

काबे से मुरादें मिलती हैं, काशी से मुरादें मिलती हैं
हर घर है उसी का काशाना, चाहे ये मानो चाहे वो मानो।

Thursday, July 26, 2018

इक रास्ता है जिंदगी जो थम गए तो कुछ नहीं

इक रास्ता है जिंदगी जो थम गए तो कुछ नहीं
ये कदम किसी मुकाम पे जो जम गए तो कुछ नहीं

ओ जाते राही ! ओ बाँके राही!
मेरी बाँहों को, इन राहों को
तू छोड़ के ना जा, तू वापस आ जा

वो हुस्न के जलवे हों, या इश्क की आवाजें
आज़ाद परिंदों की रूकती नहीं परवाज़ें
आते हुए क़दमों से, जाते हुए क़दमों से
भरी रहेगी रहगुज़र, जो हम गए तो कुछ नहीं

ऐसा गज़ब नहीं ढाना,
पिया मत जाना बिदेसवा रे
हमका भी संग लिए जाना
पिया जब जाना बिदेसवा रे

जाते हुए राही के साये में सिमटना क्या
इक पल के मुसाफिर के दमन से लिपटना क्या
आते हुए क़दमों से, जाते हुए क़दमों से
भरी रहेगी रहगुज़र, जो हम गए तो कुछ नहीं

ये कदम किसी मुकाम पे जो जम गए तो कुछ नहीं
इक रास्ता है जिंदगी जो थम गए तो कुछ नहीं ।

Sunday, July 15, 2018

दिल कहे रुक जा रे रुक जा, यहीं पे कहीं

दिल कहे रुक जा रे रुक जा, यहीं पे कहीं
जो बात (२) इस जगह में, है कहीं पे नहीं

पर्बत ऊपर खिड़की खूले, झाँके सुन्दर भोर,
चले पवन सुहानी
नदियों के ये राग रसीले, झरनों का ये शोर
बहे झर झर पानी
मद भरा, मद भरा समा, बन धुला-धुला
हर कली सुख पली यहाँ, रस घुला-घुला
तो दिल कहे रुक जा हे रुक जा...

नीली नीली झील में झलके नील गगन का रूप
बहे रंग के धारे
ऊंचे-ऊंचे पेड़ घनेरे, छनती जिनसे धूप
खड़ी बाँह पसारे
चम्पई चम्पई फ़िजा, दिन खिला-खिला
डाली-डाली चिड़ियों कि सदा, सुर मिला-मिला
तो दिल कहे रुक जा रे रुक...

परियों के ये जमघट, जिनके फूलों जैसे गाल
सब शोख हथेली
इनमें है वो अल्हड़ जिसकी हिरणी जैसी चाल
बडी छैल-छबीली
मनचली-मनचली अदा, छब जवां जवां
हर घड़ी चढ़ रहा नशा, सुध रही कहाँ
तो दिल कहे रुक जा रे रुक जा...|

Sunday, July 8, 2018

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है
कि जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिए
तू अबसे पहले सितारों में बस रही थी कहीं
तुझे ज़मीं पे बुलाया गया है मेरे लिए ।

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कि ये बदन, ये निगाहें मेरी अमानत हैं
ये गेसुओं की घनी छाँव है मेरी खातिर
ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं ।

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कि जैसे बजती है शहनाइयाँ सी राहों में
सुहागरात है घूंघट उठा रहा हूँ मैं
सिमट रही है तू शरमा अपनी बाहों में ।

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कि जैसे तू मुझे चाहेगी उम्र भर यूँ ही
उठेगी मेरी तरफ प्यार की नज़र यूँ ही
मैं जानता हूँ कि तू गैर है मगर यूँ ही
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है।

Saturday, July 7, 2018

पोंछ कर अश्क अपनी आँखों से

पोंछ कर अश्क अपनी आँखों से मुस्कराओ तो कोई बात बने
सर झुकाने से कुछ नहीं होगा सर उठाओ तो कोई बात बने।

ज़िन्दगी भीख में नहीं मिलती ज़िन्दगी बढ़ के छीनी जाती है
अपना हक संगदिल ज़माने से छीन पाओ तो कोई बात बने।

रंग और नस्ल, जात और मज़हब जो भी हो आदमी से कमतर है
इस हकीकत को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने।

