Thursday, September 24, 2015

किस जगह जाएँ, किसको दिखलाएँ

हो किस जगह जाएँ
किसको दिखलाएँ
ज़ख़्म-ए-दिल अपना

सारे जग में अपना कोई नहीं
सुख क्या दुख का सपना कोई नहीं
हो किस जगह जाएँ ...

दिल के अरमाँ पूरे हो न सके
हँसना कैसा खुल कर रो न सके
हो किस जगह जाएँ।

Wednesday, September 16, 2015

गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो

गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो
कल की बातें कल पर छोड़ो
आज मज़ा ले लो

आ! तुझे कसम है
आ! जहां का गम है
दिलवालों के इस मेले में मौज मना लो यारों
कस्टम-वस्टम, कल्चर वल्चर सबको गोली मारो
मुफ्त मिले जब दिल की खुशियाँ फिर तकलीफ़ें क्यों झेलो
मज़ा ले लो
गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो

आ! नज़ारे हैं जवां
आ! तू गुम है कहां
खिले खिले मुरझा न जाएं ये फूलों से चेहरे
इन फूलों को गूँथ के पहनो सर पर बांधों सेहरे
दुनिया तुम से खेल रही है तुम दुनिया से खेलो
मज़ा ले लो
गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो।

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...