Wednesday, December 4, 2019

आप आए तो ख़याले-दिले-नाशाद आया

आप आए तो ख़याले-दिले-नाशाद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया

आपके लब पे कभी अपना भी नाम आया था
शोख नज़रों से मुहब्बत का सलाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
आपको देख के वो अहदे-वफ़ा याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया

रूह में जल उठे बुझती हुई यादों के दीये
कैसे दीवाने थे हम आपको पाने के लिए
यूं तो कुछ कम नहीं जो आपने अहसान किए
पर जो मांगे से न पाया वो सिला याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया

आज वो बात नहीं फिर भी कोई बात तो है
मेरे हिस्से में ये हल्की-सी मुलाक़ात तो है
ग़ैर का हो के भी ये हुस्न मेरे साथ तो है
किस वक़्त मुझे कब का गिला याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया।

Monday, December 2, 2019

एक थी लड़की मेरी सहेली

एक थी लड़की मेरी सहेली
साथ पली और साथ थी खेली
फूलो जैसे गाल थे उसके
रेशम जैसे बाल थे उसके
हंसती थी और गाती थी वो
सबके मन को भाती थी वो
झालरदार स्कर्ट पहन के
जब चलती थी वो बन-ठन के
हम उसको गुड़िया कहते थे
रंगों की पुड़िया कहते थे
सारे स्कूल की प्यारी थी वो
नन्ही राजकुमारी थी वो

इक दिन उसने भोलेपन से,
पूछा ये पापा से जा के
अब मैं खुश रहती हूं जैसे
सदा ही क्या खुश रहूंगी ऐसे ?
पापा बोले - मेरी बच्ची
बात बताऊं तुझको सच्ची
कल की बात न कोई जाने
कहते है ये सभी सयाने
ये मत सोचो कल क्या होगा
जो भी होगा अच्छा होगा

बचपन बीता आई जवानी
लड़की बन गई रूप की रानी
कालेज में इठलाती फिरती
बलखाती लहराती फिरती|
इक सुंदर चंचल लड़के ने
छुप-छुपकर चुपके चुपके से
लड़की की तस्वीर बनाई
और ये कहकर उसे दिखाई -
इस पर अपना नाम तो लिख दो
छोटा सा पैगाम तो लिख दो
लडकी पहले तो शरमाई
फिर मन ही मन में मुस्काई
बोली इक तस्वीर तुम्हारी
मैंने भी है दिल में उतारी
बोलो इस पर नाम लिखोगे
तुम भी कुछ पैगाम लिखोगे
लड़का बोला – नाम भी इक है
अब अपना पैगाम भी इक है
अब वो दोनों गाते फिरते
मस्ती में लहराते फिरते

इक दिन उसने भोलेपन से
पूछा ये अपने साजन से
अब मैं खुश रहती हूं जैसे
सदा ही क्या खुश रहूंगी ऐसे ?

उसने कहा कि मेरी रानी
इतनी बात है मैंने जानी
कल की बात न कोई जाने
कहते है ये सभी सयाने
ये मत सोचो कल क्या होगा
जो भी होगा अच्छा होगा।

Wednesday, November 13, 2019

तुम भी चलो हम भी चलें

तुम भी चलो, हम भी चलें, चलती रहे ज़िन्दगी
ना ज़मीं मंज़िल, ना आसमां, ज़िन्दगी है ज़िन्दगी |

पीछे देखें ना कभी मुड़ के राहों में
झूमे मेरा दिल तुम्हें ले के बाहों में
धड़कनों की ज़ुबां, नित काहे दास्तां
प्यार की झिलमिल छांव में पलती रहे ज़िन्दगी |

बहते चले हम मस्ती के धारों में
गूंजे यही धुन सदा दिल के तारों में
अब रुके ना कहीं, प्यार का कारवां
नित नई रुत के रंग में, ढलती रहे ज़िन्दगी |

Thursday, October 10, 2019

जब तक अम्बर पर तारे हों

वादा! हां वादा!
जब तक अम्बर पर तारे हों और धरती पर फूल खिलें
इसी जगह और इसी तरह हम दो मतवाले रोज़ मिलें
करो वादा हां जी! वादा

देखो अब बिछड़े न मिल के निगाह
कहा है तो हम सदा करेंगे निबाह
तपी-तपी धुली-धुली सांसें हैं गवाह
जिएं चाहे मरें अब घटेगी न चाह
जब तक नदियों में पानी हो और पेड़ों के हाथ हिलें
इसी जगह और इसी तरह हम दो मतवाले रोज़ मिलें

