Friday, September 16, 2016

तू ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर

तू ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर,
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!

सुबह औ' शाम के रंगे हुए गगन को चूमकर,
तू सुन ज़मीन गा रही है कब से झूम-झूमकर,
तू आ मेरा सिंगार कर, तू आ मुझे हसीन कर!
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है

ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार दिन,
ये दिन भी जाएंगे गुज़र, गुज़र गए हज़ार दिन,
कभी तो होगी इस चमन पर भी बहार की नज़र!
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है

हमारे कारवां का मंज़िलों को इन्तज़ार है,
यह आंधियों, ये बिजलियों की, पीठ पर सवार है,
जिधर पड़ेंगे ये क़दम बनेगी एक नई डगर
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है

हज़ार भेष धर के आई मौत तेरे द्वार पर
मगर तुझे न छल सकी चली गई वो हार कर
नई सुबह के संग सदा तुझे मिली नई उमर
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है

ज़मीं के पेट में पली अगन, पले हैं ज़लज़ले,
टिके न टिक सकेंगे भूख रोग के स्वराज ये,
मुसीबतों के सर कुचल, बढ़ेंगे एक साथ हम,
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है

बुरी है आग पेट की, बुरे हैं दिल के दाग़ ये,
न दब सकेंगे, एक दिन बनेंगे इन्क़लाब ये,
गिरेंगे जुल्म के महल, बनेंगे फिर नवीन घर!
अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है


ना धेला लगता है, ना पैसा लगता है

ना धेला लगता है, ना पैसा लगता है
चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है

बिना कलों के जुड़ने वाला,बिना परों के उड़ने वाला
सारों झूलों से आला ये झूला, जो भी झूला वो सब दुख भूला
ना जैसा कुछ भी हो, ये वैसा लगता है
चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है

जो कोई छूना चाहे तारों को, मस्का लगाए जरा यारों को
बातें बनाए थोड़ा मुस्का के, झूले की डोरी थामे शरमा के
जैसे दो बाहें हो, ये वैसा लगता है
चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है

बांके हसीनों पे ये मरता है, प्यारों से प्यार सदा करता है
ऐसे न पीछे हटो डर-डर के, आओ झुला दें तुम्हें जी भर के
जो तुम पर आशिक हो, ये वैसा लगता है
चढ़ के देखो जी, ये झूला कैसा लगता है

Sunday, September 4, 2016

झूमती चली हवा

झूमती चली हवा, याद आ गया कोई
बुझती बुझती आग को, फिर जला गया कोई
झूमती चली हवा ...

खो गई हैं मंज़िलें, मिट गये हैं रास्ते
गर्दिशें ही गर्दिशें, अब हैं मेरे वास्ते
अब हैं मेरे वास्ते
और ऐसे में मुझे, फिर बुला गया कोई
झूमती चली हवा ...

चुप हैं चाँद चाँदनी, चुप ये आसमान है
मीठी मीठी नींद में, सो रहा जहान है
सो रहा जहान है
आज आधी रात को, क्यों जगा गया कोई
झूमती चली हवा ...

एक हूक सी उठी, मैं सिहर के रह गया
दिल को अपना थाम के आह भर के रह गया
चाँदनी की ओट से मुस्कुरा गया कोई
झूमती चली हवा ...


चित्रपट / Film: Sangeet Samrat Tansen
संगीतकार / Music Director: S N Tripathi
गीतकार / Lyricist: शैलेन्द्र-(Shailendra)
गायक / Singer(s): मुकेश-(Mukesh)

Thursday, August 25, 2016

इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके

इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके
जिसने ये पहनाई है उस दिलदार के सदके
उस ज़ुल्फ़ के क़ुरबां लब-ओ-रुखसार के सदके
हर जलवा था इक शोला हुस्न-ए-यार के सदके

जवानी माँगती ये हसीं झंकार बरसों से
तमन्ना बुन रही थी धड़कनों के हार बरसों से
छुप-छुप के आने वाले तेरे प्यार के सदके

जवानी सो रही थी हुस्न की रंगीं पनाहों में
चुरा लाये हम उनके नाज़नीं जलवे निगाहों में
किस्मत से जो हुआ है उस दीदार के सदके

नज़र लहरा रही है, जिस्म पे मस्ती सी छाई है
दुबारा देखने की शौक़ ने हलचल मचाई है
दिल को जो लग गया है उस आज़ार के सदके

Wednesday, August 17, 2016

आज रोना पड़ा

आज रोना पड़ा तो समझे
हँसने का मोल क्या है
अपना सपना खोना पड़ा तो समझे

ख़्वाबों की हक़ीक़त क्या थी
अरमानों की क़ीमत क्या थी
अपनों की मुहब्बत क्या थी
ग़ैर होना पड़ा तो समझे

सुख मिलता है किस मुश्किल से
क्या करती है दुनिया दिल से
इस रंग भरी महफ़िल से
दूर होना पड़ा तो समझे

निकले थे जिन्हें अपनाने
वो लोग थे सब बेगाने
इस बात को हम दीवाने
चैन खोना पड़ा तो समझे

Saturday, July 9, 2016

निगाहों में चमक जाग उठी

कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी
दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी

किसके आने की ख़बर ले के हवाएं आईं
जिस्म से फूल चटकने की सदाएं आईं
रूह खिलने लगी, सांसों में महक जाग उठी

किसने ये मेरी नज़र देख के बांहें खोलीं
शोख़ जज़्बात ने सीने में निगाहें खोलीं
होंठ तपने लगे, ज़ुल्फ़ों में लचक जाग उठी

किसके हाथों ने मेरे हाथों से कुछ मांगा है
किसके ख़्वाबों ने मेरी रातों से कुछ मांगा है
साज़ बजने लगे, आंचल में धनक जाग उठी

Tuesday, July 5, 2016

आज की रात पिया दिल न तोड़ो

आज की रात पिया दिल न तोड़ो
मन की बात पिया मान लो |

दिल की कहानी अपनी ज़ुबानी तुमको सुनाने आयी हूँ
आँखों में ले के सपने सुहाने, अपना बनाने आयी हूँ
छोड़ के साथ पिया मुँह न मोड़ो
मन की बात पिया मान लो |

चन्दा भी देखे तारे भी देखे हमको गगन की ओट से
घायल किया है दिल तुमने मेरा मीठी नज़र की चोट से
थाम के हाथ पिया यूँ न छोड़ो
मन की बात पिया मान लो।

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...