Tuesday, July 25, 2017

दिन हैं बहार के

दिन हैं बहार के तेरे मेरे इक़रार के
दिल के सहारे आजा प्यार करें
दुश्मन हैं प्यार के जब लाखों ग़म संसार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें ?

दुनिया का बोझ ज़रा दिल से उतार दे
छोटी सी ज़िंदगी है हंस के गुज़ार दे
अपनी तो ज़िंदगी बीती है जी को मार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें ?

अच्छा नहीं होता यूं ही सपनों से खेलना
बड़ा ही कठिन है हक़ीक़तों को झेलना
अपनी हक़ीक़तें मेरे सपनों पे वार के
दिल के सहारे आजा प्यार करें

ऐसी वैसी बातें सभी दिल से निकाल दे
जीना है तो कश्ती को धारे पे डाल दे
धारे की गोद में घेरे भी हैं मंझधार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें ?

दिन हैं बहार के तेरे मेरे इक़रार के
दिल के सहारे आजा प्यार करें

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