Thursday, September 12, 2019

चांद मद्दम है आसमां चुप है

चांद मद्दम है आसमां चुप है
नींद की गोद में जहां चुप है

दूर वादी में दूधिया बादल, झुक के परबत को प्यार करते है
दिल में नाकाम हसरतें लेकर, हम तेरा इंतज़ार करते हैं

इन बहारों के साये में आजा, फिर मुहब्बत जवां रहे न रहे
ज़िंदगी तेरे नामुरादों पर कल तलक मेहरबां रहे न रहे

रोज़ की तरह आज भी तारे, सुबह की गर्द में न खो जाएं
आ तेरे गम में जागती आंखें, कम-से-कम एक रात सो जाएं

चांद मद्दम है आसमां चुप है
नींद की गोद में जहां चुप है।

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