Tuesday, July 25, 2017

दिन हैं बहार के

दिन हैं बहार के तेरे मेरे इक़रार के
दिल के सहारे आजा प्यार करें
दुश्मन हैं प्यार के जब लाखों ग़म संसार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें ?

दुनिया का बोझ ज़रा दिल से उतार दे
छोटी सी ज़िंदगी है हंस के गुज़ार दे
अपनी तो ज़िंदगी बीती है जी को मार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें ?

अच्छा नहीं होता यूं ही सपनों से खेलना
बड़ा ही कठिन है हक़ीक़तों को झेलना
अपनी हक़ीक़तें मेरे सपनों पे वार के
दिल के सहारे आजा प्यार करें

ऐसी वैसी बातें सभी दिल से निकाल दे
जीना है तो कश्ती को धारे पे डाल दे
धारे की गोद में घेरे भी हैं मंझधार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें ?

दिन हैं बहार के तेरे मेरे इक़रार के
दिल के सहारे आजा प्यार करें

Monday, July 3, 2017

रमैय्या वस्तावैय्या

रमैय्या वस्तावैय्या, रमैय्या वस्तावैय्या
मैंने दिल तुझको दिया

नैनों में थी प्यार की रोशनी
तेरी आँखों में ये दुनियादारी ना थी
तू और था, तेरा दिल और था
तेरे मन में ये मीठी कटारी ना थी
मैं जो दुःख पाऊं तो क्या, आज पछताऊं तो क्या
मैंने दिल तुझको...

उस देश में, तेरे परदेस में
सोने चांदी के बदले में बिकते हैं दिल
इस गाँव में, दर्द की छाँव में
प्यार के नाम पर ही तड़पते हैं दिल
चाँद तारों के टेल, रात ये गाती चले
मैंने दिल तुझको...

याद आती रही, दिल दुखाती रही
अपने मन को मनाना न आया हमें
तू ना आए तो क्या, भूल जाए तो क्या
प्यार करके भुलाना न आया हमें
वहीं से दूर से ही, तू भी ये कह दे कभी
मैंने दिल तुझको...

रास्ता वही और मुसाफिर वही
एक तारा न जाने कहाँ छुप गया
दुनिया वही, दुनियावाले वही
कोई क्या जाने किसका जहां लूट गया
मेरी आँखों में रहे, कौन जो तुझसे कहे
मैंने दिल तुझको...


Movie/Album: श्री ४२० (1955)
Music By: शंकर जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: लता मंगेशकर, मो.रफ़ी, मुकेश

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