Friday, June 29, 2018

चीन ओ अरब हमारा

चीन ओ अरब हमारा, हिन्दोस्तान हमारा
रहने को घर नहीं है, सारा जहां हमारा
चीन ओ अरब हमारा .…

खोली भी छिन गयी है, बेंचें भी छिन गईं हैं
सड़कों पे घूमता है, अब कारवाँ हमारा
जेबें हैं अपनी खाली, क्यों देता वरना गाली
वो संतरी हमारा, वो पासबां हमारा
चीन ओ अरब हमारा …

जितनी भी बिल्डिंगें थीं, सेठों ने बाँट ली हैं
फुटपाथ बंबई के हैं आशियाँ हमारा
होने को हम कलंदर, आते हैं बोरी बन्दर
हर एक कुली यहाँ है राजदा हमारा
चीन ओ अरब हमारा..

तालीम है अधूरी, मिलती नहीं मजूरी
मालूम क्या किसी को, दर्दे निहां हमारा
चीन ओ अरब हमारा…

पतला है हाल अपना, लेकिन लहू है गाडा
फौलाद से बना है, हर नौजवान हमारा
मिल-जुल के इस वतन को, ऐसा सजायेंगे हम
हैरत से मुंह तकेगा, सारा जहां हमारा
चीन ओ अरब हमारा...

[Singer : Mukesh; 
 Composer : Khayyam; 
 Producer : Parijat Pictures; 
 Director: Ramesh Saigal; 
Artist : Raj Kapoor ]
 

Thursday, June 28, 2018

मैं हर इक पल का शायर हूँ

मैं हर इक पल का शायर हूँ
हर इक पल मेरी कहानी है
हर इक पल मेरी हस्ती है
हर इक पल मेरी जवानी है।

रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़तम नहीं होती
ख्वाबों और उमंगों की मियादें ख़तम नहीं होती
इक फूल मैं तेरा रूप बसा, इक फूल में तेरी जवानी है
इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है।

तुझको मुझको जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है
इनकी धड़कन में बसना है, इनकी धड़कन में जीना है
तू अपनी अदाएं बख्श इन्हें, मैं अपनी वफायें देता हूँ
जो अपने लिए सोची थी कभी, वो सारी दुवायें देता हूँ।

मैं हर इक पल का शायर हूँ
हर इक पल मेरी कहानी है
हर इक पल मेरी हस्ती है
हर इक पल मेरी जवानी है।

Wednesday, May 23, 2018

चलो इक बार फिर से

चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों
न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिल नवाजी की
न तुम मेरी तरफत देखो गलत अंदाज़ नज़रों से
न मेरे दिल के धड़कन लडखडाये मेरी बातों में
न ज़ाहिर हो तुम्हारी कशमकश का राज़ नज़रों से
चलो इक बार फिर से..


तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से
मुझे भी लोग कहते हैं कि यह जलवे पराये हैं
मेरे हमराह भी रुस्वाइयां हैं मेरे माझी की
तुम्हारे साथ भी गुजरी हुई रातों के साए हैं
चलो इक बार फिर से ..

तारुफ़ रोग हो जाए तो उसको भूलना बेहतर
ताल्लुक बोझ बन जाए तो उसको तोड़ना अच्छा
वोह अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा
चलो इक बार फिर से ..।

Monday, May 21, 2018

दिल का हाल सुने दिलवाला

दिल का हाल सुने दिलवाला
सीधी सी बात न मिर्च मसाला
कहके रहेगा कहनेवाला
दिल का हाल सुने दिलवाला

छोटे से घर में गरीब का बेटा
मैं भी हूँ माँ के नसीब का बेटा
रन्ज-ओ-ग़म बचपन के साथी
आँधियों में जली जीवन बाती
भूख ने हैं बड़े प्यार से पाला
दिल का हाल...

हाय करूँ क्या सूरत ऐसी
गांठ के पूरे चोर के जैसी
चलता फिरता जान के एक दिन
बिन देखे-पहचान के एक दिन
बांध के ले गया पुलिसवाला
दिल का हाल...

