Thursday, August 25, 2016

इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके

इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके
जिसने ये पहनाई है उस दिलदार के सदके
उस ज़ुल्फ़ के क़ुरबां लब-ओ-रुखसार के सदके
हर जलवा था इक शोला हुस्न-ए-यार के सदके

जवानी माँगती ये हसीं झंकार बरसों से
तमन्ना बुन रही थी धड़कनों के हार बरसों से
छुप-छुप के आने वाले तेरे प्यार के सदके

जवानी सो रही थी हुस्न की रंगीं पनाहों में
चुरा लाये हम उनके नाज़नीं जलवे निगाहों में
किस्मत से जो हुआ है उस दीदार के सदके

नज़र लहरा रही है, जिस्म पे मस्ती सी छाई है
दुबारा देखने की शौक़ ने हलचल मचाई है
दिल को जो लग गया है उस आज़ार के सदके

Wednesday, August 17, 2016

आज रोना पड़ा

आज रोना पड़ा तो समझे
हँसने का मोल क्या है
अपना सपना खोना पड़ा तो समझे

ख़्वाबों की हक़ीक़त क्या थी
अरमानों की क़ीमत क्या थी
अपनों की मुहब्बत क्या थी
ग़ैर होना पड़ा तो समझे

सुख मिलता है किस मुश्किल से
क्या करती है दुनिया दिल से
इस रंग भरी महफ़िल से
दूर होना पड़ा तो समझे

निकले थे जिन्हें अपनाने
वो लोग थे सब बेगाने
इस बात को हम दीवाने
चैन खोना पड़ा तो समझे

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...