This is a humble collection of songs of Sahir Ludhianvi & Shailendra Singh, the greatest lyricists, Bollywood has ever seen. Sahir used his songs for spreading message of love for humankind through philosophical notes or social commentary. He also used some of his ghazals & nazms in his movies also by simplifying them. Shankardas Kesarilal popularly known by his pen name Shailendra, was a popular Indian Hindi lyricist, playback singer and musician.
मेरी नज़र है तुझ पे, तेरी नज़र है मुझ पे इसीलिए रहते हैं दोनों खोए हुए तेरे बिना जियरा माने ना लगी अगन है ये कैसी हाय! जाने ना !
तेरे लिए कलियां मैं चुनती रहूं आशाओं की मालाएं बुनती रहूं जागे में भी सपनों में खोई रहूं सोते में भी आहट सी सुनती रहूं ओ साजना! बालमा! मुझे क्या हो गया, जानू ना!
मेरे बिना अब तू भी रह न सके तेरे बिना अब मैं भी रह न सकूं हाय! मगर तू भी ये कह न सके हाय! मगर मैं भी ये कह न सकूं जानेमन! दफ़अतन दिल को ये क्या हुआ, जानूं ना !
कहते हैं इसे पैसा बच्चों, ये चीज़ बड़ी मामूली है लेकिन इस पैसे के पीछे सब दुनिया रस्ता भूली है इंसां की बनाई चीज़ है ये, लेकिन इंसान पे भारी हैं हल्की-सी झलक इस पैसे की धर्म और ईमान पे भारी है ये झूठ को सच कर देता है और सच को झूठ बनाता है भगवान नहीं, पर हर घर में भगवान की पदवी पाता है
इस पैसे के बदले दुनिया में इंसानों की मेहनत बिकती है जिस्मों की हरारत बिकती है, रूहों की शराफ़त बिकती है सरदार खरीदे जाते हैं, दिलदार खरीदे जाते हैं मिट्टी के सही पर इससे ही अवतार खरीदे जाते हैं
इस पैसे की खातिर दुनिया में आबाद वतन बंट जाते हैं धरती टुकड़े हो जाती हैं, लाशों के कफ़न बंट जाते हैं इज़्ज़त भी इससे मिलती है, ताज़ीम भी इससे मिलती है तहज़ीब भी इससे आती है, तालीम भी इससे मिलती है
हम आज तुम्हें इस पैसे का सारा इतिहास बताते हैं कितने जुग अब तक गुज़रे हैं, उन सबकी झलक दिखलाते हैं इक ऐसा वक़्त भी था जग में, जब इस पैसे का नाम न था चीज़ें चीज़ों से तुलती थीं, चीजों का कुछ भी दाम न था इंसान फकत इंसान था तब, इंसान का मजहब कुछ भी न था दौलत, गुरबत, इज्ज़त, ज़िल्लत, इन लफ्जों का मतलब कुछ भी न था
चीज़ों से चीज़ बदलने का ये ढंग बहुत बेकार-सा था लाना भी कठिन था चीज़ों का, ले जाना भी दुश्वार-सा था इंसान ने तब मिलकर सोचा – क्यूं वक़्त इतना बरबाद करें हर चीज़ की जो कीमत ठहरे, वो चीज़ न क्यूं ईज़ाद करें इस तरह हमारी दुनिया में पहला पैसा तैयार हुआ और इस पैसे की हसरत में इंसान ज़लील-ओ-ख़्वार हुआ
पैसे वाले इस दुनिया में जागीरों के मालिक बन बैठे मज़दूरों और किसानों की तक़दीरों के मालिक बन बैठे जागीरों पे कब्जा रखने को कानून बने, हथियार बने हथियारों के बल पर धनवाले इस धरती के सरदार बने जंगों में लड़ाया भूखों को और अपने सर पर ताज रखा निर्धन को दिया परलोक का सुख, अपने लिये जग का राज रखा पंडित और मुल्ला इनके लिए मज़हब के सहीफ़े लाते रहे शायर तारीफ़ें लिखते रहे, गायक दरबारी गाते रहे
वैसा ही करेंगे हम जैसा तुझे चाहिए पैसा हमें चाहिए !
