हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया
झोलियां भर गईं सबकी कोई खाली न गया
तेरे दरबार में जो भी परेशां हो के आए
दुआएं दे के जाए और मुरादें ले के जाए
तू रहमत का फ़रिश्ता है, तू उजड़े घर बसाए
तू रूहों का मसीहा है, तू हर ग़म को मिटाये
अहले-दिल, अहले-मोहब्बत पे इनायत है तेरी
तूने डूबों को उभारा है, ये शोहरत है तेरी
अनोखी शान तेरी, निराली आन तेरी
तू मस्ती का ख़ज़ाना, तेरा हर दिल दीवाना
तू महबूब-ए-ख़ुदा है, तू हर ग़म की दवा है
तभी तो सब कहते हैं -
हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया
जमाल-ए-यार देखा है, रुख़-ए-दिलदार देखा
किसी का नाज़नीं जलवा सर-ए-दरबार देखा
तमन्नाओं के सहरा में हसीं गुलज़ार देखा
जब से देखा है तुझे दिल का अज़ब आलम है
जान-ओ-इमां भी अगर नज़र करूं तो कम है
था जो सुनने में आया तुझे वैसा ही पाया
तू अरमानों का साहिल, तू उम्मीदों की मंज़िल
तू हर बिगड़ी बनाए, तू बिछड़ों को मिलाए
तभी तो सब कहते हैं -
हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया
झोलियां भर गईं सबकी कोई खाली न गया
तेरे दरबार में जो भी परेशां हो के आए
दुआएं दे के जाए और मुरादें ले के जाए
तू रहमत का फ़रिश्ता है, तू उजड़े घर बसाए
तू रूहों का मसीहा है, तू हर ग़म को मिटाये
अहले-दिल, अहले-मोहब्बत पे इनायत है तेरी
तूने डूबों को उभारा है, ये शोहरत है तेरी
अनोखी शान तेरी, निराली आन तेरी
तू मस्ती का ख़ज़ाना, तेरा हर दिल दीवाना
तू महबूब-ए-ख़ुदा है, तू हर ग़म की दवा है
तभी तो सब कहते हैं -
हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया
जमाल-ए-यार देखा है, रुख़-ए-दिलदार देखा
किसी का नाज़नीं जलवा सर-ए-दरबार देखा
तमन्नाओं के सहरा में हसीं गुलज़ार देखा
जब से देखा है तुझे दिल का अज़ब आलम है
जान-ओ-इमां भी अगर नज़र करूं तो कम है
था जो सुनने में आया तुझे वैसा ही पाया
तू अरमानों का साहिल, तू उम्मीदों की मंज़िल
तू हर बिगड़ी बनाए, तू बिछड़ों को मिलाए
तभी तो सब कहते हैं -
हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया