Thursday, November 5, 2015

हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत

हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत
हर एक नज़र में कोई पहचान है अमानत

तूफान की अमानत, साहिल एक खुश्क़ बाजू
साहिल के बाजुओं की तूफान है अमानत
हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत

सोचें अगर कोई तो इंसा का अपना क्या है
ये जिस्म है अमानत, ये जान है अमानत
हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत

जो तुझको मिल गया है, तेरा नहीं है नादां
दो-रोजा ज़िंदगी का सामना है अमानत
हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत।


Monday, November 2, 2015

दिल की नज़र से

दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे

धीरे से उठकर, होठों पे आया
ये गीता कैसा, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

क्यों बेखबर, यूँ खिंची सी चली जा रही मैं
ये कौन से बन्धनों में बंधी जा रही मैं
कुछ खो रहा है, कुछ मिल रहा है
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

हम खो चले, चाँद है या कोई जादूगर है
या मदभरी, ये तुम्हारी नज़र का असर है
सब कुछ हमारा, अब है तुम्हारा
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

आकाश में, हो रहें हैं ये कैसे इशारे
क्या, देखकर, आज हैं इतने खुश चाँद-तारे
क्यों तुम पराये, दिल में समाये
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

Movie/Album: अनाड़ी (1959)
Music By: शंकर जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मुकेश, लता मंगेशकर


Wednesday, October 28, 2015

दोस्त, दोस्त ना रहा

दोस्त, दोस्त ना रहा, प्यार, प्यार ना रहा
ज़िंदगी हमें तेरा ऐतबार ना रहा

अमानतें मैं प्यार की, गया था जिसको सौंप कर
वो मेरे दोस्त तुम ही थे, तुम्हीं तो थे
जो ज़िंदगी की राह मे, बने थे मेरे हमसफ़र
वो मेरे दोस्त तुम ही थे, तुम्हीं तो थे
सारे भेद खुल गए, राज़दार ना रहा
ज़िंदगी हमें तेरा...

गले लगीं सहम सहम, भरे गले से बोलतीं
वो तुम ना थीं तो कौन था, तुम्हीं तो थीं
सफ़र के वक्त में पलक पे मोतियों को तोलती
वो तुम ना थी तो कौन था, तुम्हीं तो थीं
नशे की रात ढल गयी, अब खुमार ना रहा
ज़िन्दगी हमें तेरा...

वफ़ा का ले के नाम जो, धड़क रहे थे हर घड़ी
वो मेरे नेक नेक दिल, तुम्हीं तो हो
जो मुस्कुराते रह गए, जहर की जब सुई गड़ी
वो मेरे नेक नेक दिल, तुम्हीं तो हो
अब किसी का मेरे दिल, इंतज़ार ना रहा
ज़िन्दगी हमें तेरा...

Movie/Album : संगम (1964)
Music By : शंकर-जयकिशन
Lyrics By : शैलेन्द्र सिंह
Performed By : मुकेश

Wednesday, October 21, 2015

मस्त पवन, मस्त गगन

मस्त पवन, मस्त गगन, मस्त है सारा समां
अंग-अंग झूम उठे, आज ऐसा रंग जमा

आज मेरी चूड़ियों के साज गुनगुना उठे
धूल भरे रास्तों में फूल मुस्कुरा उठे
दिल में झिलमिलाने लगी आस की नन्हीं-सी शमा

सोई-सोई ज़िंदगी में इक तरंग जाग पड़ी
करवटें बदल के दिल की हर उमंग जाग पड़ी
बिगड़ी हुई बात बनी, जाता हुआ वक़्त थमा।


Sunday, October 18, 2015

हमने लाख हसीं देखे हैं

यूं तो हमने लाख हसीं देखे हैं
तुम सा नहीं देखा

उफ! ये नज़र, उफ! ये अदाकौन न अब होगा फिदा
ज़ुल्फें हैं या बदलियां
आंखें हैं या बिजलियां
जाने किस-किसकी आएगी क़ज़ा।


Thursday, September 24, 2015

किस जगह जाएँ, किसको दिखलाएँ

हो किस जगह जाएँ
किसको दिखलाएँ
ज़ख़्म-ए-दिल अपना

सारे जग में अपना कोई नहीं
सुख क्या दुख का सपना कोई नहीं
हो किस जगह जाएँ ...

दिल के अरमाँ पूरे हो न सके
हँसना कैसा खुल कर रो न सके
हो किस जगह जाएँ।

Wednesday, September 16, 2015

गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो

गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो
कल की बातें कल पर छोड़ो
आज मज़ा ले लो

आ! तुझे कसम है
आ! जहां का गम है
दिलवालों के इस मेले में मौज मना लो यारों
कस्टम-वस्टम, कल्चर वल्चर सबको गोली मारो
मुफ्त मिले जब दिल की खुशियाँ फिर तकलीफ़ें क्यों झेलो
मज़ा ले लो
गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो

आ! नज़ारे हैं जवां
आ! तू गुम है कहां
खिले खिले मुरझा न जाएं ये फूलों से चेहरे
इन फूलों को गूँथ के पहनो सर पर बांधों सेहरे
दुनिया तुम से खेल रही है तुम दुनिया से खेलो
मज़ा ले लो
गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो।

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...