पैसा हमें दे दे राजा गुन तेरे गायेंगे तेरे बच्चे बच्चियों का खैर मनायेंगे पैसा हमें चाहिए !
लोगों की अनथक मेहनत ने चमकाया रूप ज़मीनों का भाप और बिजली हमराह लिए, आ पहुंचा दौर मशीनों का इल्म और बिज्ञान की ताक़त ने मुंह मोड़ दिया दरियाओं का इंसान जो खाक का पुतला था, वो हाकिम बना हवाओं का जनता की मेहनत के आगे कुदरत ने खजाने खोल दिये राजों की तरह रखा था जिन्हें, वो सारे जमाने खोल दिये लेकिन इन सब ईजादों पर पैसे का इज़ारा होता रहा दौलत का नसीबा चमक उठा, मेहनत का मुकद्दर सोता रहा
वैसा ही करेंगे हम जैसा तुझे चाहिए पैसा हमें चाहिए !
रेलें भी लगाएंगे, मिलें भी चलाएंगे जंगों में भी जाएंगे, जाने भी गवाएंगे पैसा हमें चाहिए !
पैसा हमें दे दे बाबू गुण तेरे गायेंगे तेरे बच्चे बच्चियों का खैर मनायेंगे पैसा हमें चाहिये!
जुग-जुग से यूं ही इस दुनिया में हम दान के टुकड़े मांगते हैं हल जोत के, फ़सलें काट के भी पकवान के टुकड़े मांगते हैं लेकिन इन भीख के टुकड़ों से कब भूख का संकट दूर हुआ इंसान सदा दुख झेलेगा गर खत्म न ये दस्तूर हुआ जंजीर बनी है कदमों की, वो चीज़ जो पहले गहना थी भारत के सपूतों! आज तुम्हें बस इतनी बात ही कहना थी जिस वक़्त बड़े हो जाओ तुम, पैसे का राज मिटा देना अपना और अपने जैसों का जुग-जुग का कर्ज़ चुका देना जुग-जुग का कर्ज़ चुका देना !
तू ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर, अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!
सुबह औ' शाम के रंगे हुए गगन को चूमकर, तू सुन ज़मीन गा रही है कब से झूम-झूमकर, तू आ मेरा सिंगार कर, तू आ मुझे हसीन कर! अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है
ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार दिन, ये दिन भी जाएंगे गुज़र, गुज़र गए हज़ार दिन, कभी तो होगी इस चमन पर भी बहार की नज़र! अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है
हमारे कारवां का मंज़िलों को इन्तज़ार है, यह आंधियों, ये बिजलियों की, पीठ पर सवार है, जिधर पड़ेंगे ये क़दम बनेगी एक नई डगर अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है
हज़ार भेष धर के आई मौत तेरे द्वार पर मगर तुझे न छल सकी चली गई वो हार कर नई सुबह के संग सदा तुझे मिली नई उमर अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है
ज़मीं के पेट में पली अगन, पले हैं ज़लज़ले, टिके न टिक सकेंगे भूख रोग के स्वराज ये, मुसीबतों के सर कुचल, बढ़ेंगे एक साथ हम, अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है
बुरी है आग पेट की, बुरे हैं दिल के दाग़ ये, न दब सकेंगे, एक दिन बनेंगे इन्क़लाब ये, गिरेंगे जुल्म के महल, बनेंगे फिर नवीन घर! अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है
ना धेला लगता है, ना पैसा लगता है चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है
बिना कलों के जुड़ने वाला,बिना परों के उड़ने वाला सारों झूलों से आला ये झूला, जो भी झूला वो सब दुख भूला ना जैसा कुछ भी हो, ये वैसा लगता है चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है
जो कोई छूना चाहे तारों को, मस्का लगाए जरा यारों को बातें बनाए थोड़ा मुस्का के, झूले की डोरी थामे शरमा के जैसे दो बाहें हो, ये वैसा लगता है चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है
बांके हसीनों पे ये मरता है, प्यारों से प्यार सदा करता है ऐसे न पीछे हटो डर-डर के, आओ झुला दें तुम्हें जी भर के जो तुम पर आशिक हो, ये वैसा लगता है चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है
झूमती चली हवा, याद आ गया कोई बुझती बुझती आग को, फिर जला गया कोई झूमती चली हवा ...
