Wednesday, November 21, 2018

बच्चों तुम तकदीर हो कल के हिंदुस्तान की

बच्चों तुम तकदीर हो कल के हिंदुस्तान की
बापू के वरदान की, नेहरु के अरमान की।

आज के टूटे खँडहरों पर तुम कल का देश बसाओगे
जो हम लोगों से न हुआ वो तुम कर के दिखलाओगे
तुम नन्हीं बुनियादें हो दुनिया के नए विधान की।

दीन-धरम के नाम पे कोई बीज फूट का बोए ना
जो सदियों के बाद मिली है वो आज़ादी खोए ना
हर मज़हब से ऊँची है क़ीमत इन्सानी जान की।

फिर कोई जयचन्द न उभरे फिर कोई जाफ़र न उठे
ग़ैरों का दिल ख़ुश करने को अपनों पर खंज़र न उठे
धन-दौलत के लालच में तौहीन न हो ईमान की।
नारी को इस देश ने देवी कह कर दासी जाना है
जिसको कुछ अधिकार न हो वो घर की रानी माना है
तुम ऐसा आदर मत लेना आड़ हो जो अपमान की।

रह न सके अब इस दुनिया में युग सरमायादारी का
तुमको झंडा लहराना है मेहनत की सरदारी का
तुम चाहो तो बदल के रख दो क़िस्मत हर इन्सान की।

अब अगर हमसे ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए

अब अगर हम से ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए
गैर-मुमकिन है कि दिल दिल से जुदा हो जाए
जिस्म मिट जाए कि अब जान फ़ना हो जाए
गैर-मुमकिन है कि दिल दिल से जुदा हो जाए

जिस घड़ी मुझको पुकारेंगी तुम्हारी बांहें
रोक पाएंगी न सहरा की सुलगती राहें
चाहे हर सांस झुलसने की सज़ा हो जाए

लाख ज़ंजीरों में जकड़ें ये ज़माने वाले
तोड़कर बंध निकल आएंगे आने वाले
शर्त इतनी है कि तू जलवा-नुमां हो जाए

ज़लज़ले आएं, गरज़दार घटाएं घेरें
खंदकें राह में हों, तेज़ हवाएं घेरें
चाहे दुनिया में क़यामत ही बपा हो जाए

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इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...