नफरतों के जहान में हमको प्यार की बस्तियां बसानी हैं
दूर रहना कोई कमाल नहीं पास आओ तो कोई बात बने।

Thursday, July 5, 2018

न तू जमीं के लिए है, न आसमां के लिए

न तू जमीं के लिए है, न आसमां के लिए
तेरा वजूद है अब सिर्फ दास्तां के लिए। 

पलट के सू-ए-चमन देखने से क्या होगा
वो शाख ही ना रही, जो थी आशियां के लिए।

गरज परस्त जहां में वफ़ा तलाश न कर
यह शै बनी थी, किसी दूसरे जहां के लिए।

Wednesday, July 4, 2018

अपनी खातिर जीना है

अपनी खातिर जीना है, अपनी खातिर मरना है
होने दो जो होता है, अपने को क्या करना है।

जिनको जग की चिंता है, वो जग का दुख झेलेंगे
हम सडकों पर नाचेंगे फुटपाथों पर खेलेंगे
उनको आहें भरने दो जिनको आहें भरना है।

प्यार की शिक्षा मांगी तो लोगों ने दुत्कार दिया
आखिर हमने दुनिया को बूट की नोक से मार दिया
यूँ ही उमर गुजरना थी, यूँ ही उमर गुजरना है।

अपने जैसे बेफिक्रे और नहीं इस बस्ती में
दुनिया गम में डूबी है हम दुबे हैं मस्ती में
जीना है तो जीना है, मरना है तो मरना है।


Tuesday, July 3, 2018

चाहे कोई खुश हो

चाहे कोई खुश हो चाहे गालियाँ हज़ार दे
मस्त राम बन के जिंदगी के दिन गुजार दे।

पी के धांधली करूं, तो मुझको जेल भेज दो
सूंघने में क्या है ये, जवाब थानेदार दे।

भाव अगर बड़ा भी डाले सेठ यार गम न कर
खाए जा मजे के साथ जब तक उधार दे।

बाँट कर जो खाए उस पे अपने जानो दिल लुटा
जो बचाए माल उसको जूतियों का हार दे।

Monday, July 2, 2018

संसार की हर शै का इतना ही फ़साना है

संसार की हर शै का इतना ही फ़साना है
इक धुंध से आना है, इक धुंध में जाना है।

ये राह कहाँ से है, ये राह कहाँ तक है
ये राज़ कोई राही, समझा है न जाना है।

इक पल की पलक पर है ठहरी हुयी ये दुनिया
इक पल के झपकने तक हर खेल सुहाना है।

क्या जाने कोई किस पर किस मोड़ पे क्या बीते
इस राह में ऐ राही हर मोड़ बहाना है।

हम लोग खिलौने हैं, इक ऐसे खिलाडी के
जिसको अभी सदियों तक ये खेल रचाना है।



Sunday, July 1, 2018

अश्कों ने जो पाया है

अश्कों ने जो पाया है वो गीतों में दिया है
इस पर भी सुना है के जमाने को गिला है। 

जो तार से निकली है वो धुन सबने सुनी है
जो साज़ पे गुज़री है वो किस दिल को पता है।

हम फूल हैं औरों के लिए लाये हैं खुशबू
अपने लिए ले दे के इक दाग मिला है।

जिंदगी हंसने गाने के लिए है पल दो पल

जिंदगी हंसने गाने के लिए है पल दो पल
इसे खोना नहीं, खो के रोना नहीं...

तेरे गिरने में भी तेरी हार नहीं
कि तू आदमी है, अवतार नहीं
जो देश वो भेष बना प्यारे
चले जैसे भी काम चला प्यारे
प्यारे तू गम न कर ..

जहाँ सच न चले वहाँ झूठ सही
जहाँ हक़ न मिले वहाँ लूट सही
यहाँ चोर हैं सब कोई साध नहीं
दुःख ढूँढ ले सुख अपराध नहीं
प्यारे तू गम न कर..

जिंदगी हंसने गाने के लिए है पल दो पल
इसे खोना नहीं, खो के रोना नहीं...

