Friday, December 25, 2015

हुस्न हाज़िर है

हुस्न हाज़िर है मुहब्बत की सज़ा पाने को
कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को

मेरे दीवाने को इतना न सताओ लोगों
ये तो वहशी है, तुम्हीं होश में आओ लोगों
बहुत रंजूर है ये, ग़मों से चूर है ये
ख़ुदा का ख़ौफ़ खाओ, बहुत मजबूर है ये
क्यों चले आये हो बेबस पे सितम ढाने को

मेरे जलवों की ख़ता है, जो ये दीवाना हुआ
मैं हूं मुजरिम ये अगर, होश से बेगाना हुआ
मुझे सूली चढ़ा दो कि शोलों में जला दो
कोई शिक़वा नहीं है, जो जी चाहे सज़ा दो
बख़्श दो इसको, मैं तैयार हूं मिट जाने को

पत्थरों को भी वफ़ा फूल बना सकती है
ये तमाशा भी सरे आम दिखा सकती है
लो अब पत्थर उठाओ! ज़माने के ख़ुदाओं!
तुम्हें मैं आज़माऊं, मुझे तुम आज़माओ
अब दुआ अर्श पे जाती है असर लाने को

Wednesday, December 23, 2015

बुझे-बुझे रंग हैं नज़ारों के

बुझे-बुझे रंग हैं नज़ारों के
लुट गए काफिले बहारों के
फूलों की तमन्ना की थी, हार मिले खारों के

बीती रुतों को कोई कैसे पुकारे
हम कल तलक थे सबके, सब थे हमारे
आज मोहताज हैं सहारों के

कल ज़िंदगी थी अपनी सुख का तराना
मरने का ढूंढते हैं आज हम बहाना

कैसे-कैसे खेल हैं सितारों के


Thursday, November 5, 2015

हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत

हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत
हर एक नज़र में कोई पहचान है अमानत

तूफान की अमानत, साहिल एक खुश्क़ बाजू
साहिल के बाजुओं की तूफान है अमानत
हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत

सोचें अगर कोई तो इंसा का अपना क्या है
ये जिस्म है अमानत, ये जान है अमानत
हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत

जो तुझको मिल गया है, तेरा नहीं है नादां
दो-रोजा ज़िंदगी का सामना है अमानत
हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत।


Monday, November 2, 2015

दिल की नज़र से

दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे

धीरे से उठकर, होठों पे आया
ये गीता कैसा, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

क्यों बेखबर, यूँ खिंची सी चली जा रही मैं
ये कौन से बन्धनों में बंधी जा रही मैं
कुछ खो रहा है, कुछ मिल रहा है
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

हम खो चले, चाँद है या कोई जादूगर है
या मदभरी, ये तुम्हारी नज़र का असर है
सब कुछ हमारा, अब है तुम्हारा
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

आकाश में, हो रहें हैं ये कैसे इशारे
क्या, देखकर, आज हैं इतने खुश चाँद-तारे
क्यों तुम पराये, दिल में समाये
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

Movie/Album: अनाड़ी (1959)
Music By: शंकर जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मुकेश, लता मंगेशकर


Wednesday, October 28, 2015

दोस्त, दोस्त ना रहा

दोस्त, दोस्त ना रहा, प्यार, प्यार ना रहा
ज़िंदगी हमें तेरा ऐतबार ना रहा

अमानतें मैं प्यार की, गया था जिसको सौंप कर
वो मेरे दोस्त तुम ही थे, तुम्हीं तो थे
जो ज़िंदगी की राह मे, बने थे मेरे हमसफ़र
वो मेरे दोस्त तुम ही थे, तुम्हीं तो थे
सारे भेद खुल गए, राज़दार ना रहा
ज़िंदगी हमें तेरा...

गले लगीं सहम सहम, भरे गले से बोलतीं
वो तुम ना थीं तो कौन था, तुम्हीं तो थीं
सफ़र के वक्त में पलक पे मोतियों को तोलती
वो तुम ना थी तो कौन था, तुम्हीं तो थीं
नशे की रात ढल गयी, अब खुमार ना रहा
ज़िन्दगी हमें तेरा...

वफ़ा का ले के नाम जो, धड़क रहे थे हर घड़ी
वो मेरे नेक नेक दिल, तुम्हीं तो हो
जो मुस्कुराते रह गए, जहर की जब सुई गड़ी
वो मेरे नेक नेक दिल, तुम्हीं तो हो
अब किसी का मेरे दिल, इंतज़ार ना रहा
ज़िन्दगी हमें तेरा...

Movie/Album : संगम (1964)
Music By : शंकर-जयकिशन
Lyrics By : शैलेन्द्र सिंह
Performed By : मुकेश

Wednesday, October 21, 2015

मस्त पवन, मस्त गगन

मस्त पवन, मस्त गगन, मस्त है सारा समां
अंग-अंग झूम उठे, आज ऐसा रंग जमा

आज मेरी चूड़ियों के साज गुनगुना उठे
धूल भरे रास्तों में फूल मुस्कुरा उठे
दिल में झिलमिलाने लगी आस की नन्हीं-सी शमा

सोई-सोई ज़िंदगी में इक तरंग जाग पड़ी
करवटें बदल के दिल की हर उमंग जाग पड़ी
बिगड़ी हुई बात बनी, जाता हुआ वक़्त थमा।


Sunday, October 18, 2015

हमने लाख हसीं देखे हैं

यूं तो हमने लाख हसीं देखे हैं
तुम सा नहीं देखा

उफ! ये नज़र, उफ! ये अदाकौन न अब होगा फिदा
ज़ुल्फें हैं या बदलियां
आंखें हैं या बिजलियां
जाने किस-किसकी आएगी क़ज़ा।


Thursday, September 24, 2015

किस जगह जाएँ, किसको दिखलाएँ

हो किस जगह जाएँ
किसको दिखलाएँ
ज़ख़्म-ए-दिल अपना

सारे जग में अपना कोई नहीं
सुख क्या दुख का सपना कोई नहीं
हो किस जगह जाएँ ...