देखो कल ढूंढे नहीं हमको ये राह
जुदा हो के जीना हो तो जीना है ग़ुनाह
मिली रही सदा यूं ही बांहों की पनाह
घटेगा न कभी मेरा प्यार है अथाह
फूल बिछे हों इस रस्ते में या कांटों से पांव छिलें
इसी जगह और इसी तरह हम दो मतवाले रोज़ मिलें।

Thursday, September 12, 2019

चांद मद्दम है आसमां चुप है

चांद मद्दम है आसमां चुप है
नींद की गोद में जहां चुप है

दूर वादी में दूधिया बादल, झुक के परबत को प्यार करते है
दिल में नाकाम हसरतें लेकर, हम तेरा इंतज़ार करते हैं

इन बहारों के साये में आजा, फिर मुहब्बत जवां रहे न रहे
ज़िंदगी तेरे नामुरादों पर कल तलक मेहरबां रहे न रहे

रोज़ की तरह आज भी तारे, सुबह की गर्द में न खो जाएं
आ तेरे गम में जागती आंखें, कम-से-कम एक रात सो जाएं

चांद मद्दम है आसमां चुप है
नींद की गोद में जहां चुप है।

Friday, September 6, 2019

ये हवा, ये हवा, ये हवा

ये हवा, ये हवा, ये हवा
ये फिजा, ये फिजा, ये फिजा
है उदास जैसे मेरा दिल, मेरा दिल, मेरा दिल
आ भी जा ! आ भी जा ! आ भी जा !

आ! कि अब तो चांदनी भी जर्द हो चली, हो चली, हो चली
धडकनों की नर्म आंच सर्द हो चली, हो चली, हो चली
ढल चली है रात आ के मिल! आ के मिल! आ के मिल!
आ भी जा ! आ भी जा ! आ भी जा !

राह में बिछी हुई है मेरी हर नज़र, हर नज़र, हर नज़र
मैं तड़प रहा हूं और तू है बेखबर, बेखबर, बेखबर
रुक रही है सांस आ के मिल! आ के मिल! आ के मिल!
आ भी जा ! आ भी जा ! आ भी जा !

Thursday, August 15, 2019

वतन का क्या होगा अंजाम

बिना सिफारिश मिले नौकरी
बिन रिश्वत हो काम
अरे इसी को अनहोनी कहते हैं
इसी का कलजुग नाम
वतन का क्या होगा अंजाम
बचा ले ऐ मोला ऐ राम ..

रिश्वत पर पलते थे अफसर, छोटे हो या मोटे
बंद हुयी ये रस्म तो धंधे हो जायेंगे खोटे
घर-घर में मातम होगा दफ्तर-दफ्तर कोहराम
बचा ले ऐ मोला ऐ राम ..

यही चला गर ढंग यारों होंगे बुरे नतीजे
भूखे मरेंगे नेताओं के बेटे और भतीजे
जितनी इज्ज़त बनी थी अब तक
सब होगी नीलाम
बचा ले ऐ मोला ऐ राम ..

रिश्वत से मुंह बंद थे सबके अब फूटेंगे भांडे
अरे पता चलेगा किसके किससे मिले हुए थे डांडे
कौन सा ठेका लेकर किसने कितना माल बनाया
कितनी उजरत दी लोगों को कितना बिल दिखलाया
कौन सी फाईल किस दफ्तर से कैसे हो गयी चोरी
किसने कितनी गद्दारी की कितनी भरी तिजोरी
किस मिल मालिक के पैसे से कितने वोट कमाए
कुर्सी मिली तो देशभगत ने कितने नोट कमाए
रिश्वत से ही छुपे हुए थे सब काले करतूत
नंगे होकर सामने आयेंगे अब सभी सबूत
दुनिया भर के मुल्कों में होगा भारत बदनाम
बचा ले ऐ मोला ऐ राम
वतन का क्या होगा अंजाम .।

Tuesday, July 30, 2019

पहली नज़र में हमने

पहली नज़र में हमने तो अपना
दिल दे दिया था तुमको
पर तुमने देर लगाई
रुक-रुक के बात बढ़ाई
वैसे तो हमने मिलते ही तुमसे
अपना लिया था तुमको
पर जान के बात छुपाई
ना कहके कदर बढ़ाई

