Tuesday, June 13, 2017

खुले गगन के नीचे पंछी

खुले गगन के नीचे पंछी, घूमें डाली डाली
मैं क्या जानूं उड़ना क्या है, मैं पिंजरे की पाली

शीशे के ताबूत में जैसे, मछली माथा पटके
पत्थर के इस बंदी घर में, मेरी आत्मा भटके

गमले के इस फूल का जीवन, मेरी कथा सुनाये
इसी के अंदर खिले बिचारा, इसी में मुरझा जाये|

[ Movie : मेहमान-1974 ]

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...