दिल के अरमाँ पूरे हो न सके
हँसना कैसा खुल कर रो न सके
हो किस जगह जाएँ।

Wednesday, September 16, 2015

गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो

गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो
कल की बातें कल पर छोड़ो
आज मज़ा ले लो

आ! तुझे कसम है
आ! जहां का गम है
दिलवालों के इस मेले में मौज मना लो यारों
कस्टम-वस्टम, कल्चर वल्चर सबको गोली मारो
मुफ्त मिले जब दिल की खुशियाँ फिर तकलीफ़ें क्यों झेलो
मज़ा ले लो
गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो

आ! नज़ारे हैं जवां
आ! तू गुम है कहां
खिले खिले मुरझा न जाएं ये फूलों से चेहरे
इन फूलों को गूँथ के पहनो सर पर बांधों सेहरे
दुनिया तुम से खेल रही है तुम दुनिया से खेलो
मज़ा ले लो
गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो।

Thursday, August 20, 2015

किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार

किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार
किसीका दर्द मिल सके तो ले उधार
किसीके वास्ते हो तेरे दिल में प्यार
जीना इसी का नाम है
किसी की ...

(माना अपनी जेब से फ़कीर हैं
फिर भी यारों दिल के हम अमीर हैं ) - (२)
मिटे जो प्यार के लिये वो ज़िन्दगी
जले बहार के लिये वो ज़िन्दगी
किसी को हो न हो हमें तो ऐतबार
जीना इसी का नाम है

(रिश्ता दिल से दिल के ऐतबार का
ज़िन्दा है हमीं से नाम प्यार का ) - (२)
के मर के भी किसी को याद आयेंगे
किसी के आँसुओं में मुस्कुरायेंगे
कहेगा फूल हर कली से बार बार
जीना इसी का नाम है..


चित्रपट / Film: Anaadi
संगीतकार / Music Director: शंकर - जयकिशन-(Shankar-Jaikishan)
गीतकार / Lyricist: शैलेन्द्र-(Shailendra)
गायक / Singer(s): मुकेश-(Mukesh)

Tuesday, August 4, 2015

हर दिल जो प्यार करेगा

हर दिल जो प्यार करेगा, वो गाना गायेगा
दीवाना सैंकड़ों में पहचाना जायेगा

आप हमारे दिल को चुरा के आँख चुराये जाते हैं
ये इक तरफ़ा रसम-ए-वफ़ा हम फिर भी निभाये जाते हैं
चाहत का दस्तूर है लेकिन, आपको ही मालूम नहीं
जिस महफ़िल में शमा हो, परवाना जायेगा
दीवाना सैंकड़ों में...

भूली बिसरी यादें मेरे हँसते गाते बचपन की
रात बिरात चली आतीं हैं, नींद चुराने नैनन की
अब कह दूँगी, करते करते, कितने सावन बीत गये
जाने कब इन आँखों का शरमाना जायेगा
दीवाना सैंकड़ों में...

अपनी-अपनी सब ने कह ली, लेकिन हम चुपचाप रहे
दर्द पराया जिसको प्यारा, वो क्या अपनी बात कहे
ख़ामोशी का ये अफ़साना रह जायेगा बाद मेरे
अपना के हर किसी को, बेगाना जायेगा
दीवाना सैंकड़ों में...

Movie/Album: संगम (1964)
Music By: शंकर जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मुकेश, लता मंगेशकर, महेंद्र कपूर



Thursday, July 23, 2015

सब कुछ सीखा हमने

सब कुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी
सच है दुनिया वालों कि हम हैं अनाड़ी

दुनिया ने कितना समझाया
कौन है अपना कौन पराया
फिर भी दिल की चोट छुपा कर
हमने आपका दिल बहलाया
खुद ही मर मिटने की ये ज़िद है हमारी
सच है दुनिया वालों...

दिल का चमन उजड़ते देखा
प्यार का रंग उतरते देखा
हमने हर जीने वाले को
धन दौलत पे मरते देखा
दिल पे मरने वाले मरेंगे भिखारी
सच है दुनिया वालों...

असली नकली चेहरे देखे
दिल पे सौ सौ पहरे देखे
मेरे दुखते दिल से पूछो
क्या क्या ख्वाब सुनहरे देखे
टूटा जिस तारे पे नज़र थी हमारी
सच है दुनिया वालों...

Movie/Album: अनाड़ी (1959)
Music By: शंकर जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मुकेश


Wednesday, June 10, 2015

सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं

सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं (2)
हमें डर है हम खो न जाएं कहीं
सुहाना सफ़र …

(ये कौन हँसता है फूलों में छूप कर
बहार बेचैन है किसकी धुन पर) – (2)
कहीं गुमगुम, कहीं रुमझुम, के जैसे नाचे ज़मीं
सुहाना सफ़र …

(ये गोरी नदियों का चलना उछलकर
के जैसे अल्हड़ चले पी से मिलकर) – (2)
प्यारे प्यारे ये नज़ारे निखरे हैं हर कहीं
सुहाना सफ़र …

हो हो हो …
(वो आसमाँ झुक रहा है ज़मीं पर
ये मिलन हमने देखा यहीं पर) – (2)
मेरी दुनिया, मेरे सपने, मिलेंगे शायद यहीं
सुहाना सफ़र …

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...