Wednesday, June 10, 2015

सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं

सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं (2)
हमें डर है हम खो न जाएं कहीं
सुहाना सफ़र …

(ये कौन हँसता है फूलों में छूप कर
बहार बेचैन है किसकी धुन पर) – (2)
कहीं गुमगुम, कहीं रुमझुम, के जैसे नाचे ज़मीं
सुहाना सफ़र …

(ये गोरी नदियों का चलना उछलकर
के जैसे अल्हड़ चले पी से मिलकर) – (2)
प्यारे प्यारे ये नज़ारे निखरे हैं हर कहीं
सुहाना सफ़र …

हो हो हो …
(वो आसमाँ झुक रहा है ज़मीं पर
ये मिलन हमने देखा यहीं पर) – (2)
मेरी दुनिया, मेरे सपने, मिलेंगे शायद यहीं
सुहाना सफ़र …

इक परदेशी दूर से आया

इक परदेशी दूर से आया लड़की पर हक अपना जताया घर वालों ने हामी भर दी परदेशी की मर्ज़ी कर दी | प्यार के वादे हुए ना पूरे रह गए सारे ख्वाब अधू...