खो गई हैं मंज़िलें, मिट गये हैं रास्ते गर्दिशें ही गर्दिशें, अब हैं मेरे वास्ते अब हैं मेरे वास्ते और ऐसे में मुझे, फिर बुला गया कोई झूमती चली हवा ...
चुप हैं चाँद चाँदनी, चुप ये आसमान है मीठी मीठी नींद में, सो रहा जहान है सो रहा जहान है आज आधी रात को, क्यों जगा गया कोई झूमती चली हवा ...
एक हूक सी उठी, मैं सिहर के रह गया दिल को अपना थाम के आह भर के रह गया चाँदनी की ओट से मुस्कुरा गया कोई झूमती चली हवा ...
चित्रपट / Film: Sangeet Samrat Tansen संगीतकार / Music Director: S N Tripathi गीतकार / Lyricist: शैलेन्द्र-(Shailendra) गायक / Singer(s): मुकेश-(Mukesh)
दिल का दर्द ना जाने दुनिया, जाने दिल तड़पना प्यार के दो बोलों के बदले दुश्मन हुआ ज़माना हाय रे हाय! दुश्मन हुआ ज़माना
उम्मीद ने ठोकर खायी है दिल दे के जुदाई पायी है तेरा ग़म है, मेरी तन्हाई है पहले से न था ये जाना कि दिल का आना है जी से जाना हाय रे हाय! दुश्मन हुआ ज़माना
आंखों मे जो आंसू आयेँगे तस्वीर तेरी दिखलायेँगे हम थाम के दिल रह जायेँगे पहले से न था ये जाना कि दिल का आना है जी से जाना
इतनी जल्दी ना करो रात का दिल टूटेगा आप जायेंगे तो जज्बात का दिल टूटेगा
सारी रात न जागे तो जवानी क्या सुबह तक न चले तो कहानी क्या जुल्फ जो हमने बनाई थी, वो बिखरी भी नहीं रंग पे आ के ये महफिल अभी निखरी भी नहीं शम्मा का, साज का, नगमात का दिल टूटेगा इतनी जल्दी ना करो रात का दिल टूटेगा |
गर्म सांसों से जरा जिस्म पिघलने दीजिए चाहने वालों के अरमान निकलने दीजिए कम से कम प्यार का इल्जाम तो लेते जाएं आज की रात का इनाम तो लेते जाएं चल दिए आप तो हर बात का दिल टूटेगा इतनी जल्दी ना करो रात का दिल टूटेगा
प्यार हुआ इक़रार हुआ है प्यार से फिर क्यों डरता है दिल कहता है दिल, रस्ता मुश्किल मालूम नहीं है कहाँ मंज़िल प्यार हुआ इक़रार हुआ...
कहो की अपनी प्रीत का मीत ना बदलेगा कभी तुम भी कहो इस राह का मीत न बदलेगा कभी प्यार जो टूटा, साथ जो छूटा चाँद न चमकेगा कभी प्यार हुआ इकरार हुआ...
रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ प्रीत हमारे प्यार के दोहराएंगी जवानियाँ मैं न रहूँगी, तुम न रहोगे फिर भी रहेंगी निशानियाँ प्यार हुआ इक़रार हुआ...
Movie/Album: श्री ४२० (1955) Music By: शंकर जयकिशन Lyrics By: शैलेन्द्र Performed By: लता मंगेशकर, मन्ना डे