देखा तुम्हें तो हमने सबसे नज़र उठा ली
खोने की चीज़ खो ली,
पाने की चीज़ पा ली
सीधे न सही, घूम के सही मिल तो गये हैं

हमने तुम्हारी खातिर, क्या-क्या किए बहाने
आसान नहीं मोहब्बत अब तो ये बात माने
छोड़ा नहीं दम, जैसे भी हो हम मिल तो गए हैं

लिखा था आस्मां पर, यूँ ही ये खेल होना
पहले नज़र उलझना, फिर दिल का मेल होना
छोड़ो ये गिले, जैसे भी मिले, मिल तो गये हैं।

Sunday, July 21, 2019

तुझको मेरा प्यार पुकारे

इन हवाओं में, इन फ़िज़ाओं में
तुझको मेरा प्यार पुकारे
आजा! आजा रे! तुझको मेरा प्यार पुकारे
रुक ना पाऊं मैं, खिचती आऊं मैं
दिल को जब दिलदार पुकारे

लौट रही हैं मेरी सदाएं, दीवारों से सर टकरा के
हाथ पकड़कर चलने वाले, हो गए रुख़सत हाथ छुड़ा के
उनको कुछ भी याद नहीं है, अब कोई सौ बार पुकारे

इल्म नहीं था इतनी जल्दी ख़त्म फ़साने हो जाएंगे
तुम बेगाने बन जाओगे, हम दीवाने हो जाएंगे
कल बाहों का हार मिला था, आज अश्कों का हार पुकारे

लूट के मेरे दिल की दुनिया प्यार के झूले झूलने वाले !
पत्थर बनकर यूं चुप क्यूं है, कुछ तो कह ओ भूलने वाले!
इक पुरानी याद बुलाए, इक टूटा इकरार पुकारे
आजा आजा रे, तुझको मेरा प्यार पुकारे
आजा! आजा रे! तुझको मेरा प्यार पुकारे।

Thursday, June 20, 2019

आज सजन मोहे अंग लगा लो

सखी री बिरह के दुखड़े सह-सह कर जब राधे बेसुध हो ली
तो इक दिन अपने मनमोहन से जा कर यूँ बोली

आज सजन मोहे अंग लगा लो, जनम सफ़ल हो जाये
हृदय की पीड़ा देह की अगनी, सब शीतल हो जाये

कई जुग से हैं जागे, मोरे नैन अभागे, कहीं जिया नहीं लागे बिन तोरे
सुख दिखे नहीं आगे, दुःख पीछे पीछे भागे, जग सूना सूना लागे बिन तोरे
प्रेम सुधा मोरे साँवरिया इतनी बरसा दो जग जलथल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो, जनम सफ़ल हो जाये

मोहे अपना बना लो मोरी बाँह पकड़, मैं हूँ जनम जनम की दासी
मोरी प्यास बुझा दो मनहर गिरिधर, मैं हूँ अन्तरघट तक प्यासी
प्रेम सुधा मोरे साँवरिया इतनी बरसा दो जग जलथल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो, जनम सफ़ल हो जाये

किए लाख जतन, मोरे मन की तपन, मोरे तन की जलन नहीं जाये
कैसी लागी ये लगन, कैसी जागी ये अगन, जिया धीर धरन नहीं पाये
प्रेम सुधा मोरे साँवरिया इतनी बरसा दो जग जलथल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो, जनम सफ़ल हो जाये।

Wednesday, June 5, 2019

जाने क्या तूने कही

जाने क्या तूने कही
जाने क्या मैंने सुनी
बात कुछ बन ही गई

सनसनाहट सी हुई
थरथराहट सी हुई
जाग उठे ख्वाब कई
बात कुछ बन ही गई

नैन झुक-झुक के उठे
पांव रुक-रुक के उठे
आ गई चाल नई
बात कुछ बन ही गई

ज़ुल्फ़ शाने पे मुड़ी
एक खुशबू सी उडी
खुल गए राज़ कई
बात कुछ बन ही गई।

Thursday, May 9, 2019

सर जो तेरा चकराए

सर जो तेरा चकराए या दिल डूबा जाए
आजा प्यारे! पास हमारे
काहे घबराए ! काहे घबराए !

तेल मेरा है मुश्की
गन्ज रहे न खुश्की
जिस के सर पर हाथ फिरा दूं, चमके किस्मत उसकी
सुन सुन सुन ! अरे बेटा सुन !
इस चम्पी में बड़े बड़े गुन
लाख दुखों की एक दवा है, क्यूं ना आज़माए !
काहे घबराए ! काहे घबराए !

