Friday, September 21, 2018

मन रे तू काहे न धीर धरे

मन रे तू काहे ना धीर धरे
ओ निर्मोही मोह ना जाने, जिनका मोह करे
मन रे तू काहे ना धीर धरे |

इस जीवन की चढ़ती ढलती
धूप को किसने बांधा
रंग पे किसने पहरे डाले
रुप को किसने बांधा
काहे ये जतन करे |

उतना ही उपकार समझ कोई
जितना साथ निभा दे
जनम मरन का मेल है सपना
ये सपना बिसरा दे
कोई न संग मरे |

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...