Thursday, October 10, 2019

जब तक अम्बर पर तारे हों

वादा! हां वादा!
जब तक अम्बर पर तारे हों और धरती पर फूल खिलें
इसी जगह और इसी तरह हम दो मतवाले रोज़ मिलें
करो वादा हां जी! वादा

देखो अब बिछड़े न मिल के निगाह
कहा है तो हम सदा करेंगे निबाह
तपी-तपी धुली-धुली सांसें हैं गवाह
जिएं चाहे मरें अब घटेगी न चाह
जब तक नदियों में पानी हो और पेड़ों के हाथ हिलें
इसी जगह और इसी तरह हम दो मतवाले रोज़ मिलें

देखो कल ढूंढे नहीं हमको ये राह
जुदा हो के जीना हो तो जीना है ग़ुनाह
मिली रही सदा यूं ही बांहों की पनाह
घटेगा न कभी मेरा प्यार है अथाह
फूल बिछे हों इस रस्ते में या कांटों से पांव छिलें
इसी जगह और इसी तरह हम दो मतवाले रोज़ मिलें।

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...