This is a humble collection of songs of Sahir Ludhianvi & Shailendra Singh, the greatest lyricists, Bollywood has ever seen. Sahir used his songs for spreading message of love for humankind through philosophical notes or social commentary. He also used some of his ghazals & nazms in his movies also by simplifying them. Shankardas Kesarilal popularly known by his pen name Shailendra, was a popular Indian Hindi lyricist, playback singer and musician.
पेड़ों की शाखों पे सोई-साई चांदनी तेरे ख्यालों में खोई—खोई चांदनी और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी रात ये बहार की फिर कभी न आएगी दो एक पल और है ये समां।
लहरों के होंठो पे धीमा-धीमा राग है भीगी हवाओं में ठंडी-ठंडी आग है इस हसीं आग में तू भी जल के देख ले ज़िन्दगी के गीत की धुन बदल के देख ले खुलने दे अब धड़कनों की ज़बां।
जाती बहारें हैं उठती जवानियां तारों की छांव में कह ले कहानियां एक बार चल दिए गर तुझे पुकार के लौटकर न आयेंगे काफिले बहार के आजा अभी ज़िन्दगी है जवां।
तख़्त न होगा ताज न होगा, कल था लेकिन आज न होगा जिसमें सब अधिकार न पायें,वो सच्चा स्वराज न होगा।
लाखों की मेहनत पर कब्ज़ा मुठ्ठी भर धनवानों का दीन -रम के नाम पे खूनी बंटवारा इंसानों का जिसका ये इतिहास रहा है अब वो अँधा राज न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होगा।
जनता का फरमान चलेगा, जनता की सरकार बनेगी धरती की बेहक आबादी धरती की हकदार बनेगी सामन्ती सरकार न होगी पूंजीवाद समाज न होगा जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होगा।
मेहनत पर मजदूर का हक़ है, खेतों पर दहकान का हक़ है जीने पर पाबंदी क्यों है, जीना हर इंसान का हक़ है जय हो जनता राज कि जिसमें हुल्लड़ और नियाज़ न होगा जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होग॥
ना तो कारवां की तलाश है, ना तो रहबर की तलाश है
मेरे शौके खाना ख़राब को, तेरी रहगुजर की तलाश है.
मेरे ना मुराद जूनून का है इलाज तो कोई मौत है
जो दवा के नाम पे जहर दे उसी चारागर की तलाश है .
तेरा इश्क है मेरी आरज़ू, तेरा इश्क है तेरी आबरू
तेरा इश्क मैं कैसे छोड़ दूं, मेरी उम्र भर की तलाश है
दिल इश्क, जिस्म इश्क और जान इश्क है
ईमान की जो पूछो तो ईमान इश्क है
तेरा इश्क मैं कैसे छोड़ दूं, मेरी उम्र भर की तलाश है
जांसोज़ की हालत को जांसोज़ ही समझेगा
मैं शमा से कहता हूँ महफ़िल से नहीं कहता क्योंकि
ये इश्क इश्क है..
सहर तक सब का है अंजाम है जलकर ख़ाक हो जाना
बने महफ़िल में कोई शमा या परवाना हो जाये क्योंकि
ये इश्क इश्क है..
वहशते दिल रस्नो दार से रोकी न गयी
किसी खंज़र किसी तलवार से रोकी न गए
इश्क मजनूं की वो आवाज़ है, जिस के आगे
कोई लैला किसी दीवार से रोकी न गयी
ये इश्क इश्क है..
वो हँस के अगर मांगे तो हम जान भी दे दें
ये जान तो क्या चीज है, ईमान भी दे दें
नाजो अंदाज से कहते हैं क़ि जीना होगा
जहर भी देते हैं तो कहते हैं क़ि पीना होगा
जब मैं पीता हूँ तो कहते हैं क़ि मरता भी नहीं
जब मैं मरता हूँ तो कहते हैं क़ि जीना होगा
ये इश्क इश्क है..
मजहब इ इश्क की हर रस्म कड़ी होती है
हर कदम पे कोई दीवार खड़ी होती है
इश्क आज़ाद है, हिन्दू न मुस्लमान है इश्क
आप ही धर्म है और आप ही ईमान है इश्क
जिस से आगाह नहीं शेख ओ बरहन दोनों
इस हकीकत का गरजता हुआ ऐलान है इश्क
इश्क न पुच्छे दीं धरम नूं, इश्क न पूछे जातां
इश्क दे हत्थों गर्म लहू विच डूबियाँ लक्ख बराताँ
ये इश्क इश्क है..
राह उल्फ की कठिन है इसे आसान न समझ, क्योंकि
ये इश्क इश्क है..