[Singer : Kishore Kumar;
 Music : Sapan Chakravarty; 
 Producer : B.R.Chopra;
Director: Ravi Chopra; 
Artist : Amitabh]

Saturday, June 30, 2018

जाने क्या तूने कही, जाने क्या मैंने सुनी

जाने क्या तूने कही
जाने क्या मैंने सुनी,
बात कुछ बन ही गयी ॥

तेरी उम्मीद पे जीने से हासिल कुछ नहीं लेकिन
अगर यूँ भी न दिल को आसरा देते तो क्या होता ॥

कौन कहता है कि चाहत पे सभी का हक़ है
तू जिसे चाहे तेरा प्यार उसी का हक़ है ॥

तुम अगर मुझ को न चाहो तो कोई बात नहीं
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी ॥

इश्क आज़ाद है, हिन्दू न मुसलमान है इश्क
आप ही धर्म, और आप ही ईमान है इश्क ॥

हम इंतजार करेंगे तेरा कयामत तक
खुदा करे कि क़यामत हो और तू आये ॥

मैंने जज्बात निभाए हैं उसूलों की जगह
अपने अरमान पिरो लाया हूँ फूलों की जगह ॥

Friday, June 29, 2018

आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम

आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम
आज कल इस तरफ देखता है कम ..
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम

आजकल किसी को वो टोकता नहीं
चाहे कुछ भी कीजिये रोकता नहीं
हो रही है लूटमार फट रहें हैं बम
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम

आज कल इस तरफ देखता है कम ..

किसको भेजे वो यहाँ खाक छानने
इस तमाम भीड़ का हाल जानने
आदमी हैं अनगिनत देवता हैं कम
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम

आज कल इस तरफ देखता है कम ..

जो भी है वो ठीक है फिर्क क्यों करे
हम ही सब जहान की फ़िक्र क्यों करें
जब उसे ही गम नहीं तो क्यों हमें हो गम
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम

आज कल इस तरफ देखता है कम ..

[Singer : Mukesh; 
Composer : Khayyam; 
Producer : Parijat Pictures; 
Director: Ramesh Saigal; 
Artist : Raj Kapoor, Rahman ]

चीन ओ अरब हमारा

चीन ओ अरब हमारा, हिन्दोस्तान हमारा
रहने को घर नहीं है, सारा जहां हमारा
चीन ओ अरब हमारा .…

खोली भी छिन गयी है, बेंचें भी छिन गईं हैं
सड़कों पे घूमता है, अब कारवाँ हमारा
जेबें हैं अपनी खाली, क्यों देता वरना गाली
वो संतरी हमारा, वो पासबां हमारा
चीन ओ अरब हमारा …

जितनी भी बिल्डिंगें थीं, सेठों ने बाँट ली हैं
फुटपाथ बंबई के हैं आशियाँ हमारा
होने को हम कलंदर, आते हैं बोरी बन्दर
हर एक कुली यहाँ है राजदा हमारा
चीन ओ अरब हमारा..

तालीम है अधूरी, मिलती नहीं मजूरी
मालूम क्या किसी को, दर्दे निहां हमारा
चीन ओ अरब हमारा…

पतला है हाल अपना, लेकिन लहू है गाडा
फौलाद से बना है, हर नौजवान हमारा
मिल-जुल के इस वतन को, ऐसा सजायेंगे हम
हैरत से मुंह तकेगा, सारा जहां हमारा
चीन ओ अरब हमारा...

[Singer : Mukesh; 
 Composer : Khayyam; 
 Producer : Parijat Pictures; 
 Director: Ramesh Saigal; 
Artist : Raj Kapoor ]
 

Thursday, June 28, 2018

मैं हर इक पल का शायर हूँ

मैं हर इक पल का शायर हूँ
हर इक पल मेरी कहानी है
हर इक पल मेरी हस्ती है
हर इक पल मेरी जवानी है।

रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़तम नहीं होती
ख्वाबों और उमंगों की मियादें ख़तम नहीं होती
इक फूल मैं तेरा रूप बसा, इक फूल में तेरी जवानी है
इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है।

तुझको मुझको जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है
इनकी धड़कन में बसना है, इनकी धड़कन में जीना है
तू अपनी अदाएं बख्श इन्हें, मैं अपनी वफायें देता हूँ
जो अपने लिए सोची थी कभी, वो सारी दुवायें देता हूँ।

मैं हर इक पल का शायर हूँ
हर इक पल मेरी कहानी है
हर इक पल मेरी हस्ती है
हर इक पल मेरी जवानी है।

Wednesday, May 23, 2018

चलो इक बार फिर से

चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों
न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिल नवाजी की
न तुम मेरी तरफत देखो गलत अंदाज़ नज़रों से
न मेरे दिल के धड़कन लडखडाये मेरी बातों में
न ज़ाहिर हो तुम्हारी कशमकश का राज़ नज़रों से
चलो इक बार फिर से..


तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से
मुझे भी लोग कहते हैं कि यह जलवे पराये हैं
मेरे हमराह भी रुस्वाइयां हैं मेरे माझी की
तुम्हारे साथ भी गुजरी हुई रातों के साए हैं
चलो इक बार फिर से ..

तारुफ़ रोग हो जाए तो उसको भूलना बेहतर
ताल्लुक बोझ बन जाए तो उसको तोड़ना अच्छा
वोह अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा
चलो इक बार फिर से ..।

Monday, May 21, 2018

दिल का हाल सुने दिलवाला

दिल का हाल सुने दिलवाला
सीधी सी बात न मिर्च मसाला
कहके रहेगा कहनेवाला
दिल का हाल सुने दिलवाला

छोटे से घर में गरीब का बेटा
मैं भी हूँ माँ के नसीब का बेटा
रन्ज-ओ-ग़म बचपन के साथी
आँधियों में जली जीवन बाती
भूख ने हैं बड़े प्यार से पाला
दिल का हाल...

हाय करूँ क्या सूरत ऐसी
गांठ के पूरे चोर के जैसी
चलता फिरता जान के एक दिन
बिन देखे-पहचान के एक दिन
बांध के ले गया पुलिसवाला
दिल का हाल...

बूढ़े दरोगा ने चश्मे से देखा
आगे से देखा, पीछे से देखा
ऊपर से देखा, नीचे से देखा
बोला ये क्या कर बैठे घोटाला
हाय ये क्या कर बैठे घोटाला
ये तो है थानेदार का साला
दिल का हाल...

ग़म से अभी आज़ाद नहीं मैं
ख़ुश हूँ मगर आबाद नहीं मैं
मंज़िल मेरे पास खड़ी है
पाँव में लेकिन बेड़ी पड़ी है
टांग अड़ाता है दौलतवाला
दिल का हाल...

सुन लो मगर ये किसी से न कहना
तिनके का ले के सहारा न बहना
बिन मौसम मल्हार न गाना
आधी रात को मत चिल्लाना लाना
वरना पकड़ लेगा पुलिसवाला
दिल का हाल...

Wednesday, May 16, 2018

ये मेरा दीवानापन है

दिल से तुझको बेदिली है,
मुझको है दिल का गुरूर
तू ये माने के न माने,
लोग मानेंगे ज़ुरूर

ये मेरा दीवानापन है,
या मुहब्बत का सुरूर तू न पहचाने तो है ये,
तेरी नज़रों का क़ुसूर ये मेरा दीवानापन है ... 

 दिल को तेरी ही तमन्ना,
दिल को है तुझसे ही प्यार चाहे तू आए न आए,
हम करेंगे इंतज़ार ये मेरा दीवानापन है ..

ऐसे वीराने में इक दिन, घुट के मर जाएंगे 
हम जितना जी चाहे पुकारो, फिर नहीं आएंगे हम
ये मेरा दीवानापन है ...

Wednesday, April 11, 2018

रेशमी सलवार कुरता जाली का

रेशमी सलवार कुरता जाली का
रूप सहा नहीं जाए नखरेवाली का

जा रे! पीछा छोड़ मुझ मतवाली का
काहे ढूंढे रास्ता कुतवाली का

जब जब तुझको देखूं, मेरे दिल में छुटे फुलझड़ियां
करूंगा तेरा पीछा, चाहे लग जाएं हथकड़ियां
क्या है कुतवाली का !

मैं हूं इज़्ज़त वाली, मुझे समझ ना ऐसी वैसी
बड़े बड़ों की मैंने, कर दी है ऐसी तैसी
तू है किस थाली का !

