Tuesday, June 13, 2017

खुले गगन के नीचे पंछी

खुले गगन के नीचे पंछी, घूमें डाली डाली
मैं क्या जानूं उड़ना क्या है, मैं पिंजरे की पाली

शीशे के ताबूत में जैसे, मछली माथा पटके
पत्थर के इस बंदी घर में, मेरी आत्मा भटके

गमले के इस फूल का जीवन, मेरी कथा सुनाये
इसी के अंदर खिले बिचारा, इसी में मुरझा जाये|

[ Movie : मेहमान-1974 ]

Saturday, June 10, 2017

क्या मिलिये ऐसे लोगों से

क्या मिलिये ऐसे लोगों से, जिनकी फ़ितरत छुपी रहे
नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छुपी रहे |

खुद से भी जो खुद को छुपाएं, क्या उनसे पहचान करें
क्या उनके दामन से लिपटें, क्या उनका अरमान करें
जिनकी आधी नीयत उभरे, आधी नीयत छुपी रहे
दिलदारी का ढोंग रचाकर, जाल बिछाएं बातों का
जीते-जी का रिश्ता कहकर, सुख ढूंढे कुछ रातों का
रूह की हसरत लब पे आए, जिस्म की हसरत छुपी रहे

जिनके ज़ुल्म से दुखी है जनता, हर बस्ती हर गांव में
दया-धरम की बात करें वो बैठ के सजी सभाओं में
दान का चर्चा घर घर पहुंचे, लूट की दौलत छुपी रहे

देखें इन नकली चेहरों की कब तक जय-जयकार चले
उजले कपड़ों की तह में कब तक काला संसार चले
कब तक लोगों की नज़रों से छुपी हकीकत छुपी रहे

Wednesday, June 7, 2017

गाता रहे मेरा दिल

गाता रहे मेरा दिल
तू ही मेरी मंज़िल
कहीं बीतें ना ये रातें
कहीं बीतें ना ये दिन

प्यार करने वाले, अरे प्यार ही करेंगे
जलने वाले चाहे जल-जल मरेंगे
मिलके जो धड़के हैं दो दिल हरदम ये कहेंगे
कहीं बीतें ना...

ओ मेरे हमराही, मेरी बाँह थामे चलना
बदले दुनिया सारी, तुम न बदलना
प्यार हमे भी सिखला देगा, गर्दिश में सम्भलना
कहीं बीतें ना...

दूरियाँ अब कैसी, अरे शाम जा रही है
हमको ढलते-ढलते समझा रही है
आती-जाती साँस जाने कब से गा रही है
कहीं बीतें ना...

Movie/Album: गाईड (1965)
Music By: एस.डी.बर्मन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: किशोर कुमार, लता मंगेशकर

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...