Friday, March 15, 2019

जियो तो ऐसे जियो

जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है
मरो तो ऐसे कि जैसे तुम्हारा कुछ नहीं |

ये एक राज़ के दुनिया न जिसको जान सकी
यही वो राज़ है जो ज़िंदगी का हासिल है,
तुम्हीं कहो तुम्हे ये बात कैसे समझाऊँ
कि ज़िंदगी की घुटन ज़िंदगी की कातिल है,
हर इक निगाह को कुदरत का ये इशारा है

जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है ।
जहां में आ के जहां से खिचें-खिचें न रहो
वो ज़िंदगी ही नही जिसमें आस बुझ जाए,
कोई भी प्यास दबाये से दब नहीं सकती
इसी से चैन मिलेगा कि प्यास बुझ जाए,
ये कह के मुड़ता हुआ ज़िंदगी का धारा है
जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है ।

ये आसमां, ये जमीं, ये फिजा, ये नज़्ज़ारे
तरस रहे हैं तुम्हारी मेरी नज़र के लिए
नज़र चुरा के हर एक शै को यूं न ठुकराओ
कोई शरीक-ए-सफ़र ढूँढ़ लो सफ़र के लिए
बहुत करीब से मैंने तुम्हें पुकारा है
जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है ।

Wednesday, February 27, 2019

इतनी नाज़ुक न बनो

इतनी नाज़ुक न बनो, इतनी नाज़ुक न बनो,
हद के अन्दर हो नजाकत तो अदा होती है
हद से बढ जाये तो आप ही अपनी सज़ा होती है।

जिस्म का बोझ उठाये नहीं उठता तुम से
जिंदगानी का कडा बोझ सहोगी कैसे
तुम जो हलकी सी हवाओं में लचक जाती हो
तेज झोंकों के थपेड़ों में रहोगी कैसे।

ये न समझो के हर एक राह में कलियाँ होंगी
राह चलनी है तो काँटों में भी चलना होगा
ये नया दौर है इस दौर में जीने के लिए
हुस्न को हुस्न का अंदाज़ बदलना होगा।

कोई रुकता नहीं ठहरे हुए राही के लिए
जो भी देखेगा वो कतरा के गुज़र जाएगा
हम अगर वक़्त के हमराह न चलने पाए
वक़्त हम दोनों को ठुकरा के गुजर जाएगा।

इतनी नाज़ुक न बनो, इतनी नाज़ुक न बनो।

Friday, February 22, 2019

तेरा हाथ हाथ में हो अगर

तेरा हाथ हाथ में हो अगर तो सफर ही असले-हयात है
मेरे हर कदम पे हैं मंज़िलें, तेरा प्यार गर मेरे साथ है

मेरी बात का मेरी हमनफस तू जवाब दे कि न दे मुझे
तेरी एक चुप में जो है छुपी, वो हज़ार बातों की बात है

मेरी ज़िंदगी का हर एक पल तेरे हुस्न से है जुड़ा हुआ
तेरे होंठ थिरके तो सुबह है तेरी जुल्फ बिखरे तो रात है


बस्ती -बस्ती पर्वत-पर्वत

बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा
लेके दिल का इकतारा..
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा

पल दो पल का साथ हमारा पल दो पल के यारी
आज रुके तो कल करनी है चलने की तैयारी
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा
लेके दिल का इकतारा...

क़दम-क़दम पर होनी बैठी अपना जाल बिछाए
इस जीवन की राह में जाने कौन कहाँ रह जाए 
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा 
लेके दिल का इकतारा...

धन -दौलत के पीछे क्यों है ये दुनिया दीवानी
यहाँ की दौलत यहाँ रहेगी साथ नहीं ये जानी
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा
लेके दिल का इकतारा...।

Wednesday, January 23, 2019

ये रात ये चांदनी फिर कहाँ

ये रात ये चांदनी फिर कहां सुन जा दिल की दास्तां

पेड़ों की शाखों पे सोई-साई चांदनी
तेरे ख्यालों में खोई—खोई चांदनी
और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी
रात ये बहार की फिर कभी न आएगी
दो एक पल और है ये समां।

लहरों के होंठो पे धीमा-धीमा राग है
भीगी हवाओं में ठंडी-ठंडी आग है
इस हसीं आग में तू भी जल के देख ले
ज़िन्दगी के गीत की धुन बदल के देख ले
खुलने दे अब धड़कनों की ज़बां।

जाती बहारें हैं उठती जवानियां
तारों की छांव में कह ले कहानियां
एक बार चल दिए गर तुझे पुकार के
लौटकर न आयेंगे काफिले बहार के
आजा अभी ज़िन्दगी है जवां।

Wednesday, January 2, 2019

तख़्त न होगा ताज न होगा

तख़्त न होगा ताज न होगा, कल था लेकिन आज न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें,वो सच्चा स्वराज न होगा।

लाखों की मेहनत पर कब्ज़ा मुठ्ठी भर धनवानों का
दीन -रम के नाम पे खूनी बंटवारा इंसानों का
जिसका ये इतिहास रहा है अब वो अँधा राज न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होगा।

जनता का फरमान चलेगा, जनता की सरकार बनेगी
धरती की बेहक आबादी धरती की हकदार बनेगी
सामन्ती सरकार न होगी पूंजीवाद समाज न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होगा।

मेहनत पर मजदूर का हक़ है, खेतों पर दहकान का हक़ है
जीने पर पाबंदी क्यों है, जीना हर इंसान का हक़ है
जय हो जनता राज कि जिसमें हुल्लड़ और नियाज़ न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होग॥

Wednesday, December 12, 2018

ना तो कारवां की तलाश है

ना तो कारवां की तलाश है, ना तो रहबर की तलाश है
मेरे शौके खाना ख़राब को, तेरी रहगुजर की तलाश है.
मेरे ना मुराद जूनून का है इलाज तो कोई मौत है
जो दवा के नाम पे जहर दे उसी चारागर की तलाश है .

तेरा इश्क है मेरी आरज़ू, तेरा इश्क है तेरी आबरू
तेरा इश्क मैं कैसे छोड़ दूं, मेरी उम्र भर की तलाश है
दिल इश्क, जिस्म इश्क और जान इश्क है
ईमान की जो पूछो तो ईमान इश्क है
तेरा इश्क मैं कैसे छोड़ दूं, मेरी उम्र भर की तलाश है

जांसोज़ की हालत को जांसोज़ ही समझेगा
मैं शमा से कहता हूँ महफ़िल से नहीं कहता क्योंकि
ये इश्क इश्क है..

सहर तक सब का है अंजाम है जलकर ख़ाक हो जाना
बने महफ़िल में कोई शमा या परवाना हो जाये क्योंकि
ये इश्क इश्क है..

वहशते दिल रस्नो दार से रोकी न गयी
किसी खंज़र किसी तलवार से रोकी न गए
इश्क मजनूं की वो आवाज़ है, जिस के आगे
कोई लैला किसी दीवार से रोकी न गयी
ये इश्क इश्क है..

वो हँस के अगर मांगे तो हम जान भी दे दें
ये जान तो क्या चीज है, ईमान भी दे दें

नाजो अंदाज से कहते हैं क़ि जीना होगा
जहर भी देते हैं तो कहते हैं क़ि पीना होगा
जब मैं पीता हूँ तो कहते हैं क़ि मरता भी नहीं
जब मैं मरता हूँ तो कहते हैं क़ि जीना होगा
ये इश्क इश्क है..

मजहब इ इश्क की हर रस्म कड़ी होती है
हर कदम पे कोई दीवार खड़ी होती है
इश्क आज़ाद है, हिन्दू न मुस्लमान है इश्क
आप ही धर्म है और आप ही ईमान है इश्क
जिस से आगाह नहीं शेख ओ बरहन दोनों
इस हकीकत का गरजता हुआ ऐलान है इश्क

इश्क न पुच्छे दीं धरम नूं, इश्क न पूछे जातां
इश्क दे हत्थों गर्म लहू विच डूबियाँ लक्ख बराताँ 
 ये इश्क इश्क है..

राह उल्फ की कठिन है इसे आसान न समझ, क्योंकि
ये इश्क इश्क है..

बहुत कठिन है डगर पनघट की
अब क्या भर लाऊँ मैं जमुना से मटकी
मैं जो चली जल जमुना भरण को
नन्द को छोरो मोहे रोको
अब लाज रखो मेरे घूँघट पट की

जब जब कृष्ण की बंसी बजी निकली राधा सज से
जान अजान का ध्यान भुला के, लोकलाज को ताज के
बन-बन डोली जनक दुलारी पहन के प्रेम की माला
दर्शन जल की प्यासी मीरा पी गए विष का प्याला
और फिर अर्ज करी क़ि लाज राखो राखो राखो

अल्लाह और रसूल का फरमान इश्क है

यानी हदीस इश्क है, कुरान इश्क है
गौतम का और मसीहा का अरमान इश्क है
ये कायनात जिस्म है, और जान इश्क है
इश्क सरमद, इश्क ही मंसूर है
इश्क मूसा, इश्क कोहेतूर है
खाक को बुत और बुत को देवता करता है इश्क
इंतिहा ये है के बन्दे को खुदा करता है इश्क 
 ये इश्क इश्क है.।

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...