Monday, April 9, 2018

तू प्यार का सागर है ...

तू प्यार का सागर है
तेरी इक बूँद के प्यासे हम
लौटा जो दिया तुमने, चले जायेंगे जहाँ से हम
तू प्यार का सागर है ...

घायल मन का, पागल पंछी उड़ने को बेक़रार
पंख हैं कोमल, आँख है धुँधली, जाना है सागर पार
जाना है सागर पार
अब तू हि इसे समझा, राह भूले थे कहान से हम
तू प्यार का सागर है ...

इधर झूमती गाये ज़िंदगी, उधर है मौत खड़ी
कोई क्या जाने कहाँ है सीमा, उलझन आन पड़ी
उलझन आन पड़ी
कानों में ज़रा कह दे, कि आये कौन दिशा से हम
तू प्यार का सागर है ...



Wednesday, March 14, 2018

ये रात भीगी-भीगी

ये रात भीगी-भीगी ये मस्त फ़िज़ाएँ
उठा धीरे-धीरे वो चाँद प्यारा-प्यारा
क्यों आग सी लगा के गुमसुम है चाँदनी
सोने भी नहीं देता मौसम का ये इशारा

इठलाती हवा नीलम सा गगन
कलियों पे ये बेहोशी की नमी
ऐसे में भी क्यों बेचैन है दिल
जीवन में न जाने क्या है कमी
क्यों आग सी लगा के …
ये रात भीगी-भीगी …

जो दिन के उजाले में न मिला
दिल ढूँढे ऐसे सपने को
इस रात की जगमग में डूबी
मैं ढूँढ रही हूँ अपने को
ये रात भीगी-भीगी …
क्यों आग सी लगा के …

ऐसे में कहीं क्या कोई नहीं
भूले से जो हमको याद करे
इक हल्की सी मुस्कान से जो
सपनों का जहाँ आबाद करे
ये रात भीगी-भीगी …


Sunday, March 11, 2018

कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया

कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हरेक बात पे रोना आया ।

हम तो समझे थे के हम भूल गये हैं उनको
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया ।

किस लिये जीते हैं हम किसके लिये जीते हैं
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया ।

कौन रोता है किसी और के खातिर ऐ दोस्त
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया ।

[Music : Jaidev;
Singer : Md. Rafi; 
Production House : Navketan; 
Director : Amarjeet; 
Actor : Dev Anand]

Thursday, February 22, 2018

पान खाये सैंयाँ हमारो

पान खाये सैंयाँ हमारो
साँवली सूरतिया होंठ लाल-लाल
हाय-हाय मलमल का कुरता
मलमल के कुरते पे छींट लाल-लाल
पान खाये सैंयाँ हमारो

(हमने मँगाई सुरमेदानी
ले आया ज़ालिम बनारस का ज़रदा) – 2
आ
अपनी ही दुनिया में खोया रहे वो
हमरे दिल की न पूछे बेदर्दा
पूछे बेदर्दा

पान खाये सैंयाँ हमारो
होय-होय
साँवली सूरतिया होंठ लाल-लाल
हाय-हाय मलमल का कुरता
मलमल के कुरते पे छींट लाल-लाल
पान खाये सैंयाँ हमारो

(बगिया गुन-गुन पायल छुन-छुन
चुपके से आई है रुत मतवाली) – 2
खिल गईं कलियाँ दुनिया जाने
लेकिन न जाने बगिया का माली
बगिया का माली

पान खाये सैंयाँ हमारो
होय-होय
साँवली सूरतिया होंठ लाल-लाल
हाय-हाय मलमल का कुरता
मलमल के कुरते पे छींट लाल-लाल
पान खाये सैंयाँ हमारो

(खा के गिलोरी शाम से ऊँघे
सो जाये वो दीया-बाती से पहले) – 2
आँगन-अटारी में घबराई डोलूँ
चोरी के डर से दिल मोरा दहले
दिल मोरा दहले

पान खाये सैंयाँ हमारो
साँवली सूरतिया होंठ लाल-लाल
हाय-हाय मलमल का कुरता
मलमल के कुरते पे छींट लाल-लाल
पान खाये सैंयाँ हमारो

Tuesday, February 13, 2018

मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया


मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया
हर फ़िक्र को धुएं में उडाता चला गया ।

बरबादियों का सोग मानना फ़िज़ूल था,
बरबादियों का जश्न मनाता चला गया ।

जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया
जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया ।

ग़म और ख़ुशी में फर्क न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मुकाम पे लाता चला गया ।

हर फ़िक्र को धुएं में उडाता चला गया ।

[Music : Jaidev;
Singer : Md. Rafi;
Production House : Navketan
Films; Director : Amarjeet;
Actor : Dev Anand]

Tuesday, February 6, 2018

दे भी चुके हम दिल नज़राना

दे भी चुके हम दिल नज़राना दिल का
छोड़ो भी ये राग पुराना दिल का

एक नज़र में हार चुके हैं दिल को
तेरी अदा पे वार चुके हैं दिल को
मुश्किल है अब लौट के आना दिल का
छोड़ो भी ये राग पुराना दिल का

मुंह धो ले ओ जाल बिछाने वाले!
हम नहीं इन बातों में आने वाले
खेल है ये जाना पहचाना दिल का
दे भी चुके हम दिल नज़राना दिल का

छीन के दिल आशिक़ का मुकरने वाले
मर जाएंगे तुझ पर मरने वाले
छोड़ भी दे ज़ालिम तड़पाना दिल का
छोड़ो भी ये राग पुराना दिल का
डाली-डाली फिरते हैं हरजाई
लोभी भंवरों ने कब प्रीत निभाई
यूँ ही सब करते हैं बहाना दिल का
दे भी चुके हम दिल नज़राना दिल का
यूं ही सब करते हैं बहाना दिल का
खेल है ये जाना-पहचाना दिल का
छोड़ो भी ये राग पुराना दिल का

Saturday, February 3, 2018

गापुची-गापुची गम-गम

गापुची-गापुची गम-गम
किशिकी-किशिकी कम-कम
ओ सनम! हम दोनों साथ रहे जनम-जनम

फूलों जैसा चेहरा, डाली जैसा तन है
तेरी ही अमानत, हर धड़कन है
आ भी जा! बाहों में, प्यार का हो संगम

जादू भरी आंखें, ख्वाबों के खजाने
महकी-महकी साँसे, बातें हैं तराने
आ भी जा! बाहों में, प्यार का हो संगम

जागे-जागे अरमान, भीगा-भीगा मौसम
दिलों की ये हलचल, बूंदों की ये छम-छम
आ भी जा! बाहों में, प्यार का हो संगम

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...