Sunday, October 1, 2017

चोरी चोरी मेरी गली आना

चोरी चोरी मेरी गली आना है बुरा
आ के बिना बात किये जाना है बुरा

अच्छे नहीं ये इशारे, पेड़ों तले छुप-छुपा के
आओ न दो बातें कर लें, नज़रों से नज़रे मिला के
दिन हैं प्यार के, मौज बहार के
देखो! भोले-भाले जी को तरसाना है बुरा

दिल आ गया है तो प्यारे, बदनाम होने का डर क्या?
इश्क़ और वफ़ा की गली में, दुनिया के ग़म का गुज़र क्या?
दिन हैं प्यार के, मौज बहार के

देखो! भोले-भाले जी को तरसाना है बुरा

Wednesday, September 20, 2017

अल्लाह तेरो नाम

अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
सबको सन्मति दे भगवान

इस धरती का रूप ना उजड़े
प्यार की ठंडी धूप ना उजड़े
सबको मिले सुख का वरदान

मांगों का सिन्दूर ना छूटे
माँ बहनों की आस ना टूटे
देह बिना दाता,भटके ना प्राण

ओ सारे जग के रखवाले
निर्बल को बल देने वाले
बलवानों को दे दे ज्ञान


Saturday, September 16, 2017

चढ़ गयो पापी बिछुआ

ओ बिछुआ
हाय रे
पीपल छैंया
बैठी पल भर
हो
धर के गगरिया
हाय रे
हाय रे – 3

होय ओय ओय ओय ओय
ओ दैया रे दैया रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ
ओ दैया रे दैया रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ
ओ हाय-हाय रे मर गई
कोई उतारो बिछुआ
ओ हाय-हाय रे मर गई
कोई उतारो बिछुआ
ओ दैया रे दैया रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ
ओ दैया रे दैया रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ

कैसो रे पापी बिछुआ बिछुआ – 2
ओ दैया रे दैया रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ
ओ दैया रे दैया रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ

हो
हो ओ
मन्तर फेरूँ हूँ
कोमल काया ओ
छोड़ के जा रे
छू
जा रे – 3

होय ओय ओय ओय ओय
ओ और भी चढ़ गयो
ना गयो पापी बिछुआ
ओ और भी चढ़ गयो
ना गयो पापी बिछुआ
कैसी आग लगा गयो पापी बिछुआ
ओ कैसी आग लगा गयो पापी बिछुआ
सारे बदन पे छा गयो पापी बिछुआ
सारे बदन पे छा गयो पापी बिछुआ

कैसो रे पापी बिछुआ बिछुआ – 2
ओ दैया रे दैया रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ
ओ दैया रे दैया रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ

ओ
हाय रे
मन्तर झूठा
हां बैद भी झूठा
हो
पिया घर आ रे
आ रे
आ रे – 3

ओय ओय ओय ओय
देखो रे देखो रे
देखो उतर गयो बिछुआ
ओ देखो रे देखो रे
देखो उतर गयो बिछुआ
हे टूट के रह गयो
डन्क उतर गयो बिछुआ
ओ टूट के रह गयो
डन्क उतर गयो बिछुआ
सैंया को देख के
जाने किधर गयो बिछुआ
ओ सैंया को देख के
जाने किधर गयो बिछुआ

कैसो रे पापी बिछुआ बिछुआ – 2
ओ दैया रे दैया रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ
ओ दैया रे दैया रे
चढ़ गयो पापी बिछुआ
ओ हाय-हाय रे मर गई
कोई उतारो बिछुआ
ओ हाय-हाय रे मर गई
कोई उतारो बिछुआ


फ़िल्म: मधुमती / Madhumati (1958)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, मन्ना डे
संगीतकार: सलिल चौधरी
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: जॉनीवाकर, प्राण, दिलीप कुमार, वैजयन्ती माला, जयंत


