Monday, December 5, 2016

मेरी नज़र है तुझ पे

मेरी नज़र है तुझ पे, तेरी नज़र है मुझ पे
इसीलिए रहते हैं दोनों खोए हुए
तेरे बिना जियरा माने ना
लगी अगन है ये कैसी हाय! जाने ना !

तेरे लिए कलियां मैं चुनती रहूं
आशाओं की मालाएं बुनती रहूं
जागे में भी सपनों में खोई रहूं
सोते में भी आहट सी सुनती रहूं
ओ साजना! बालमा! मुझे क्या हो गया, जानू ना!

मेरे बिना अब तू भी रह न सके
तेरे बिना अब मैं भी रह न सकूं
हाय! मगर तू भी ये कह न सके
हाय! मगर मैं भी ये कह न सकूं
जानेमन! दफ़अतन दिल को ये क्या हुआ, जानूं ना !

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...