Wednesday, December 7, 2016

क्या से क्या हो गया

क्या से क्या हो गया
बेवफ़ा, तेरे प्यार में
चाहा क्या, क्या मिला
बेवफ़ा, तेरे प्यार में

चलो सुहाना भरम तो टूटा
जाना के हुस्न क्या है
कहती है जिसको प्यार दुनिया
क्या चीज़, क्या बला है
दिल ने क्या ना सहा
बेवफ़ा, तेरे प्यार में...

तेरे मेरे दिल के बीच अब तो
सदियों के फ़ासले हैं
यक़ीन होगा किसे कि हम-तुम
इक राह संग चले हैं
होना है और क्या
बेवफ़ा, तेरे प्यार में...


Movie/Album: गाईड (1965)
Music By: एस.डी.बर्मन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मो.रफ़ी

Monday, December 5, 2016

मेरी नज़र है तुझ पे

मेरी नज़र है तुझ पे, तेरी नज़र है मुझ पे
इसीलिए रहते हैं दोनों खोए हुए
तेरे बिना जियरा माने ना
लगी अगन है ये कैसी हाय! जाने ना !

तेरे लिए कलियां मैं चुनती रहूं
आशाओं की मालाएं बुनती रहूं
जागे में भी सपनों में खोई रहूं
सोते में भी आहट सी सुनती रहूं
ओ साजना! बालमा! मुझे क्या हो गया, जानू ना!

मेरे बिना अब तू भी रह न सके
तेरे बिना अब मैं भी रह न सकूं
हाय! मगर तू भी ये कह न सके
हाय! मगर मैं भी ये कह न सकूं
जानेमन! दफ़अतन दिल को ये क्या हुआ, जानूं ना !

Tuesday, November 29, 2016

पैसे की कहानी

कहते हैं इसे पैसा बच्चों, ये चीज़ बड़ी मामूली है
लेकिन इस पैसे के पीछे सब दुनिया रस्ता भूली है
इंसां की बनाई चीज़ है ये, लेकिन इंसान पे भारी हैं
हल्की-सी झलक इस पैसे की धर्म और ईमान पे भारी है
ये झूठ को सच कर देता है और सच को झूठ बनाता है
भगवान नहीं, पर हर घर में भगवान की पदवी पाता है

इस पैसे के बदले दुनिया में इंसानों की मेहनत बिकती है
जिस्मों की हरारत बिकती है, रूहों की शराफ़त बिकती है
सरदार खरीदे जाते हैं, दिलदार खरीदे जाते हैं
मिट्टी के सही पर इससे ही अवतार खरीदे जाते हैं

इस पैसे की खातिर दुनिया में आबाद वतन बंट जाते हैं
धरती टुकड़े हो जाती हैं, लाशों के कफ़न बंट जाते हैं
इज़्ज़त भी इससे मिलती है, ताज़ीम भी इससे मिलती है
तहज़ीब भी इससे आती है, तालीम भी इससे मिलती है

हम आज तुम्हें इस पैसे का सारा इतिहास बताते हैं
कितने जुग अब तक गुज़रे हैं, उन सबकी झलक दिखलाते हैं
इक ऐसा वक़्त भी था जग में, जब इस पैसे का नाम न था
चीज़ें चीज़ों से तुलती थीं, चीजों का कुछ भी दाम न था
इंसान फकत इंसान था तब, इंसान का मजहब कुछ भी न था
दौलत, गुरबत, इज्ज़त, ज़िल्लत, इन लफ्जों का मतलब कुछ भी न था

चीज़ों से चीज़ बदलने का ये ढंग बहुत बेकार-सा था
लाना भी कठिन था चीज़ों का, ले जाना भी दुश्वार-सा था
इंसान ने तब मिलकर सोचा – क्यूं वक़्त इतना बरबाद करें
हर चीज़ की जो कीमत ठहरे, वो चीज़ न क्यूं ईज़ाद करें
इस तरह हमारी दुनिया में पहला पैसा तैयार हुआ
और इस पैसे की हसरत में इंसान ज़लील-ओ-ख़्वार हुआ

पैसे वाले इस दुनिया में जागीरों के मालिक बन बैठे
मज़दूरों और किसानों की तक़दीरों के मालिक बन बैठे
जागीरों पे कब्जा रखने को कानून बने, हथियार बने
हथियारों के बल पर धनवाले इस धरती के सरदार बने
जंगों में लड़ाया भूखों को और अपने सर पर ताज रखा
निर्धन को दिया परलोक का सुख, अपने लिये जग का राज रखा
पंडित और मुल्ला इनके लिए मज़हब के सहीफ़े लाते रहे
शायर तारीफ़ें लिखते रहे, गायक दरबारी गाते रहे

वैसा ही करेंगे हम
जैसा तुझे चाहिए
पैसा हमें चाहिए !

हल तेरे जोतेंगे, खेत तेरे बोएंगे
ढोर तेरे हाकेंगे, बोझ तेरा ढोएंगे
पैसा हमें चाहिए !

पैसा हमें दे दे राजा गुन तेरे गायेंगे
तेरे बच्चे बच्चियों का खैर मनायेंगे
पैसा हमें चाहिए !

लोगों की अनथक मेहनत ने चमकाया रूप ज़मीनों का
भाप और बिजली हमराह लिए, आ पहुंचा दौर मशीनों का
इल्म और बिज्ञान की ताक़त ने मुंह मोड़ दिया दरियाओं का
इंसान जो खाक का पुतला था, वो हाकिम बना हवाओं का
जनता की मेहनत के आगे कुदरत ने खजाने खोल दिये
राजों की तरह रखा था जिन्हें, वो सारे जमाने खोल दिये
लेकिन इन सब ईजादों पर पैसे का इज़ारा होता रहा
दौलत का नसीबा चमक उठा, मेहनत का मुकद्दर सोता रहा

वैसा ही करेंगे हम
जैसा तुझे चाहिए
पैसा हमें चाहिए !

रेलें भी लगाएंगे, मिलें भी चलाएंगे
जंगों में भी जाएंगे, जाने भी गवाएंगे
पैसा हमें चाहिए !

पैसा हमें दे दे बाबू गुण तेरे गायेंगे
तेरे बच्चे बच्चियों का खैर मनायेंगे
पैसा हमें चाहिये!

जुग-जुग से यूं ही इस दुनिया में हम दान के टुकड़े मांगते हैं
हल जोत के, फ़सलें काट के भी पकवान के टुकड़े मांगते हैं
लेकिन इन भीख के टुकड़ों से कब भूख का संकट दूर हुआ
इंसान सदा दुख झेलेगा गर खत्म न ये दस्तूर हुआ
जंजीर बनी है कदमों की, वो चीज़ जो पहले गहना थी
भारत के सपूतों! आज तुम्हें बस इतनी बात ही कहना थी
जिस वक़्त बड़े हो जाओ तुम, पैसे का राज मिटा देना
अपना और अपने जैसों का जुग-जुग का कर्ज़ चुका देना
जुग-जुग का कर्ज़ चुका देना !

Friday, November 11, 2016

दिन ढल जाये हाय

दिन ढल जाये हाय, रात ना जाए
तू तो न आए तेरी, याद सताये
दिन ढल जाये हाय

प्यार में जिनके, सब जग छोड़ा और हुए बदनाम
उनके ही हाथों, हाल हुआ ये, बैठे हैं दिल को थाम
अपने कभी थे, अब हैं पराये
दिन ढल जाये...

ऐसी ही रिमझिम, ऐसी फ़ुहारें, ऐसी ही थी बरसात
खुद से जुदा और जग से पराये, हम दोनों थे साथ
फिर से वो सावन, अब क्यूँ न आये
दिन ढल जाये...

दिल के मेरे, पास हो इतने, फिर भी हो कितनी दूर
तुम मुझसे, मैं दिल से परेशाँ, दोनों हैं मजबूर
ऐसे में किसको, कौन मनाये
दिन ढल जाये...

Movie/Album: गाईड (1965)
Music By: एस.डी.बर्मन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मो.रफ़ी


Saturday, October 29, 2016

अजीब दास्ताँ है ये

अजीब दास्ताँ है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें है कौन सी
न वो समझ सके न हम

ये रौशनी के साथ क्यूँ
धुंआ उठा चिराग से
ये ख्वाब देखती हूँ मैं
के जग पड़ी हूँ ख्वाब से
अजीब..

मुबारके तुम्हें के तुम
किसी के नूर हो गए
किसी के इतने पास हो
के सबसे दूर हो गए
अजीब..

किसी का प्यार ले के तुम
नया जहां बसाओगे
ये शाम जब भी आएगी
तुम हमको याद आओगे
अजीब..

Movie/Album : दिल अपना और प्रीत पराई (1960)
Music By : शंकर-जयकिशन
Lyrics By : शैलेन्द्र
Performed By : लता मंगेशकर


Friday, October 7, 2016

कश्ती का खामोश सफ़र है

कश्ती का खामोश सफ़र है, शाम भी है तनहाई भी
दूर किनारे पर बजती है लहरों की शहनाई भी
आज मुझे कुछ कहना है

लेकिन ये शर्मीली निगाहें मुझको इजाज़त दें तो कहूँ
खुद मेरी बेताब उमंगें थोड़ी फ़ुर्सत दें तो कहूँ
आज मुझे कुछ कहना है

जो कुछ तुमको कहना है, वो मेरे ही दिल की बात न हो
जो है मेरे ख़्वाबों की मंज़िल, उस मंज़िल की बात न हो

कहते हुए डर सा लगता है, कह कर बात न खो बैठूँ
ये जो ज़रा सा साथ मिला है, ये भी साथ न खो बैठूँ

कब से तुम्हारे रस्ते में मैं फूल बिछाये बैठी हूँ
कह भी चुको जो कहना है मैं आस लगाये बैठी हूँ

दिल ने दिल की बात समझ ली, अब मुँह से क्या कहना है
आज नहीं तो कल कह लेंगे, अब तो साथ ही रहना है

कह भी चुको जो कहना है
छोड़ो अब क्या कहना है

Friday, September 16, 2016

तू ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर

तू ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर,
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!

सुबह औ' शाम के रंगे हुए गगन को चूमकर,
तू सुन ज़मीन गा रही है कब से झूम-झूमकर,
तू आ मेरा सिंगार कर, तू आ मुझे हसीन कर!
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है

ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार दिन,
ये दिन भी जाएंगे गुज़र, गुज़र गए हज़ार दिन,
कभी तो होगी इस चमन पर भी बहार की नज़र!
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है

हमारे कारवां का मंज़िलों को इन्तज़ार है,
यह आंधियों, ये बिजलियों की, पीठ पर सवार है,
जिधर पड़ेंगे ये क़दम बनेगी एक नई डगर
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है

हज़ार भेष धर के आई मौत तेरे द्वार पर
मगर तुझे न छल सकी चली गई वो हार कर
नई सुबह के संग सदा तुझे मिली नई उमर
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है

ज़मीं के पेट में पली अगन, पले हैं ज़लज़ले,
टिके न टिक सकेंगे भूख रोग के स्वराज ये,
मुसीबतों के सर कुचल, बढ़ेंगे एक साथ हम,
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है

बुरी है आग पेट की, बुरे हैं दिल के दाग़ ये,
न दब सकेंगे, एक दिन बनेंगे इन्क़लाब ये,
गिरेंगे जुल्म के महल, बनेंगे फिर नवीन घर!
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है


ना धेला लगता है, ना पैसा लगता है

ना धेला लगता है, ना पैसा लगता है
चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है

बिना कलों के जुड़ने वाला,बिना परों के उड़ने वाला
सारों झूलों से आला ये झूला, जो भी झूला वो सब दुख भूला
ना जैसा कुछ भी हो, ये वैसा लगता है
चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है