बहुत कठिन है डगर पनघट की
अब क्या भर लाऊँ मैं जमुना से मटकी
मैं जो चली जल जमुना भरण को
नन्द को छोरो मोहे रोको
अब लाज रखो मेरे घूँघट पट की
जब जब कृष्ण की बंसी बजी निकली राधा सज से
जान अजान का ध्यान भुला के, लोकलाज को ताज के
बन-बन डोली जनक दुलारी पहन के प्रेम की माला
दर्शन जल की प्यासी मीरा पी गए विष का प्याला
और फिर अर्ज करी क़ि लाज राखो राखो राखो
अल्लाह और रसूल का फरमान इश्क है
यानी हदीस इश्क है, कुरान इश्क है
गौतम का और मसीहा का अरमान इश्क है
ये कायनात जिस्म है, और जान इश्क है
इश्क सरमद, इश्क ही मंसूर है
इश्क मूसा, इश्क कोहेतूर है
खाक को बुत और बुत को देवता करता है इश्क
इंतिहा ये है के बन्दे को खुदा करता है इश्क
तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है।
मेरे दिल की मेरे जज़बात की कीमत क्या है उलझे-उलझे से ख्यालात की कीमत क्या है मैंने क्यूं प्यार किया तुमने न क्यूं प्यार किया इन परेशान सवालात कि कीमत क्या है तुम जो ये भी न बताओ तो ये हक़ है तुमको मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है।
ज़िन्दगी सिर्फ़ मुहब्बत नहीं कुछ और भी है ज़ुल्फ़-ओ-रुख़सार की जन्नत नहीं कुछ और भी है भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में इश्क़ ही एक हक़ीकत नहीं कुछ और भी है तुम अगर आँख चुराओ तो ये हक़ है तुमको मैंने तुमसे ही नहीं सबसे मुहब्बत की है तुम अगर आँख चुराओ तो ये हक़ है तुमको।
तुमको दुनिया के ग़म-ओ-दर्द से फ़ुरसत ना सही सबसे उलफ़त सही मुझसे ही मुहब्बत ना सही मैं तुम्हारी हूँ यही मेरे लिये क्या कम है तुम मेरे होके रहो ये मेरी क़िस्मत ना सही और भी दिल को जलाओ ये हक़ है तुमको मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है।
बच्चों तुम तकदीर हो कल के हिंदुस्तान की बापू के वरदान की, नेहरु के अरमान की।
आज के टूटे खँडहरों पर तुम कल का देश बसाओगे जो हम लोगों से न हुआ वो तुम कर के दिखलाओगे तुम नन्हीं बुनियादें हो दुनिया के नए विधान की।
दीन-धरम के नाम पे कोई बीज फूट का बोए ना जो सदियों के बाद मिली है वो आज़ादी खोए ना हर मज़हब से ऊँची है क़ीमत इन्सानी जान की।
फिर कोई जयचन्द न उभरे फिर कोई जाफ़र न उठे ग़ैरों का दिल ख़ुश करने को अपनों पर खंज़र न उठे धन-दौलत के लालच में तौहीन न हो ईमान की। नारी को इस देश ने देवी कह कर दासी जाना है जिसको कुछ अधिकार न हो वो घर की रानी माना है तुम ऐसा आदर मत लेना आड़ हो जो अपमान की।
रह न सके अब इस दुनिया में युग सरमायादारी का तुमको झंडा लहराना है मेहनत की सरदारी का तुम चाहो तो बदल के रख दो क़िस्मत हर इन्सान की।
अरे भई निकल के आ घर से, आ घर से (2) दुनिया की रौनक देख फिर से देख ले फिर से (2) होय! अरे भई निकल के आ घर से, आ घर से
केम ऊँघेचे भई घनश्याम जी, ओ (2) ओ दुनिया बदल गयी प्यारे, आगे निकल गयी प्यारे (2) अन्धे कुँए में घुस के क्यों बैठा हुआ है मन मारे (2) अरे भई निकल के आ घर से …
तुला भीती ही कसली वाट ते, रे (2) ओ पानी को, तेल को छोड़ा, बिजली की रेल को छोड़ा (2) कल चाँद और तारों में पहुँचेगा ऐटमी घोड़ा अरे भई, अरे भई अरे भई निकल के आ घर से …
कैनो भाबेन ओकारन ऐ बंकी बाबू, रे (2) ओ कल जो था कल रहा होगा, आगे की सोच क्या होगा (2) टूटी पुरानी ढफली पे, तू कल कमर दिया मलेगा? (2) अरे भई निकल के आ घर से …
फ़िल्म: नई दिल्ली / New Delhi (1956) गायक/गायिका: किशोर कुमार संगीतकार: शंकर-जयकिशन गीतकार: शैलेंद्र सिंह अदाकार: किशोर कुमार, वैजयन्ती माला