Thursday, July 5, 2018

न तू जमीं के लिए है, न आसमां के लिए

न तू जमीं के लिए है, न आसमां के लिए
तेरा वजूद है अब सिर्फ दास्तां के लिए। 

पलट के सू-ए-चमन देखने से क्या होगा
वो शाख ही ना रही, जो थी आशियां के लिए।

गरज परस्त जहां में वफ़ा तलाश न कर
यह शै बनी थी, किसी दूसरे जहां के लिए।

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...