हो किस जगह जाएँ
किसको दिखलाएँ
ज़ख़्म-ए-दिल अपना
सारे जग में अपना कोई नहीं
सुख क्या दुख का सपना कोई नहीं
हो किस जगह जाएँ ...
दिल के अरमाँ पूरे हो न सके
हँसना कैसा खुल कर रो न सके
हो किस जगह जाएँ।
किसको दिखलाएँ
ज़ख़्म-ए-दिल अपना
सारे जग में अपना कोई नहीं
सुख क्या दुख का सपना कोई नहीं
हो किस जगह जाएँ ...
दिल के अरमाँ पूरे हो न सके
हँसना कैसा खुल कर रो न सके
हो किस जगह जाएँ।