रूप तेरे का लटका, मेरे दिल को दे गया झटका
रंग भरे हाथों से ज़रा खोल दे पट घूंघट का
दिल है दिलवाली का
रूप सहा नहीं जाए नखरे वाली का

Monday, April 9, 2018

अपने अन्दर जरा झांक मेरे वतन

अपने अंदर जरा झांक मेरे वतन
अपने ऐबों को मत ढांक मेरे वतन

तेरा इतिहास है खूं में लिथड़ा हुआ,
तू अभी तक है दुनिया में पिछड़ा हुआ
तूने अपनों को अपना न माना कभी
तूने इन्सां को इन्सां न जाना कभी
तेरे धर्मों ने जातों की तकसीम की
तेरी रस्मों ने नफरत की तालीम दी
वहसतों का चलन तुझमें जारी रहा
नफरतों का जुंनू तुझपे तारी रहा

रंग और नस्ल के दायरों से निकल
गिर चुका है बहुत देर अब तो संभल
तू द्राविड़ है या आर्य नस्ल है
जो भी है अब इसी ख़ाक.की फ़स्ल है
तेरे दिल से जो नफरत न मिट पाएगी
तेरे घर में गुलामी पलट आएगी
तेरी बरबादियों का तुझे वास्ता
ढूंढ़ अपने लिए अब नया रास्ता |

[ Singer : Rafi;
Composer : N.Dutta; 
Producer : I.A.Nadiadwala; 
Director : Khalid Akhtar]

तू प्यार का सागर है ...

तू प्यार का सागर है
तेरी इक बूँद के प्यासे हम
लौटा जो दिया तुमने, चले जायेंगे जहाँ से हम
तू प्यार का सागर है ...

घायल मन का, पागल पंछी उड़ने को बेक़रार
पंख हैं कोमल, आँख है धुँधली, जाना है सागर पार
जाना है सागर पार
अब तू हि इसे समझा, राह भूले थे कहान से हम
तू प्यार का सागर है ...

इधर झूमती गाये ज़िंदगी, उधर है मौत खड़ी
कोई क्या जाने कहाँ है सीमा, उलझन आन पड़ी
उलझन आन पड़ी
कानों में ज़रा कह दे, कि आये कौन दिशा से हम
तू प्यार का सागर है ...



Wednesday, March 14, 2018

ये रात भीगी-भीगी

ये रात भीगी-भीगी ये मस्त फ़िज़ाएँ
उठा धीरे-धीरे वो चाँद प्यारा-प्यारा
क्यों आग सी लगा के गुमसुम है चाँदनी
सोने भी नहीं देता मौसम का ये इशारा

इठलाती हवा नीलम सा गगन
कलियों पे ये बेहोशी की नमी
ऐसे में भी क्यों बेचैन है दिल
जीवन में न जाने क्या है कमी
क्यों आग सी लगा के …
ये रात भीगी-भीगी …

जो दिन के उजाले में न मिला
दिल ढूँढे ऐसे सपने को
इस रात की जगमग में डूबी
मैं ढूँढ रही हूँ अपने को
ये रात भीगी-भीगी …
क्यों आग सी लगा के …

ऐसे में कहीं क्या कोई नहीं
भूले से जो हमको याद करे
इक हल्की सी मुस्कान से जो
सपनों का जहाँ आबाद करे
ये रात भीगी-भीगी …


Sunday, March 11, 2018

कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया

कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हरेक बात पे रोना आया ।

हम तो समझे थे के हम भूल गये हैं उनको
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया ।

किस लिये जीते हैं हम किसके लिये जीते हैं
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया ।

कौन रोता है किसी और के खातिर ऐ दोस्त
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया ।

[Music : Jaidev;
Singer : Md. Rafi; 
Production House : Navketan; 
Director : Amarjeet; 
Actor : Dev Anand]

Thursday, February 22, 2018

पान खाये सैंयाँ हमारो

पान खाये सैंयाँ हमारो
साँवली सूरतिया होंठ लाल-लाल
हाय-हाय मलमल का कुरता
मलमल के कुरते पे छींट लाल-लाल
पान खाये सैंयाँ हमारो

(हमने मँगाई सुरमेदानी
ले आया ज़ालिम बनारस का ज़रदा) – 2

अपनी ही दुनिया में खोया रहे वो
हमरे दिल की न पूछे बेदर्दा
पूछे बेदर्दा

पान खाये सैंयाँ हमारो
होय-होय
साँवली सूरतिया होंठ लाल-लाल
हाय-हाय मलमल का कुरता
मलमल के कुरते पे छींट लाल-लाल
पान खाये सैंयाँ हमारो

