Wednesday, May 23, 2018

चलो इक बार फिर से

चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों
न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिल नवाजी की
न तुम मेरी तरफत देखो गलत अंदाज़ नज़रों से
न मेरे दिल के धड़कन लडखडाये मेरी बातों में
न ज़ाहिर हो तुम्हारी कशमकश का राज़ नज़रों से
चलो इक बार फिर से..


तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से
मुझे भी लोग कहते हैं कि यह जलवे पराये हैं
मेरे हमराह भी रुस्वाइयां हैं मेरे माझी की
तुम्हारे साथ भी गुजरी हुई रातों के साए हैं
चलो इक बार फिर से ..

तारुफ़ रोग हो जाए तो उसको भूलना बेहतर
ताल्लुक बोझ बन जाए तो उसको तोड़ना अच्छा
वोह अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा
चलो इक बार फिर से ..।

Monday, May 21, 2018

दिल का हाल सुने दिलवाला

दिल का हाल सुने दिलवाला
सीधी सी बात न मिर्च मसाला
कहके रहेगा कहनेवाला
दिल का हाल सुने दिलवाला

छोटे से घर में गरीब का बेटा
मैं भी हूँ माँ के नसीब का बेटा
रन्ज-ओ-ग़म बचपन के साथी
आँधियों में जली जीवन बाती
भूख ने हैं बड़े प्यार से पाला
दिल का हाल...

हाय करूँ क्या सूरत ऐसी
गांठ के पूरे चोर के जैसी
चलता फिरता जान के एक दिन
बिन देखे-पहचान के एक दिन
बांध के ले गया पुलिसवाला
दिल का हाल...

बूढ़े दरोगा ने चश्मे से देखा
आगे से देखा, पीछे से देखा
ऊपर से देखा, नीचे से देखा
बोला ये क्या कर बैठे घोटाला
हाय ये क्या कर बैठे घोटाला
ये तो है थानेदार का साला
दिल का हाल...

ग़म से अभी आज़ाद नहीं मैं
ख़ुश हूँ मगर आबाद नहीं मैं
मंज़िल मेरे पास खड़ी है
पाँव में लेकिन बेड़ी पड़ी है
टांग अड़ाता है दौलतवाला
दिल का हाल...

सुन लो मगर ये किसी से न कहना
तिनके का ले के सहारा न बहना
बिन मौसम मल्हार न गाना
आधी रात को मत चिल्लाना लाना
वरना पकड़ लेगा पुलिसवाला
दिल का हाल...

Wednesday, May 16, 2018

ये मेरा दीवानापन है

दिल से तुझको बेदिली है,
मुझको है दिल का गुरूर
तू ये माने के न माने,
लोग मानेंगे ज़ुरूर

ये मेरा दीवानापन है,
या मुहब्बत का सुरूर तू न पहचाने तो है ये,
तेरी नज़रों का क़ुसूर ये मेरा दीवानापन है ... 

 दिल को तेरी ही तमन्ना,
दिल को है तुझसे ही प्यार चाहे तू आए न आए,
हम करेंगे इंतज़ार ये मेरा दीवानापन है ..

ऐसे वीराने में इक दिन, घुट के मर जाएंगे 
हम जितना जी चाहे पुकारो, फिर नहीं आएंगे हम
ये मेरा दीवानापन है ...

Wednesday, April 11, 2018

रेशमी सलवार कुरता जाली का

रेशमी सलवार कुरता जाली का
रूप सहा नहीं जाए नखरेवाली का

जा रे! पीछा छोड़ मुझ मतवाली का
काहे ढूंढे रास्ता कुतवाली का

जब जब तुझको देखूं, मेरे दिल में छुटे फुलझड़ियां
करूंगा तेरा पीछा, चाहे लग जाएं हथकड़ियां
क्या है कुतवाली का !

मैं हूं इज़्ज़त वाली, मुझे समझ ना ऐसी वैसी
बड़े बड़ों की मैंने, कर दी है ऐसी तैसी
तू है किस थाली का !

रूप तेरे का लटका, मेरे दिल को दे गया झटका
रंग भरे हाथों से ज़रा खोल दे पट घूंघट का
दिल है दिलवाली का
रूप सहा नहीं जाए नखरे वाली का

Monday, April 9, 2018

अपने अन्दर जरा झांक मेरे वतन

अपने अंदर जरा झांक मेरे वतन
अपने ऐबों को मत ढांक मेरे वतन

तेरा इतिहास है खूं में लिथड़ा हुआ,
तू अभी तक है दुनिया में पिछड़ा हुआ
तूने अपनों को अपना न माना कभी
तूने इन्सां को इन्सां न जाना कभी
तेरे धर्मों ने जातों की तकसीम की
तेरी रस्मों ने नफरत की तालीम दी
वहसतों का चलन तुझमें जारी रहा
नफरतों का जुंनू तुझपे तारी रहा

रंग और नस्ल के दायरों से निकल
गिर चुका है बहुत देर अब तो संभल
तू द्राविड़ है या आर्य नस्ल है
जो भी है अब इसी ख़ाक.की फ़स्ल है
तेरे दिल से जो नफरत न मिट पाएगी
तेरे घर में गुलामी पलट आएगी
तेरी बरबादियों का तुझे वास्ता
ढूंढ़ अपने लिए अब नया रास्ता |

[ Singer : Rafi;
Composer : N.Dutta; 
Producer : I.A.Nadiadwala; 
Director : Khalid Akhtar]

तू प्यार का सागर है ...

तू प्यार का सागर है
तेरी इक बूँद के प्यासे हम
लौटा जो दिया तुमने, चले जायेंगे जहाँ से हम
तू प्यार का सागर है ...

घायल मन का, पागल पंछी उड़ने को बेक़रार
पंख हैं कोमल, आँख है धुँधली, जाना है सागर पार
जाना है सागर पार
अब तू हि इसे समझा, राह भूले थे कहान से हम
तू प्यार का सागर है ...

इधर झूमती गाये ज़िंदगी, उधर है मौत खड़ी
कोई क्या जाने कहाँ है सीमा, उलझन आन पड़ी
उलझन आन पड़ी
कानों में ज़रा कह दे, कि आये कौन दिशा से हम
तू प्यार का सागर है ...



Wednesday, March 14, 2018

ये रात भीगी-भीगी

ये रात भीगी-भीगी ये मस्त फ़िज़ाएँ
उठा धीरे-धीरे वो चाँद प्यारा-प्यारा
क्यों आग सी लगा के गुमसुम है चाँदनी
सोने भी नहीं देता मौसम का ये इशारा

इठलाती हवा नीलम सा गगन
कलियों पे ये बेहोशी की नमी
ऐसे में भी क्यों बेचैन है दिल
जीवन में न जाने क्या है कमी
क्यों आग सी लगा के …
ये रात भीगी-भीगी …

जो दिन के उजाले में न मिला
दिल ढूँढे ऐसे सपने को
इस रात की जगमग में डूबी
मैं ढूँढ रही हूँ अपने को
ये रात भीगी-भीगी …
क्यों आग सी लगा के …

ऐसे में कहीं क्या कोई नहीं
भूले से जो हमको याद करे
इक हल्की सी मुस्कान से जो
सपनों का जहाँ आबाद करे
ये रात भीगी-भीगी …


इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...