Thursday, July 26, 2018

इक रास्ता है जिंदगी जो थम गए तो कुछ नहीं

इक रास्ता है जिंदगी जो थम गए तो कुछ नहीं
ये कदम किसी मुकाम पे जो जम गए तो कुछ नहीं

ओ जाते राही ! ओ बाँके राही!
मेरी बाँहों को, इन राहों को
तू छोड़ के ना जा, तू वापस आ जा

वो हुस्न के जलवे हों, या इश्क की आवाजें
आज़ाद परिंदों की रूकती नहीं परवाज़ें
आते हुए क़दमों से, जाते हुए क़दमों से
भरी रहेगी रहगुज़र, जो हम गए तो कुछ नहीं

ऐसा गज़ब नहीं ढाना,
पिया मत जाना बिदेसवा रे
हमका भी संग लिए जाना
पिया जब जाना बिदेसवा रे

जाते हुए राही के साये में सिमटना क्या
इक पल के मुसाफिर के दमन से लिपटना क्या
आते हुए क़दमों से, जाते हुए क़दमों से
भरी रहेगी रहगुज़र, जो हम गए तो कुछ नहीं

ये कदम किसी मुकाम पे जो जम गए तो कुछ नहीं
इक रास्ता है जिंदगी जो थम गए तो कुछ नहीं ।

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...