Saturday, January 30, 2016

खोया खोया चाँद

खोया खोया चाँद, खुला आसमान
आँखों में सारी रात जायेगी
तुम को भी कैसे नींद आयेगी

मस्ती भरी, हवा जो चली
खिल खिल गयी ये दिल की कली
दिल की गली में है खलबली
कि उनको तो बुलाओ
ख़ोया खोया चाँद...

तारे चले, नज़ारे चले
संग संग मेरे वो सारे चले
चारों तरफ इशारे चले
किसी की तो हो जाओ
खोया खोया चाँद...

ऐसी ही रात, भीगी सी रात
हाथो में हाथ, होते वो साथ
कह लेते उनसे दिल की ये बात
अब तो ना सताओ
खोया खोया चाँद...

हम मिट चले हैं जिनके लिए
बिन कुछ कहे वो चुप चुप रहे
कोई ज़रा ये उनसे कहे
ना ऐसे आजमाओ
खोया खोया चाँद..

Movie/Album: काला बाज़ार (1960)
Music By: एस.डी.बर्मन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मो.रफ़ी


Friday, January 29, 2016

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं
यूं जा रहे हैं जैसे हमें जानते नहीं

अपनी गरज थी जब तो लिपटना कबूल था
बाहों के दायरे में सिमटना कबूल था
अब हम मना रहे हैं, मगर मानते नहीं

हमने तुम्हें पसंद किया, क्या बुरा किया
रुतबा ही कुछ बुलंद किया, क्या बुरा किया
हर इक गली की खाक तो हम छानते नहीं

मुंह फेर कर न जाओ हमारे करीब से
मिलता है कोई चाहने वाला नसीब से

इस तरह आशिकों पे कमान तानते नहीं।


Friday, December 25, 2015

हुस्न हाज़िर है

हुस्न हाज़िर है मुहब्बत की सज़ा पाने को
कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को

मेरे दीवाने को इतना न सताओ लोगों
ये तो वहशी है, तुम्हीं होश में आओ लोगों
बहुत रंजूर है ये, ग़मों से चूर है ये
ख़ुदा का ख़ौफ़ खाओ, बहुत मजबूर है ये
क्यों चले आये हो बेबस पे सितम ढाने को

मेरे जलवों की ख़ता है, जो ये दीवाना हुआ
मैं हूं मुजरिम ये अगर, होश से बेगाना हुआ
मुझे सूली चढ़ा दो कि शोलों में जला दो
कोई शिक़वा नहीं है, जो जी चाहे सज़ा दो
बख़्श दो इसको, मैं तैयार हूं मिट जाने को

पत्थरों को भी वफ़ा फूल बना सकती है
ये तमाशा भी सरे आम दिखा सकती है
लो अब पत्थर उठाओ! ज़माने के ख़ुदाओं!
तुम्हें मैं आज़माऊं, मुझे तुम आज़माओ
अब दुआ अर्श पे जाती है असर लाने को

Wednesday, December 23, 2015

बुझे-बुझे रंग हैं नज़ारों के

बुझे-बुझे रंग हैं नज़ारों के
लुट गए काफिले बहारों के
फूलों की तमन्ना की थी, हार मिले खारों के

बीती रुतों को कोई कैसे पुकारे
हम कल तलक थे सबके, सब थे हमारे
आज मोहताज हैं सहारों के

कल ज़िंदगी थी अपनी सुख का तराना
मरने का ढूंढते हैं आज हम बहाना

कैसे-कैसे खेल हैं सितारों के


Thursday, November 5, 2015

हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत

हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत
हर एक नज़र में कोई पहचान है अमानत

तूफान की अमानत, साहिल एक खुश्क़ बाजू
साहिल के बाजुओं की तूफान है अमानत
हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत

सोचें अगर कोई तो इंसा का अपना क्या है
ये जिस्म है अमानत, ये जान है अमानत
हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत

जो तुझको मिल गया है, तेरा नहीं है नादां
दो-रोजा ज़िंदगी का सामना है अमानत
हर एक दिल में कोई अरमान है अमानत।


Monday, November 2, 2015

दिल की नज़र से

दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे

धीरे से उठकर, होठों पे आया
ये गीता कैसा, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

क्यों बेखबर, यूँ खिंची सी चली जा रही मैं
ये कौन से बन्धनों में बंधी जा रही मैं
कुछ खो रहा है, कुछ मिल रहा है
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

हम खो चले, चाँद है या कोई जादूगर है
या मदभरी, ये तुम्हारी नज़र का असर है
सब कुछ हमारा, अब है तुम्हारा
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

आकाश में, हो रहें हैं ये कैसे इशारे
क्या, देखकर, आज हैं इतने खुश चाँद-तारे
क्यों तुम पराये, दिल में समाये
ये बात क्या है, ये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे
दिल की नज़र से...

Movie/Album: अनाड़ी (1959)
Music By: शंकर जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मुकेश, लता मंगेशकर


Wednesday, October 28, 2015

दोस्त, दोस्त ना रहा

दोस्त, दोस्त ना रहा, प्यार, प्यार ना रहा
ज़िंदगी हमें तेरा ऐतबार ना रहा

अमानतें मैं प्यार की, गया था जिसको सौंप कर
वो मेरे दोस्त तुम ही थे, तुम्हीं तो थे
जो ज़िंदगी की राह मे, बने थे मेरे हमसफ़र
वो मेरे दोस्त तुम ही थे, तुम्हीं तो थे
सारे भेद खुल गए, राज़दार ना रहा
ज़िंदगी हमें तेरा...

गले लगीं सहम सहम, भरे गले से बोलतीं
वो तुम ना थीं तो कौन था, तुम्हीं तो थीं
सफ़र के वक्त में पलक पे मोतियों को तोलती
वो तुम ना थी तो कौन था, तुम्हीं तो थीं
नशे की रात ढल गयी, अब खुमार ना रहा
ज़िन्दगी हमें तेरा...

वफ़ा का ले के नाम जो, धड़क रहे थे हर घड़ी
वो मेरे नेक नेक दिल, तुम्हीं तो हो
जो मुस्कुराते रह गए, जहर की जब सुई गड़ी
वो मेरे नेक नेक दिल, तुम्हीं तो हो
अब किसी का मेरे दिल, इंतज़ार ना रहा
ज़िन्दगी हमें तेरा...

Movie/Album : संगम (1964)
Music By : शंकर-जयकिशन
Lyrics By : शैलेन्द्र सिंह
Performed By : मुकेश

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...