जो कोई छूना चाहे तारों को, मस्का लगाए जरा यारों को
बातें बनाए थोड़ा मुस्का के, झूले की डोरी थामे शरमा के
जैसे दो बाहें हो, ये वैसा लगता है
चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है

बांके हसीनों पे ये मरता है, प्यारों से प्यार सदा करता है
ऐसे न पीछे हटो डर-डर के, आओ झुला दें तुम्हें जी भर के
जो तुम पर आशिक हो, ये वैसा लगता है
चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है

Sunday, September 4, 2016

झूमती चली हवा

झूमती चली हवा, याद आ गया कोई
बुझती बुझती आग को, फिर जला गया कोई
झूमती चली हवा ...

खो गई हैं मंज़िलें, मिट गये हैं रास्ते
गर्दिशें ही गर्दिशें, अब हैं मेरे वास्ते
अब हैं मेरे वास्ते
और ऐसे में मुझे, फिर बुला गया कोई
झूमती चली हवा ...

चुप हैं चाँद चाँदनी, चुप ये आसमान है
मीठी मीठी नींद में, सो रहा जहान है
सो रहा जहान है
आज आधी रात को, क्यों जगा गया कोई
झूमती चली हवा ...

एक हूक सी उठी, मैं सिहर के रह गया
दिल को अपना थाम के आह भर के रह गया
चाँदनी की ओट से मुस्कुरा गया कोई
झूमती चली हवा ...


चित्रपट / Film: Sangeet Samrat Tansen
संगीतकार / Music Director: S N Tripathi
गीतकार / Lyricist: शैलेन्द्र-(Shailendra)
गायक / Singer(s): मुकेश-(Mukesh)

Thursday, August 25, 2016

इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके

इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके
जिसने ये पहनाई है उस दिलदार के सदके
उस ज़ुल्फ़ के क़ुरबां लब-ओ-रुखसार के सदके
हर जलवा था इक शोला हुस्न-ए-यार के सदके

जवानी माँगती ये हसीं झंकार बरसों से
तमन्ना बुन रही थी धड़कनों के हार बरसों से
छुप-छुप के आने वाले तेरे प्यार के सदके

जवानी सो रही थी हुस्न की रंगीं पनाहों में
चुरा लाये हम उनके नाज़नीं जलवे निगाहों में
किस्मत से जो हुआ है उस दीदार के सदके

नज़र लहरा रही है, जिस्म पे मस्ती सी छाई है
दुबारा देखने की शौक़ ने हलचल मचाई है
दिल को जो लग गया है उस आज़ार के सदके

Wednesday, August 17, 2016

आज रोना पड़ा

आज रोना पड़ा तो समझे
हँसने का मोल क्या है
अपना सपना खोना पड़ा तो समझे

ख़्वाबों की हक़ीक़त क्या थी
अरमानों की क़ीमत क्या थी
अपनों की मुहब्बत क्या थी
ग़ैर होना पड़ा तो समझे

सुख मिलता है किस मुश्किल से
क्या करती है दुनिया दिल से
इस रंग भरी महफ़िल से
दूर होना पड़ा तो समझे

निकले थे जिन्हें अपनाने
वो लोग थे सब बेगाने
इस बात को हम दीवाने
चैन खोना पड़ा तो समझे

Saturday, July 9, 2016

निगाहों में चमक जाग उठी

कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी
दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी

किसके आने की ख़बर ले के हवाएं आईं
जिस्म से फूल चटकने की सदाएं आईं
रूह खिलने लगी, सांसों में महक जाग उठी

किसने ये मेरी नज़र देख के बांहें खोलीं
शोख़ जज़्बात ने सीने में निगाहें खोलीं
होंठ तपने लगे, ज़ुल्फ़ों में लचक जाग उठी

किसके हाथों ने मेरे हाथों से कुछ मांगा है
किसके ख़्वाबों ने मेरी रातों से कुछ मांगा है
साज़ बजने लगे, आंचल में धनक जाग उठी

