Thursday, April 21, 2016

ज़िन्दगी के रंग कई रे

ज़िन्दगी के रंग कई रे, साथी रे !
ज़िन्दगी के रंग कई रे!

ज़िन्दगी दिलों को कभी जोड़ती भी है
ज़िन्दगी दिलों को कभी तोड़ती भी है
ज़िन्दगी के रंग कई रे, साथी रे !

ज़िन्दगी की राह में ख़ुशी के फूल भी
ज़िन्दगी की राह में ग़मों की धूल भी
ज़िन्दगी के रंग कई रे, साथी रे !

ज़िन्दगी कभी यक़ीं कभी ग़ुमान है
हर क़दम पे तेरा-मेरा इम्तहान है
ज़िन्दगी के रंग कई रे साथी रे !

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...