Wednesday, August 22, 2018

चलत मुसाफ़िर मोह लियो रे

चलत मुसाफ़िर मोह लियो रे पिंजड़े वाली मुनिया – 4

उड़ उड़ बैठी हलवइया दुकनिया – 2
हे रामा!
उड़ उड़ बैठी हलवइया दुकनिया
आरे!
(बरफ़ी के सब रस ले लियो रे
पिंजड़े वाली मुनिया) – 2

अ हे अ हे… हे रामा

उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया – 2
आहा!
उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया
आरे!
(कपड़ा के सब रस ले लियो रे
पिंजड़े वाली मुनिया) – 3

जियो जियो पलकदस जियो!!

उड़ उड़ बैठी पनवड़िया दुकनिया – 2
हे रामा!
उड़ उड़ बैठी पनवड़िया दुकनिया
आरे!
(बीड़ा के सब रस ले लियो रे
पिंजड़े वाली मुनिया) – 3

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...