Wednesday, August 9, 2017

दुख और सुख के रास्ते

दुख और सुख के रास्ते, बने हैं सब के वास्ते
जो ग़म से हार जाओगे, तो किस तरह निभाओगे
खुशी मिले हमें के ग़म, जो होगा बाँट लेंगे हम
मुझे तुम आज़माओ तो, ज़रा नज़र मिलाओ तो
ये जिस्म दो सही, दिलों में फ़ासला नहीं
जहां में ऐसा कौन है, कि जिसको ग़म मिला नहीं

तुम्हारे प्यार की क़सम, तुम्हारा ग़म है मेरा ग़म
न यूँ बुझे-बुझे रहो, जो दिल की बात है कहो
जो मुझ से भी छुपाओगे, तो फिर किसे बताओगे
मैं कोई गैर तो नहीं, दिलाऊँ किस तरह यक़ीं

कि तुमसे मैं जुदा नहीं, मुझसे तुम जुदा नहीं

Wednesday, August 2, 2017

आवारा हूँ या गर्दिश में हूँ

आवारा हूँ या गर्दिश में हूँ
आसमान का तारा हूँ

घर-बार नहीं, संसार नहीं
मुझसे किसी को प्यार नहीं
उस पार किसी से मिलने का इकरार नहीं
मुझसे किसी को प्यार नहीं
अनजान नगर सुनसान डगर का प्यारा हूँ
आवारा हूँ...

आबाद नहीं, बर्बाद सही
गाता हूँ खुशी के गीत मगर
ज़ख्मों से भरा सीना है मेरा
हंसती है मगर यह मस्त नज़र
दुनिया मैं तेरे तीर का
या तकदीर का मारा हूँ
आवारा हूँ...

Movie/Album: आवारा (1951)
Music By: जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मुकेश


Tuesday, July 25, 2017

दिन हैं बहार के

दिन हैं बहार के तेरे मेरे इक़रार के
दिल के सहारे आजा प्यार करें
दुश्मन हैं प्यार के जब लाखों ग़म संसार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें ?

दुनिया का बोझ ज़रा दिल से उतार दे
छोटी सी ज़िंदगी है हंस के गुज़ार दे
अपनी तो ज़िंदगी बीती है जी को मार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें ?

अच्छा नहीं होता यूं ही सपनों से खेलना
बड़ा ही कठिन है हक़ीक़तों को झेलना
अपनी हक़ीक़तें मेरे सपनों पे वार के
दिल के सहारे आजा प्यार करें

ऐसी वैसी बातें सभी दिल से निकाल दे
जीना है तो कश्ती को धारे पे डाल दे
धारे की गोद में घेरे भी हैं मंझधार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें ?

दिन हैं बहार के तेरे मेरे इक़रार के
दिल के सहारे आजा प्यार करें

Monday, July 3, 2017

रमैय्या वस्तावैय्या

रमैय्या वस्तावैय्या, रमैय्या वस्तावैय्या
मैंने दिल तुझको दिया

नैनों में थी प्यार की रोशनी
तेरी आँखों में ये दुनियादारी ना थी
तू और था, तेरा दिल और था
तेरे मन में ये मीठी कटारी ना थी
मैं जो दुःख पाऊं तो क्या, आज पछताऊं तो क्या
मैंने दिल तुझको...

उस देश में, तेरे परदेस में
सोने चांदी के बदले में बिकते हैं दिल
इस गाँव में, दर्द की छाँव में
प्यार के नाम पर ही तड़पते हैं दिल
चाँद तारों के टेल, रात ये गाती चले
मैंने दिल तुझको...

याद आती रही, दिल दुखाती रही
अपने मन को मनाना न आया हमें
तू ना आए तो क्या, भूल जाए तो क्या
प्यार करके भुलाना न आया हमें
वहीं से दूर से ही, तू भी ये कह दे कभी
मैंने दिल तुझको...

रास्ता वही और मुसाफिर वही
एक तारा न जाने कहाँ छुप गया
दुनिया वही, दुनियावाले वही
कोई क्या जाने किसका जहां लूट गया
मेरी आँखों में रहे, कौन जो तुझसे कहे
मैंने दिल तुझको...


Movie/Album: श्री ४२० (1955)
Music By: शंकर जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: लता मंगेशकर, मो.रफ़ी, मुकेश

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...