बूढ़े दरोगा ने चश्मे से देखा
आगे से देखा, पीछे से देखा
ऊपर से देखा, नीचे से देखा
बोला ये क्या कर बैठे घोटाला
हाय ये क्या कर बैठे घोटाला
ये तो है थानेदार का साला
दिल का हाल...

ग़म से अभी आज़ाद नहीं मैं
ख़ुश हूँ मगर आबाद नहीं मैं
मंज़िल मेरे पास खड़ी है
पाँव में लेकिन बेड़ी पड़ी है
टांग अड़ाता है दौलतवाला
दिल का हाल...

सुन लो मगर ये किसी से न कहना
तिनके का ले के सहारा न बहना
बिन मौसम मल्हार न गाना
आधी रात को मत चिल्लाना लाना
वरना पकड़ लेगा पुलिसवाला
दिल का हाल...

Wednesday, May 16, 2018

ये मेरा दीवानापन है

दिल से तुझको बेदिली है,
मुझको है दिल का गुरूर
तू ये माने के न माने,
लोग मानेंगे ज़ुरूर

ये मेरा दीवानापन है,
या मुहब्बत का सुरूर तू न पहचाने तो है ये,
तेरी नज़रों का क़ुसूर ये मेरा दीवानापन है ... 

 दिल को तेरी ही तमन्ना,
दिल को है तुझसे ही प्यार चाहे तू आए न आए,
हम करेंगे इंतज़ार ये मेरा दीवानापन है ..

ऐसे वीराने में इक दिन, घुट के मर जाएंगे 
हम जितना जी चाहे पुकारो, फिर नहीं आएंगे हम
ये मेरा दीवानापन है ...

Wednesday, April 11, 2018

रेशमी सलवार कुरता जाली का

रेशमी सलवार कुरता जाली का
रूप सहा नहीं जाए नखरेवाली का

जा रे! पीछा छोड़ मुझ मतवाली का
काहे ढूंढे रास्ता कुतवाली का

जब जब तुझको देखूं, मेरे दिल में छुटे फुलझड़ियां
करूंगा तेरा पीछा, चाहे लग जाएं हथकड़ियां
क्या है कुतवाली का !

मैं हूं इज़्ज़त वाली, मुझे समझ ना ऐसी वैसी
बड़े बड़ों की मैंने, कर दी है ऐसी तैसी
तू है किस थाली का !

रूप तेरे का लटका, मेरे दिल को दे गया झटका
रंग भरे हाथों से ज़रा खोल दे पट घूंघट का
दिल है दिलवाली का
रूप सहा नहीं जाए नखरे वाली का

Monday, April 9, 2018

अपने अन्दर जरा झांक मेरे वतन

अपने अंदर जरा झांक मेरे वतन
अपने ऐबों को मत ढांक मेरे वतन

तेरा इतिहास है खूं में लिथड़ा हुआ,
तू अभी तक है दुनिया में पिछड़ा हुआ
तूने अपनों को अपना न माना कभी
तूने इन्सां को इन्सां न जाना कभी
तेरे धर्मों ने जातों की तकसीम की
तेरी रस्मों ने नफरत की तालीम दी
वहसतों का चलन तुझमें जारी रहा
नफरतों का जुंनू तुझपे तारी रहा

रंग और नस्ल के दायरों से निकल
गिर चुका है बहुत देर अब तो संभल
तू द्राविड़ है या आर्य नस्ल है
जो भी है अब इसी ख़ाक.की फ़स्ल है
तेरे दिल से जो नफरत न मिट पाएगी
तेरे घर में गुलामी पलट आएगी
तेरी बरबादियों का तुझे वास्ता
ढूंढ़ अपने लिए अब नया रास्ता |

[ Singer : Rafi;
Composer : N.Dutta; 
Producer : I.A.Nadiadwala; 
Director : Khalid Akhtar]

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...