प्यार का होवे झगड़ा
या बिज़िनेस का हो रगड़ा
सब लफ़ड़ों का बोझ हटे, जब पड़े हाथ इक तगड़ा
सुन सुन सुन ! अरे बाबू सुन !
इस चम्पी में बड़े बड़े गुन
लाख दुखों की एक दवा है, क्यूं ना आज़माए !
काहे घबराए ! काहे घबराए !

नौकर हो या मालिक
लीडर हो या पब्लिक
अपने आगे सभी झुके हैं, क्या राजा क्या सैनिक
सुन सुन सुन ! अरे राजा सुन !
इस चम्पी में बड़े बड़े गुन
लाख दुखों की एक दवा है, क्यूं ना आज़माए !
काहे घबराए ! काहे घबराए !

Friday, April 26, 2019

मेरे घर आई एक नन्हीं परी

मेरे घर आई एक नन्हीं परी
चांदनी के हसीन रथ पे सवार
मेरे घर आई एक नन्ही परी |

उसकी बातों में शहद जैसी मिठास
उसकी सासों में इतर की महकास
होंठ जैसे के भीगे-भीगे गुलाब
गाल जैसे के दहके-दहके अनार
मेरे घर आई एक नन्ही परी |

उसके आने से मेरे आंगन में
खिल उठे फूल, गुनगुनायी बहार
देख कर उसको जी नहीं भरता
चाहे देखूँ उसे हज़ारों बार
मेरे घर आई एक नन्ही परी |

मैंने पूछा उसे के कौन है तू
हंस के बोली के मैं हूँ तेरा प्यार
मैं तेरे दिल में थी हमेशा से
घर में आई हूँ आज पहली बार
मेरे घर आई एक नन्ही परी

Tuesday, April 16, 2019

ज़िन्दगी इत्तफ़ाक़ है

ज़िन्दगी इत्तफ़ाक़ है
कल भी इत्तफ़ाक़ थी
आज भी इत्तफ़ाक़ है
ज़िन्दगी इत्तफ़ाक़ है ...

जाम पकड़ बढ़ा के हाथ
माँग दुआ घटे न रात
जान-ए-वफ़ा तेरी क़सम
कहते हैं दिल की बात हम
ग़र कोई मेल हो सके
आँखों का खेल हो सके
अपने को ख़ुशनसीब जान
वक़्त को मेहरबान मान
मिलते हैं दिल कभी-कभी
वरना हैं अजनबी सभी
मेरे हमदम मेरे मेहरबाँ
हर ख़ुशी इत्तफ़ाक़ है
कल भी इत्तफ़ाक़ थी ...

हुस्न है और शबाब है
ज़िन्दगी क़ामयाब है
बज़्म यूँ ही खिली रहे
अपनी नज़र मिली रहे
रंग यूँ ही जमा रहे
वक़्त यूँ ही थमा रहे
साज़ की लय पे झूम ले
ज़ुल्फ़ के ख़म को चूम ले
मेरे किए से कुछ नहीं
तेरे किए से कुछ नहीं
मेरे हमदम मेरे मेहरबाँ
ये सभी इत्तफ़ाक़ है
कल भी इत्तफ़ाक़ थी ..।

Friday, March 15, 2019

जियो तो ऐसे जियो

जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है
मरो तो ऐसे कि जैसे तुम्हारा कुछ नहीं |

ये एक राज़ के दुनिया न जिसको जान सकी
यही वो राज़ है जो ज़िंदगी का हासिल है,
तुम्हीं कहो तुम्हे ये बात कैसे समझाऊँ
कि ज़िंदगी की घुटन ज़िंदगी की कातिल है,
हर इक निगाह को कुदरत का ये इशारा है

जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है ।
जहां में आ के जहां से खिचें-खिचें न रहो
वो ज़िंदगी ही नही जिसमें आस बुझ जाए,
कोई भी प्यास दबाये से दब नहीं सकती
इसी से चैन मिलेगा कि प्यास बुझ जाए,
ये कह के मुड़ता हुआ ज़िंदगी का धारा है
जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है ।

ये आसमां, ये जमीं, ये फिजा, ये नज़्ज़ारे
तरस रहे हैं तुम्हारी मेरी नज़र के लिए
नज़र चुरा के हर एक शै को यूं न ठुकराओ
कोई शरीक-ए-सफ़र ढूँढ़ लो सफ़र के लिए
बहुत करीब से मैंने तुम्हें पुकारा है
जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है ।

