Saturday, February 27, 2016

रात के हमसफ़र थक के घर को चले

रात के हमसफ़र, थक के घर को चले
झूमती आ रही है सुबह प्यार की
देख कर सामने, रूप की रोशनी
फिर लुटी जा रही है सुबह प्यार की

सोने वालों को हँसकर जगाना भी है
रात के जागतों को सुलाना भी है
दिल की है जागने की सदा साथ ही
लोरियां गा रही है सुबह प्यार की
रात के हमसफ़र...

रात ने प्यार के जाम भर कर दिए
आँखों आँखों से जो मैंने तुमने पिए
होश तो अब तलक जाके लौटे नहीं
और क्या ला रही है सुबह प्यार की
रात के हमसफ़र...

क्या क्या वादे हुए किसने खाई कसम
इस नयी राह पर हमने रखे कदम
छुप सका प्यार कब हम छुपाएँ तो क्या
सब समझ पा रही है सुबह प्यार की
रात के हमसफ़र...

Movie/Album: ऐन इवनिंग इन पेरिस (1967)
Music By: शंकर जयकिशन
Lyrics By: हसरत जयपुरी
Performed By: मो.रफ़ी, आशा भोंसले

Thursday, February 18, 2016

तेरी जवानी तपता महीना

तेरी जवानी तपता महीना, ए नाजनीना !
छू ले नज़र तो आए पसीना, ए नाजनीना !

हाय! ये तेरा लहराके चलना, इठलाके चलना
रह-रह के धड़के धरती का सीना, ए नाजनीना !

तेरे बदन में फूलों की नरमी, शोलों की गरमी
हर अंग तेरा तरशा नगीना, ए नाजनीना !

आंखों में बिजली, ज़ुल्फों में बादल, सांसों में हलचल
तुझ-सी नहीं कोई कातिल हसीना, ए नाजनीना !

जीने का कोई सामान कर दे, एहसान कर दे
तेरे बगैर अब मुश्किल है जीना, ए नाजनीना !


Monday, February 1, 2016

सजन रे झूठ मत बोलो

सजन रे झूठ मत बोलो
खुदा के पास जाना है
न हाथी है न घोड़ा है
वहाँ पैदल ही जाना है

तुम्हारे महल चौबारे
यहीं रह जायेंगे सारे
अकड़ किस बात की प्यारे
ये सर फिर भी झुकाना है
सजन रे झूठ...

भला कीजे भला होगा
बुरा कीजे बुरा होगा
बही लिख-लिख के क्या होगा
यहीं सब कुछ चुकाना है
सजन रे झूठ...

लड़कपन खेल में खोया
जवानी नींद भर सोया
बुढ़ापा देखकर रोया
वही किस्सा पुराना है
सजन रे झूठ...

Movie/Album: तीसरी कसम (1966)
Music By: शंकर-जयकिशन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मुकेश

Saturday, January 30, 2016

खोया खोया चाँद

खोया खोया चाँद, खुला आसमान
आँखों में सारी रात जायेगी
तुम को भी कैसे नींद आयेगी

मस्ती भरी, हवा जो चली
खिल खिल गयी ये दिल की कली
दिल की गली में है खलबली
कि उनको तो बुलाओ
ख़ोया खोया चाँद...

तारे चले, नज़ारे चले
संग संग मेरे वो सारे चले
चारों तरफ इशारे चले
किसी की तो हो जाओ
खोया खोया चाँद...

ऐसी ही रात, भीगी सी रात
हाथो में हाथ, होते वो साथ
कह लेते उनसे दिल की ये बात
अब तो ना सताओ
खोया खोया चाँद...

हम मिट चले हैं जिनके लिए
बिन कुछ कहे वो चुप चुप रहे
कोई ज़रा ये उनसे कहे
ना ऐसे आजमाओ
खोया खोया चाँद..

Movie/Album: काला बाज़ार (1960)
Music By: एस.डी.बर्मन
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मो.रफ़ी


Friday, January 29, 2016

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं
यूं जा रहे हैं जैसे हमें जानते नहीं

अपनी गरज थी जब तो लिपटना कबूल था
बाहों के दायरे में सिमटना कबूल था
अब हम मना रहे हैं, मगर मानते नहीं

हमने तुम्हें पसंद किया, क्या बुरा किया
रुतबा ही कुछ बुलंद किया, क्या बुरा किया
हर इक गली की खाक तो हम छानते नहीं

मुंह फेर कर न जाओ हमारे करीब से
मिलता है कोई चाहने वाला नसीब से

इस तरह आशिकों पे कमान तानते नहीं।


Friday, December 25, 2015

हुस्न हाज़िर है

हुस्न हाज़िर है मुहब्बत की सज़ा पाने को
कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को

मेरे दीवाने को इतना न सताओ लोगों
ये तो वहशी है, तुम्हीं होश में आओ लोगों
बहुत रंजूर है ये, ग़मों से चूर है ये
ख़ुदा का ख़ौफ़ खाओ, बहुत मजबूर है ये
क्यों चले आये हो बेबस पे सितम ढाने को

मेरे जलवों की ख़ता है, जो ये दीवाना हुआ
मैं हूं मुजरिम ये अगर, होश से बेगाना हुआ
मुझे सूली चढ़ा दो कि शोलों में जला दो
कोई शिक़वा नहीं है, जो जी चाहे सज़ा दो
बख़्श दो इसको, मैं तैयार हूं मिट जाने को

पत्थरों को भी वफ़ा फूल बना सकती है
ये तमाशा भी सरे आम दिखा सकती है
लो अब पत्थर उठाओ! ज़माने के ख़ुदाओं!
तुम्हें मैं आज़माऊं, मुझे तुम आज़माओ
अब दुआ अर्श पे जाती है असर लाने को

Wednesday, December 23, 2015

बुझे-बुझे रंग हैं नज़ारों के

बुझे-बुझे रंग हैं नज़ारों के
लुट गए काफिले बहारों के
फूलों की तमन्ना की थी, हार मिले खारों के

बीती रुतों को कोई कैसे पुकारे
हम कल तलक थे सबके, सब थे हमारे
आज मोहताज हैं सहारों के

कल ज़िंदगी थी अपनी सुख का तराना
मरने का ढूंढते हैं आज हम बहाना

कैसे-कैसे खेल हैं सितारों के


इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...