Wednesday, January 23, 2019

ये रात ये चांदनी फिर कहाँ

ये रात ये चांदनी फिर कहां सुन जा दिल की दास्तां

पेड़ों की शाखों पे सोई-साई चांदनी
तेरे ख्यालों में खोई—खोई चांदनी
और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी
रात ये बहार की फिर कभी न आएगी
दो एक पल और है ये समां।

लहरों के होंठो पे धीमा-धीमा राग है
भीगी हवाओं में ठंडी-ठंडी आग है
इस हसीं आग में तू भी जल के देख ले
ज़िन्दगी के गीत की धुन बदल के देख ले
खुलने दे अब धड़कनों की ज़बां।

जाती बहारें हैं उठती जवानियां
तारों की छांव में कह ले कहानियां
एक बार चल दिए गर तुझे पुकार के
लौटकर न आयेंगे काफिले बहार के
आजा अभी ज़िन्दगी है जवां।

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...