ये रात ये चांदनी फिर कहां सुन जा दिल की दास्तां
पेड़ों की शाखों पे सोई-साई चांदनी
तेरे ख्यालों में खोई—खोई चांदनी
और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी
रात ये बहार की फिर कभी न आएगी
दो एक पल और है ये समां।
लहरों के होंठो पे धीमा-धीमा राग है
भीगी हवाओं में ठंडी-ठंडी आग है
इस हसीं आग में तू भी जल के देख ले
ज़िन्दगी के गीत की धुन बदल के देख ले
खुलने दे अब धड़कनों की ज़बां।
जाती बहारें हैं उठती जवानियां
तारों की छांव में कह ले कहानियां
एक बार चल दिए गर तुझे पुकार के
लौटकर न आयेंगे काफिले बहार के
आजा अभी ज़िन्दगी है जवां।
पेड़ों की शाखों पे सोई-साई चांदनी
तेरे ख्यालों में खोई—खोई चांदनी
और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी
रात ये बहार की फिर कभी न आएगी
दो एक पल और है ये समां।
लहरों के होंठो पे धीमा-धीमा राग है
भीगी हवाओं में ठंडी-ठंडी आग है
इस हसीं आग में तू भी जल के देख ले
ज़िन्दगी के गीत की धुन बदल के देख ले
खुलने दे अब धड़कनों की ज़बां।
जाती बहारें हैं उठती जवानियां
तारों की छांव में कह ले कहानियां
एक बार चल दिए गर तुझे पुकार के
लौटकर न आयेंगे काफिले बहार के
आजा अभी ज़िन्दगी है जवां।