उलझन सुलझे ना, रस्ता सूझे ना
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां
मेरे दिल का अंधेरा, हुआ और घनेरा
कुछ समझ न पाऊं क्या होना है मेरा
खड़ी दोराहे पर, ये पूछूं घबराकर
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां
जो सांस भी आये, तन चीर के जाए
इस हाल से कोई किस तरह निभाए
न मरना रास आया, न जीना मन भाया
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां
रुत गम की टले ना, कोई आस फले ना
तक़दीर के आगे मेरी पेश चले ना
बहुत की तदबीरें, ना टूटी जंजीरें
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां
मेरे दिल का अंधेरा, हुआ और घनेरा
कुछ समझ न पाऊं क्या होना है मेरा
खड़ी दोराहे पर, ये पूछूं घबराकर
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां
जो सांस भी आये, तन चीर के जाए
इस हाल से कोई किस तरह निभाए
न मरना रास आया, न जीना मन भाया
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां
रुत गम की टले ना, कोई आस फले ना
तक़दीर के आगे मेरी पेश चले ना
बहुत की तदबीरें, ना टूटी जंजीरें
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां