खुले गगन के नीचे पंछी, घूमें डाली डाली
मैं क्या जानूं उड़ना क्या है, मैं पिंजरे की पाली
शीशे के ताबूत में जैसे, मछली माथा पटके
पत्थर के इस बंदी घर में, मेरी आत्मा भटके
गमले के इस फूल का जीवन, मेरी कथा सुनाये
इसी के अंदर खिले बिचारा, इसी में मुरझा जाये|
[ Movie : मेहमान-1974 ]
मैं क्या जानूं उड़ना क्या है, मैं पिंजरे की पाली
शीशे के ताबूत में जैसे, मछली माथा पटके
पत्थर के इस बंदी घर में, मेरी आत्मा भटके
गमले के इस फूल का जीवन, मेरी कथा सुनाये
इसी के अंदर खिले बिचारा, इसी में मुरझा जाये|
[ Movie : मेहमान-1974 ]