Tuesday, October 17, 2017

हो के मायूस

हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया
झोलियां भर गईं सबकी कोई खाली न गया

तेरे दरबार में जो भी परेशां हो के आए
दुआएं दे के जाए और मुरादें ले के जाए
तू रहमत का फ़रिश्ता है, तू उजड़े घर बसाए
तू रूहों का मसीहा है, तू हर ग़म को मिटाये
अहले-दिल, अहले-मोहब्बत पे इनायत है तेरी
तूने डूबों को उभारा है, ये शोहरत है तेरी
अनोखी शान तेरी, निराली आन तेरी
तू मस्ती का ख़ज़ाना, तेरा हर दिल दीवाना
तू महबूब-ए-ख़ुदा है, तू हर ग़म की दवा है
तभी तो सब कहते हैं -
हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया

जमाल-ए-यार देखा है, रुख़-ए-दिलदार देखा
किसी का नाज़नीं जलवा सर-ए-दरबार देखा
तमन्नाओं के सहरा में हसीं गुलज़ार देखा
जब से देखा है तुझे दिल का अज़ब आलम है
जान-ओ-इमां भी अगर नज़र करूं तो कम है
था जो सुनने में आया तुझे वैसा ही पाया
तू अरमानों का साहिल, तू उम्मीदों की मंज़िल
तू हर बिगड़ी बनाए, तू बिछड़ों को मिलाए
तभी तो सब कहते हैं -
हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया

मुहब्बत बड़े काम की चीज़

हर तरफ़ हुस्न है जवानी है, आज की रात क्या सुहानी है
रेशमी जिस्म थरथराते हैं, मरमरी ख़्वाब गुनगुनाते हैं
धड़कनों में सुरूर फैला है, रंग नजदीक-ओ-दूर फैला है
दावत-ए-इश्क़ दे रही है फ़ज़ा, आज हो जा किसी हसीं पे फ़िदा
मुहब्बत बड़े काम की चीज़ है, काम की चीज़ है

मुहब्बत के दम से है दुनिया की रौनक
मुहब्बत ना होती तो कुछ भी ना होता
नजर और दिल की पनाहों की खातिर
ये जन्नत ना होती तो कुछ भी ना होता
यही एक आराम की चीज़ है, काम की चीज़ है

किताबों में छपते हैं चाहत के किस्से
हक़ीकत की दुनिया में चाहत नहीं
ज़माने के बाज़ार में ये वो शह है
कि जिसकी किसी को ज़रूरत नहीं है
ये बेकार, बेदाम की चीज़ है
ये कुदरत के इनाम की चीज़ है
ये बस नाम ही नाम की चीज़ है

मुहब्बत से इतना खफ़ा होने वाले
चल आ! आज तुझको मुहब्बत सिखा दे
तेरा दिल जो बरसों से वीरां पड़ा है
किसी नाज़नीनां को इसमें बसा दें
मेरा मशवरा काम की चीज़ है, काम की चीज़ है


Tuesday, October 10, 2017

याद न जाए, बीते दिनों की

याद न जाए, बीते दिनों की
जाके न आये जो दिन, दिल क्यूँ बुलाए, उन्हें
दिल क्यों बुलाए
याद न जाये ...

दिन जो पखेरू होते, पिंजरे में मैं रख देता - २
पालता उनको जतन से
पालता उनको जतन से, मोती के दाने देता
सीने से रहता लगाए
याद न जाए ...

तस्वीर उनकी छुपाके, रख दूँ जहाँ जी चाहे - २
मन में बसी ये सूरत
मन में बसी ये सूरत, लेकिन मिटे न मिटाए
कहने को है वो पराए
याद न जाए ...



चित्रपट / Film: Dil Ek Mandir
संगीतकार / Music Director: शंकर - जयकिशन-(Shankar-Jaikishan)
गीतकार / Lyricist: शैलेन्द्र-(Shailendra)
गायक / Singer(s): मोहम्मद रफ़ी-(Mohammad Rafi)


Wednesday, October 4, 2017

कोई राग छेड़, दबी आग छेड़

Koi raag chhed dabi aag chhed
Ke yahi hai zindgani
Kahi hai bahar kahi par nisar
Koi mang le nishani
Koi raag chhed dabi aag chhed
Ke yahi hai zindgani
Kahi hai bahar kahi par nisar
Kahi bandh le nishana
Koi raag ho

Abhi waqt maharba hai
Abhi zindagi jawa hai
Abhi waqt maharba hai
Abhi zindagi jawa hai
Ye sama tera sama hai
Koi raag chhed

Neet aaho ke ishare
Ye khile khile nazare
Neet aaho ke ishare
Ye khile khile nazare
Mujhe kah rahe hai sare
Koi raag chhed

Zara dil ki sun suna le
Zara khud ko aazma le
Zara dil ki sun suna le
Zara khud ko aazma le
Koi aarzu jaga le
Koi raag chhed
Koi raag chhed dabi aag chhed
Ke yahi hai zindgani
Kahi hai bahar kahi par nisar
Koi mang le nishani
Koi raag chhed.

Sunday, October 1, 2017

चोरी चोरी मेरी गली आना

चोरी चोरी मेरी गली आना है बुरा
आ के बिना बात किये जाना है बुरा

अच्छे नहीं ये इशारे, पेड़ों तले छुप-छुपा के
आओ न दो बातें कर लें, नज़रों से नज़रे मिला के
दिन हैं प्यार के, मौज बहार के
देखो! भोले-भाले जी को तरसाना है बुरा

दिल आ गया है तो प्यारे, बदनाम होने का डर क्या?
इश्क़ और वफ़ा की गली में, दुनिया के ग़म का गुज़र क्या?
दिन हैं प्यार के, मौज बहार के

देखो! भोले-भाले जी को तरसाना है बुरा

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...