Saturday, July 9, 2016

निगाहों में चमक जाग उठी

कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी
दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी

किसके आने की ख़बर ले के हवाएं आईं
जिस्म से फूल चटकने की सदाएं आईं
रूह खिलने लगी, सांसों में महक जाग उठी

किसने ये मेरी नज़र देख के बांहें खोलीं
शोख़ जज़्बात ने सीने में निगाहें खोलीं
होंठ तपने लगे, ज़ुल्फ़ों में लचक जाग उठी

किसके हाथों ने मेरे हाथों से कुछ मांगा है
किसके ख़्वाबों ने मेरी रातों से कुछ मांगा है
साज़ बजने लगे, आंचल में धनक जाग उठी

Tuesday, July 5, 2016

आज की रात पिया दिल न तोड़ो

आज की रात पिया दिल न तोड़ो
मन की बात पिया मान लो |

दिल की कहानी अपनी ज़ुबानी तुमको सुनाने आयी हूँ
आँखों में ले के सपने सुहाने, अपना बनाने आयी हूँ
छोड़ के साथ पिया मुँह न मोड़ो
मन की बात पिया मान लो |

चन्दा भी देखे तारे भी देखे हमको गगन की ओट से
घायल किया है दिल तुमने मेरा मीठी नज़र की चोट से
थाम के हाथ पिया यूँ न छोड़ो
मन की बात पिया मान लो।

Saturday, June 11, 2016

फूलों के डेरे हैं

फूलों के डेरे हैं, साये घनेरे हैं
झूम रही हैं हवायेँ
ऐसे नज़ारों में, खिलती बहारों में
प्यार मिले तो रुक जायेँ |

कहीं भी आसमान के नीचे
गाती निगाहों का
लहराती बाहों का
हार मिले तो रुक जायें |

चले हैं दूर हम दीवाने
कोई रसीला सा
बांका सजीला सा
यार मिले तो रुक जाएं |

Wednesday, June 1, 2016

मैंने एक ख़्वाब सा देखा है

मैंने एक ख़्वाब सा देखा है
सुन के शरमा तो न जाओगी?

मैंने देखा है कि फूलों से लदी शाखों में
तुम लचकती हुई यूं मेरी क़रीब आई हो
जैसे मुद्दत से यूं ही साथ रहा हो अपना
जैसे अब की नहीं सदियों की शनासाई हो

मैंने भी ख़्वाब सा देखा है
खुद से इतरा तो न जाओगे?

मैंने देखा कि गाते हुए झरनों के क़रीब
अपनी बेताबी-ए-जज़्बात कही है तुमने
कांपते होंठों से, रुकती हुई आवाज़ के साथ
जो मेरे दिल में थी, वो बात कही है तुमने

आंच देने लगा क़दमों के तले बर्फ़ का फ़र्श
आज जाना कि मुहब्बत में है गर्मी कितनी
संगमरमर की तरह सख़्त बदन में तेरे
आ गयी है मेरे छू लेने से नर्मी कितनी

हम चले जाते हैं और दूर तलक कोई नहीं
सिर्फ़ पत्तों के चटखने की सदा आती है
दिल में कुछ ऐसे ख़यालात ने करवट ली है
मुझको तुमसे नहीं अपने से हया आती है

मैंने देखा है कि कोहरे से भरी वादी में
मैं ये कहता हूं चलो आज कहीं खो जाएं
मैं ये कहती हूं कि खोने की ज़रूरत क्या है
ओढ़कर धुंध की चादर को यहीं सो जाएं


Friday, May 27, 2016

दिल का दर्द ना जाने दुनिया

दिल का दर्द ना जाने दुनिया, जाने दिल तड़पना
प्यार के दो बोलों के बदले दुश्मन हुआ ज़माना
हाय रे हाय! दुश्मन हुआ ज़माना

उम्मीद ने ठोकर खायी है
दिल दे के जुदाई पायी है
तेरा ग़म है, मेरी तन्हाई है
पहले से न था ये जाना
कि दिल का आना है जी से जाना
हाय रे हाय! दुश्मन हुआ ज़माना

आंखों मे जो आंसू आयेँगे
तस्वीर तेरी दिखलायेँगे
हम थाम के दिल रह जायेँगे
पहले से न था ये जाना
कि दिल का आना है जी से जाना

हाय रे हाय! दुश्मन हुआ ज़माना

Thursday, May 19, 2016

उलझन सुलझे ना

उलझन सुलझे ना, रस्ता सूझे ना
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां

मेरे दिल का अंधेरा, हुआ और घनेरा
कुछ समझ न पाऊं क्या होना है मेरा
खड़ी दोराहे पर, ये पूछूं घबराकर
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां

जो सांस भी आये, तन चीर के जाए
इस हाल से कोई किस तरह निभाए
न मरना रास आया, न जीना मन भाया
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां

रुत गम की टले ना, कोई आस फले ना
तक़दीर के आगे मेरी पेश चले ना
बहुत की तदबीरें, ना टूटी जंजीरें
जाऊं कहां मैं जाऊं कहां

Saturday, April 30, 2016

नीले पर्बतों की धारा

नीले पर्बतों की धारा,
आयी ढूँढने किनारा बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिये
कोई हमारा चाहिये

फूल में जैसे फूल की खुशबू
दिल में है यूँ तेरा बसेरा
धरती से अम्बर तक फैला
चाहत की बाहों का घेरा

सूरज पीछे घूमे धरती
साँझ के पीछे घूमे सवेरा
जिस नाते ने इनको बाँधे
वो नाता है तेरा मेरा

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...