Saturday, June 11, 2016

फूलों के डेरे हैं

फूलों के डेरे हैं, साये घनेरे हैं
झूम रही हैं हवायेँ
ऐसे नज़ारों में, खिलती बहारों में
प्यार मिले तो रुक जायेँ |

कहीं भी आसमान के नीचे
गाती निगाहों का
लहराती बाहों का
हार मिले तो रुक जायें |

चले हैं दूर हम दीवाने
कोई रसीला सा
बांका सजीला सा
यार मिले तो रुक जाएं |

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...