Saturday, June 30, 2018

जाने क्या तूने कही, जाने क्या मैंने सुनी

जाने क्या तूने कही
जाने क्या मैंने सुनी,
बात कुछ बन ही गयी ॥

तेरी उम्मीद पे जीने से हासिल कुछ नहीं लेकिन
अगर यूँ भी न दिल को आसरा देते तो क्या होता ॥

कौन कहता है कि चाहत पे सभी का हक़ है
तू जिसे चाहे तेरा प्यार उसी का हक़ है ॥

तुम अगर मुझ को न चाहो तो कोई बात नहीं
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी ॥

इश्क आज़ाद है, हिन्दू न मुसलमान है इश्क
आप ही धर्म, और आप ही ईमान है इश्क ॥

हम इंतजार करेंगे तेरा कयामत तक
खुदा करे कि क़यामत हो और तू आये ॥

मैंने जज्बात निभाए हैं उसूलों की जगह
अपने अरमान पिरो लाया हूँ फूलों की जगह ॥

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...