Tuesday, July 5, 2016

आज की रात पिया दिल न तोड़ो

आज की रात पिया दिल न तोड़ो
मन की बात पिया मान लो |

दिल की कहानी अपनी ज़ुबानी तुमको सुनाने आयी हूँ
आँखों में ले के सपने सुहाने, अपना बनाने आयी हूँ
छोड़ के साथ पिया मुँह न मोड़ो
मन की बात पिया मान लो |

चन्दा भी देखे तारे भी देखे हमको गगन की ओट से
घायल किया है दिल तुमने मेरा मीठी नज़र की चोट से
थाम के हाथ पिया यूँ न छोड़ो
मन की बात पिया मान लो।

Saturday, June 11, 2016

फूलों के डेरे हैं

फूलों के डेरे हैं, साये घनेरे हैं
झूम रही हैं हवायेँ
ऐसे नज़ारों में, खिलती बहारों में
प्यार मिले तो रुक जायेँ |

कहीं भी आसमान के नीचे
गाती निगाहों का
लहराती बाहों का
हार मिले तो रुक जायें |

चले हैं दूर हम दीवाने
कोई रसीला सा
बांका सजीला सा
यार मिले तो रुक जाएं |

Wednesday, June 1, 2016

मैंने एक ख़्वाब सा देखा है

मैंने एक ख़्वाब सा देखा है
सुन के शरमा तो न जाओगी?

मैंने देखा है कि फूलों से लदी शाखों में
तुम लचकती हुई यूं मेरी क़रीब आई हो
जैसे मुद्दत से यूं ही साथ रहा हो अपना
जैसे अब की नहीं सदियों की शनासाई हो

मैंने भी ख़्वाब सा देखा है
खुद से इतरा तो न जाओगे?

मैंने देखा कि गाते हुए झरनों के क़रीब
अपनी बेताबी-ए-जज़्बात कही है तुमने
कांपते होंठों से, रुकती हुई आवाज़ के साथ
जो मेरे दिल में थी, वो बात कही है तुमने

आंच देने लगा क़दमों के तले बर्फ़ का फ़र्श
आज जाना कि मुहब्बत में है गर्मी कितनी
संगमरमर की तरह सख़्त बदन में तेरे
आ गयी है मेरे छू लेने से नर्मी कितनी

हम चले जाते हैं और दूर तलक कोई नहीं
सिर्फ़ पत्तों के चटखने की सदा आती है
दिल में कुछ ऐसे ख़यालात ने करवट ली है
मुझको तुमसे नहीं अपने से हया आती है

मैंने देखा है कि कोहरे से भरी वादी में
मैं ये कहता हूं चलो आज कहीं खो जाएं
मैं ये कहती हूं कि खोने की ज़रूरत क्या है
ओढ़कर धुंध की चादर को यहीं सो जाएं


Friday, May 27, 2016

दिल का दर्द ना जाने दुनिया

दिल का दर्द ना जाने दुनिया, जाने दिल तड़पना
प्यार के दो बोलों के बदले दुश्मन हुआ ज़माना
हाय रे हाय! दुश्मन हुआ ज़माना

उम्मीद ने ठोकर खायी है
दिल दे के जुदाई पायी है
तेरा ग़म है, मेरी तन्हाई है
पहले से न था ये जाना
कि दिल का आना है जी से जाना
हाय रे हाय! दुश्मन हुआ ज़माना

आंखों मे जो आंसू आयेँगे
तस्वीर तेरी दिखलायेँगे
हम थाम के दिल रह जायेँगे
पहले से न था ये जाना
कि दिल का आना है जी से जाना

हाय रे हाय! दुश्मन हुआ ज़माना

Thursday, May 19, 2016

उलझन सुलझे ना

उलझन सुलझे ना, रस्ता सूझे ना
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां

मेरे दिल का अंधेरा, हुआ और घनेरा
कुछ समझ न पाऊं क्या होना है मेरा
खड़ी दोराहे पर, ये पूछूं घबराकर
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां

जो सांस भी आये, तन चीर के जाए
इस हाल से कोई किस तरह निभाए
न मरना रास आया, न जीना मन भाया
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां

रुत गम की टले ना, कोई आस फले ना
तक़दीर के आगे मेरी पेश चले ना
बहुत की तदबीरें, ना टूटी जंजीरें
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां

Saturday, April 30, 2016

नीले पर्बतों की धारा

नीले पर्बतों की धारा,
आयी ढूँढने किनारा बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

फूल में जैसे फूल की खुशबू
दिल में है यूँ तेरा बसेरा
धरती से अम्बर तक फैला
चाहत की बाहों का घेरा

सूरज पीछे घूमे धरती
साँझ के पीछे घूमे सवेरा
जिस नाते ने इनको बाँधे
वो नाता है तेरा मेरा

Thursday, April 21, 2016

ज़िन्दगी के रंग कई रे

ज़िन्दगी के रंग कई रे, साथी रे !
ज़िन्दगी के रंग कई रे!

ज़िन्दगी दिलों को कभी जोड़ती भी है
ज़िन्दगी दिलों को कभी तोड़ती भी है
ज़िन्दगी के रंग कई रे, साथी रे !

ज़िन्दगी की राह में ख़ुशी के फूल भी
ज़िन्दगी की राह में ग़मों की धूल भी
ज़िन्दगी के रंग कई रे, साथी रे !

ज़िन्दगी कभी यक़ीं कभी ग़ुमान है
हर क़दम पे तेरा-मेरा इम्तहान है
ज़िन्दगी के रंग कई रे साथी रे !

Wednesday, March 23, 2016

इतनी जल्दी ना करो रात

इतनी जल्दी ना करो रात का दिल टूटेगा
आप जायेंगे तो जज्बात का दिल टूटेगा

सारी रात न जागे तो जवानी क्या
सुबह तक न चले तो कहानी क्या
जुल्फ जो हमने बनाई थी, वो बिखरी भी नहीं
रंग पे आ के ये महफिल अभी निखरी भी नहीं
शम्मा का, साज का, नगमात का दिल टूटेगा
इतनी जल्दी ना करो रात का दिल टूटेगा |

गर्म सांसों से जरा जिस्म पिघलने दीजिए
चाहने वालों के अरमान निकलने दीजिए
कम से कम प्यार का इल्जाम तो लेते जाएं
आज की रात का इनाम तो लेते जाएं
चल दिए आप तो हर बात का दिल टूटेगा
इतनी जल्दी ना करो रात का दिल टूटेगा

Tuesday, March 1, 2016

प्यार हुआ इक़रार हुआ है

प्यार हुआ इक़रार हुआ है
प्यार से फिर क्यों डरता है दिल
कहता है दिल, रस्ता मुश्किल
मालूम नहीं है कहाँ मंज़िल
प्यार हुआ इक़रार हुआ...

कहो की अपनी प्रीत का मीत ना बदलेगा कभी
तुम भी कहो इस राह का मीत न बदलेगा कभी
प्यार जो टूटा, साथ जो छूटा
चाँद न चमकेगा कभी
प्यार हुआ इकरार हुआ...

रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ
प्रीत हमारे प्यार के दोहराएंगी जवानियाँ
मैं न रहूँगी, तुम न रहोगे
फिर भी रहेंगी निशानियाँ
प्यार हुआ इक़रार हुआ...

Movie/Album: श्री ४२० (1955)
Music By: शंकर जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: लता मंगेशकर, मन्ना डे


Saturday, February 27, 2016

रात के हमसफ़र थक के घर को चले

रात के हमसफ़र, थक के घर को चले
झूमती आ रही है सुबह प्यार की
देख कर सामने, रूप की रोशनी
फिर लुटी जा रही है सुबह प्यार की

सोने वालों को हँसकर जगाना भी है
रात के जागतों को सुलाना भी है
दिल की है जागने की सदा साथ ही
लोरियां गा रही है सुबह प्यार की
रात के हमसफ़र...