(बगिया गुन-गुन पायल छुन-छुन
चुपके से आई है रुत मतवाली) – 2
खिल गईं कलियाँ दुनिया जाने
लेकिन न जाने बगिया का माली
बगिया का माली

पान खाये सैंयाँ हमारो
होय-होय
साँवली सूरतिया होंठ लाल-लाल
हाय-हाय मलमल का कुरता
मलमल के कुरते पे छींट लाल-लाल
पान खाये सैंयाँ हमारो

(खा के गिलोरी शाम से ऊँघे
सो जाये वो दीया-बाती से पहले) – 2
आँगन-अटारी में घबराई डोलूँ
चोरी के डर से दिल मोरा दहले
दिल मोरा दहले

पान खाये सैंयाँ हमारो
साँवली सूरतिया होंठ लाल-लाल
हाय-हाय मलमल का कुरता
मलमल के कुरते पे छींट लाल-लाल
पान खाये सैंयाँ हमारो

Tuesday, February 13, 2018

मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया


मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया
हर फ़िक्र को धुएं में उडाता चला गया ।

बरबादियों का सोग मानना फ़िज़ूल था,
बरबादियों का जश्न मनाता चला गया ।

जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया
जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया ।

ग़म और ख़ुशी में फर्क न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मुकाम पे लाता चला गया ।

हर फ़िक्र को धुएं में उडाता चला गया ।

[Music : Jaidev;
Singer : Md. Rafi;
Production House : Navketan
Films; Director : Amarjeet;
Actor : Dev Anand]

Tuesday, February 6, 2018

दे भी चुके हम दिल नज़राना

दे भी चुके हम दिल नज़राना दिल का
छोड़ो भी ये राग पुराना दिल का

एक नज़र में हार चुके हैं दिल को
तेरी अदा पे वार चुके हैं दिल को
मुश्किल है अब लौट के आना दिल का
छोड़ो भी ये राग पुराना दिल का

मुंह धो ले ओ जाल बिछाने वाले!
हम नहीं इन बातों में आने वाले
खेल है ये जाना पहचाना दिल का
दे भी चुके हम दिल नज़राना दिल का

छीन के दिल आशिक़ का मुकरने वाले
मर जाएंगे तुझ पर मरने वाले
छोड़ भी दे ज़ालिम तड़पाना दिल का
छोड़ो भी ये राग पुराना दिल का
डाली-डाली फिरते हैं हरजाई
लोभी भंवरों ने कब प्रीत निभाई
यूँ ही सब करते हैं बहाना दिल का
दे भी चुके हम दिल नज़राना दिल का
यूं ही सब करते हैं बहाना दिल का
खेल है ये जाना-पहचाना दिल का
छोड़ो भी ये राग पुराना दिल का

Saturday, February 3, 2018

गापुची-गापुची गम-गम

गापुची-गापुची गम-गम
किशिकी-किशिकी कम-कम
ओ सनम! हम दोनों साथ रहे जनम-जनम

फूलों जैसा चेहरा, डाली जैसा तन है
तेरी ही अमानत, हर धड़कन है
आ भी जा! बाहों में, प्यार का हो संगम

जादू भरी आंखें, ख्वाबों के खजाने
महकी-महकी साँसे, बातें हैं तराने
आ भी जा! बाहों में, प्यार का हो संगम

जागे-जागे अरमान, भीगा-भीगा मौसम
दिलों की ये हलचल, बूंदों की ये छम-छम
आ भी जा! बाहों में, प्यार का हो संगम

Friday, January 19, 2018

ओ सजना, बरखा बहार आई

(ओ सजना, बरखा बहार आई
रस की फुहार लाई, अँखियों मे प्यार लाई) – 2
ओ सजना

तुमको पुकारे मेरे मन का पपिहरा – 2
मीठी मीठी अगनी में, जले मोरा जियरा
ओ सजना …

(ऐसी रिमझिम में ओ साजन, प्यासे प्यासे मेरे नयन
तेरे ही, ख्वाब में, खो गए) – 2
सांवली सलोनी घटा, जब जब छाई – 2
अँखियों में रैना गई, निन्दिया न आई
ओ सजना …

फ़िल्म: परख / Parakh (1960)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: सलिल चौधरी
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: मोतीलाल, साधना, वसंत चौधरी

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...