Thursday, July 23, 2015

सब कुछ सीखा हमने

सब कुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी
सच है दुनिया वालों कि हम हैं अनाड़ी

दुनिया ने कितना समझाया
कौन है अपना कौन पराया
फिर भी दिल की चोट छुपा कर
हमने आपका दिल बहलाया
खुद ही मर मिटने की ये ज़िद है हमारी
सच है दुनिया वालों...

दिल का चमन उजड़ते देखा
प्यार का रंग उतरते देखा
हमने हर जीने वाले को
धन दौलत पे मरते देखा
दिल पे मरने वाले मरेंगे भिखारी
सच है दुनिया वालों...

असली नकली चेहरे देखे
दिल पे सौ सौ पहरे देखे
मेरे दुखते दिल से पूछो
क्या क्या ख्वाब सुनहरे देखे
टूटा जिस तारे पे नज़र थी हमारी
सच है दुनिया वालों...

Movie/Album: अनाड़ी (1959)
Music By: शंकर जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मुकेश


Wednesday, June 10, 2015

सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं

सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं (2)
हमें डर है हम खो न जाएं कहीं
सुहाना सफ़र …

(ये कौन हँसता है फूलों में छूप कर
बहार बेचैन है किसकी धुन पर) – (2)
कहीं गुमगुम, कहीं रुमझुम, के जैसे नाचे ज़मीं
सुहाना सफ़र …

(ये गोरी नदियों का चलना उछलकर
के जैसे अल्हड़ चले पी से मिलकर) – (2)
प्यारे प्यारे ये नज़ारे निखरे हैं हर कहीं
सुहाना सफ़र …

हो हो हो …
(वो आसमाँ झुक रहा है ज़मीं पर
ये मिलन हमने देखा यहीं पर) – (2)
मेरी दुनिया, मेरे सपने, मिलेंगे शायद यहीं
सुहाना सफ़र …

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...