रात ने प्यार के जाम भर कर दिए
आँखों आँखों से जो मैंने तुमने पिए
होश तो अब तलक जाके लौटे नहीं
और क्या ला रही है सुबह प्यार की
रात के हमसफ़र...

क्या क्या वादे हुए किसने खाई कसम
इस नयी राह पर हमने रखे कदम
छुप सका प्यार कब हम छुपाएँ तो क्या
सब समझ पा रही है सुबह प्यार की
रात के हमसफ़र...

Movie/Album: ऐन इवनिंग इन पेरिस (1967)
Music By: शंकर जयकिशन
Lyrics By: हसरत जयपुरी
Performed By: मो.रफ़ी, आशा भोंसले

Thursday, February 18, 2016

तेरी जवानी तपता महीना

तेरी जवानी तपता महीना, ए नाजनीना !
छू ले नज़र तो आए पसीना, ए नाजनीना !

हाय! ये तेरा लहराके चलना, इठलाके चलना
रह-रह के धड़के धरती का सीना, ए नाजनीना !

तेरे बदन में फूलों की नरमी, शोलों की गरमी
हर अंग तेरा तरशा नगीना, ए नाजनीना !

आंखों में बिजली, ज़ुल्फों में बादल, सांसों में हलचल
तुझ-सी नहीं कोई कातिल हसीना, ए नाजनीना !

जीने का कोई सामान कर दे, एहसान कर दे
तेरे बगैर अब मुश्किल है जीना, ए नाजनीना !


Monday, February 1, 2016

सजन रे झूठ मत बोलो

सजन रे झूठ मत बोलो
खुदा के पास जाना है
न हाथी है न घोड़ा है
वहाँ पैदल ही जाना है

तुम्हारे महल चौबारे
यहीं रह जायेंगे सारे
अकड़ किस बात की प्यारे
ये सर फिर भी झुकाना है
सजन रे झूठ...

भला कीजे भला होगा
बुरा कीजे बुरा होगा
बही लिख-लिख के क्या होगा
यहीं सब कुछ चुकाना है
सजन रे झूठ...

लड़कपन खेल में खोया
जवानी नींद भर सोया
बुढ़ापा देखकर रोया
वही किस्सा पुराना है
सजन रे झूठ...

Movie/Album: तीसरी कसम (1966)
Music By: शंकर-जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मुकेश

Saturday, January 30, 2016

खोया खोया चाँद

खोया खोया चाँद, खुला आसमान
आँखों में सारी रात जायेगी
तुम को भी कैसे नींद आयेगी

मस्ती भरी, हवा जो चली
खिल खिल गयी ये दिल की कली
दिल की गली में है खलबली
कि उनको तो बुलाओ
ख़ोया खोया चाँद...

तारे चले, नज़ारे चले
संग संग मेरे वो सारे चले
चारों तरफ इशारे चले
किसी की तो हो जाओ
खोया खोया चाँद...

ऐसी ही रात, भीगी सी रात
हाथो में हाथ, होते वो साथ
कह लेते उनसे दिल की ये बात
अब तो ना सताओ
खोया खोया चाँद...

हम मिट चले हैं जिनके लिए
बिन कुछ कहे वो चुप चुप रहे
कोई ज़रा ये उनसे कहे
ना ऐसे आजमाओ
खोया खोया चाँद..

Movie/Album: काला बाज़ार (1960)
Music By: एस.डी.बर्मन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मो.रफ़ी


Friday, January 29, 2016

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं
यूं जा रहे हैं जैसे हमें जानते नहीं

अपनी गरज थी जब तो लिपटना कबूल था
बाहों के दायरे में सिमटना कबूल था
अब हम मना रहे हैं, मगर मानते नहीं

हमने तुम्हें पसंद किया, क्या बुरा किया
रुतबा ही कुछ बुलंद किया, क्या बुरा किया
हर इक गली की खाक तो हम छानते नहीं

मुंह फेर कर न जाओ हमारे करीब से
मिलता है कोई चाहने वाला नसीब से

इस तरह आशिकों पे कमान तानते नहीं।


इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...