Wednesday, February 27, 2019

इतनी नाज़ुक न बनो

इतनी नाज़ुक न बनो, इतनी नाज़ुक न बनो,
हद के अन्दर हो नजाकत तो अदा होती है
हद से बढ जाये तो आप ही अपनी सज़ा होती है।

जिस्म का बोझ उठाये नहीं उठता तुम से
जिंदगानी का कडा बोझ सहोगी कैसे
तुम जो हलकी सी हवाओं में लचक जाती हो
तेज झोंकों के थपेड़ों में रहोगी कैसे।

ये न समझो के हर एक राह में कलियाँ होंगी
राह चलनी है तो काँटों में भी चलना होगा
ये नया दौर है इस दौर में जीने के लिए
हुस्न को हुस्न का अंदाज़ बदलना होगा।

कोई रुकता नहीं ठहरे हुए राही के लिए
जो भी देखेगा वो कतरा के गुज़र जाएगा
हम अगर वक़्त के हमराह न चलने पाए
वक़्त हम दोनों को ठुकरा के गुजर जाएगा।

इतनी नाज़ुक न बनो, इतनी नाज़ुक न बनो।

Friday, February 22, 2019

तेरा हाथ हाथ में हो अगर

तेरा हाथ हाथ में हो अगर तो सफर ही असले-हयात है
मेरे हर कदम पे हैं मंज़िलें, तेरा प्यार गर मेरे साथ है

मेरी बात का मेरी हमनफस तू जवाब दे कि न दे मुझे
तेरी एक चुप में जो है छुपी, वो हज़ार बातों की बात है

मेरी ज़िंदगी का हर एक पल तेरे हुस्न से है जुड़ा हुआ
तेरे होंठ थिरके तो सुबह है तेरी जुल्फ बिखरे तो रात है


बस्ती -बस्ती पर्वत-पर्वत

बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा
लेके दिल का इकतारा..
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा

पल दो पल का साथ हमारा पल दो पल के यारी
आज रुके तो कल करनी है चलने की तैयारी
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा
लेके दिल का इकतारा...

क़दम-क़दम पर होनी बैठी अपना जाल बिछाए
इस जीवन की राह में जाने कौन कहाँ रह जाए 
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा 
लेके दिल का इकतारा...

धन -दौलत के पीछे क्यों है ये दुनिया दीवानी
यहाँ की दौलत यहाँ रहेगी साथ नहीं ये जानी
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा
लेके दिल का इकतारा...।

Wednesday, January 23, 2019

ये रात ये चांदनी फिर कहाँ

ये रात ये चांदनी फिर कहां सुन जा दिल की दास्तां

पेड़ों की शाखों पे सोई-साई चांदनी
तेरे ख्यालों में खोई—खोई चांदनी
और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी
रात ये बहार की फिर कभी न आएगी
दो एक पल और है ये समां।

लहरों के होंठो पे धीमा-धीमा राग है
भीगी हवाओं में ठंडी-ठंडी आग है
इस हसीं आग में तू भी जल के देख ले
ज़िन्दगी के गीत की धुन बदल के देख ले
खुलने दे अब धड़कनों की ज़बां।

जाती बहारें हैं उठती जवानियां
तारों की छांव में कह ले कहानियां
एक बार चल दिए गर तुझे पुकार के
लौटकर न आयेंगे काफिले बहार के
आजा अभी ज़िन्दगी है जवां।

Wednesday, January 2, 2019

तख़्त न होगा ताज न होगा

तख़्त न होगा ताज न होगा, कल था लेकिन आज न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें,वो सच्चा स्वराज न होगा।

लाखों की मेहनत पर कब्ज़ा मुठ्ठी भर धनवानों का
दीन -रम के नाम पे खूनी बंटवारा इंसानों का
जिसका ये इतिहास रहा है अब वो अँधा राज न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होगा।

जनता का फरमान चलेगा, जनता की सरकार बनेगी
धरती की बेहक आबादी धरती की हकदार बनेगी
सामन्ती सरकार न होगी पूंजीवाद समाज न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होगा।

मेहनत पर मजदूर का हक़ है, खेतों पर दहकान का हक़ है
जीने पर पाबंदी क्यों है, जीना हर इंसान का हक़ है
जय हो जनता राज कि जिसमें हुल्लड़ और नियाज़ न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होग॥

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...